नक्सली शांत, शांतिपूर्ण चुनाव होने के संकेत!

Published at :21 Nov 2015 8:49 PM (IST)
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नक्सली शांत, शांतिपूर्ण चुनाव होने के संकेत!

नक्सली शांत, शांतिपूर्ण चुनाव होने के संकेत! चुनाव को लेकर गुमला पुलिस की विशेष रणनीति.दुर्जय पासवान, गुमलाहर चुनावों में विघ्न डालनेवाले नक्सली इसबार शांत मुद्रा में हैं. यह गुमला जिले के लिए अच्छी खबर है. क्योंकि पूर्व के चुनावों का इतिहास रहा है. माओवादी कहीं न कहीं कुछ विध्न पैदा करते रहे हैं. इससे अपने […]

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नक्सली शांत, शांतिपूर्ण चुनाव होने के संकेत! चुनाव को लेकर गुमला पुलिस की विशेष रणनीति.दुर्जय पासवान, गुमलाहर चुनावों में विघ्न डालनेवाले नक्सली इसबार शांत मुद्रा में हैं. यह गुमला जिले के लिए अच्छी खबर है. क्योंकि पूर्व के चुनावों का इतिहास रहा है. माओवादी कहीं न कहीं कुछ विध्न पैदा करते रहे हैं. इससे अपने ही मरते या नुकसान उठाते रहे हैं. लेकिन इसबार के पंचायत चुनाव में माओवादियों की शांत मुद्रा व सेफ जोन में अपने को सुरक्षित रखने की नक्सली योजना गुमला की बेहतरी के संकेत दे रहे हैं. पर अभी भी पुलिस आशंकित हैं. गुमला में कब कहां क्या होगा, कहा नहीं जा सकता. नक्सल ए श्रेणी गुमला में कभी भी नक्सली कुछ कर बैठते हैं. परंतु प्रशासन की जो तैयारी है, सबकुछ ठीक ही होगा. हालांकि गुमला में पुलिस के हाथों माओवादी सात महीने तक शिकस्त खाते रहे हैं. माओवादियों को भारी नुकसान पहुंचा है. माओवादियों के सेफ जोन जाने का एक कारण चुनाव से 15 दिन पहले से पुलिस की छापामारी अभियान भी चल रहा है. एसपी भीमसेन टुटी की माने तो पुलिस ने अपनी ओर से पूरी तैयारी की है. सभी कलस्टर में पुलिस फोर्स पहुंच गयी है. जहां जरूरत थी वहां पारा मिलिट्री फोर्स लगाया गया है. 22 नवंबर को कड़ी सुरक्षा के बीच मतदानकर्मी बूथ पहुंचेंगे. अतिसंवेदनशील बूथों पर पुलिस का कड़ा पहरा रहेगा.कहीं बहिष्कार की सूचना नहींहरेक चुनाव में नक्सली चुनाव का बहिष्कार करते आये हैं. लेकिन गुमला जिले के इतिहास में यह पहला पंचायत चुनाव होगा. जब नक्सलियों ने कहीं चुनाव का बहिष्कार नहीं किया है. यहां तक कि चुनाव प्रचार में निकले वाहनों व प्रत्याशियों को भी नुकसान नहीं पहुंचाया है. ऐसे रातोंरात कुछ भी हो सकता है. पर समाचार लिखे जाने तक नक्सल इलाकों में शांति माहौल है. जिला परिषद के कई प्रत्याशी जो शहर में रह कर गांव का चुनाव लड़ रहे हैं. वे गांवों में रात का डेरा डाले हुए हैं. ताकि उनके वोटरों को कोई दूसरा प्रत्याशी रिझा न सके.इन गांवों में रहते हैं नक्सलीगुमला व पालकोट में प्रथम चरण में चुनाव है. इस नजरिये से देखें तो इन दोनों प्रखंड के कई ऐसे गांव है. जहां नक्सली ठहरते हैं. इनमें गुमला प्रखंड के आंजन, हरिनाखाड़, कुल्ही, पतगच्छा, घटगांव, हुरहुरिया, जाना, जोरी गांव है. ये इलाके नक्सलियों के अनुसार उनके लिए सेफ जोन है. वहीं पालकोट प्रखंड में बिलिंगबीरा का इलाका है.

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