लीड... संस्कृति व परंपरा आदिवासियों की पहचान : बिशप

Updated at :15 Nov 2015 6:13 PM
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लीड… संस्कृति व परंपरा आदिवासियों की पहचान : बिशपस्थापना दिवस और वीर बिरसा मुंडा जयंती पर आदिवासी नृत्य प्रतियोगिता15 गुम 18 में मंच पर बिशप पॉल, पूर्व विधायक भूषण व अन्य15 गुम 19 में नृत्य प्रस्तुत करतीं लड़कियांप्रतिनिधि, गुमलाझारखंड राज्य के 16वें स्थापना दिवस व वीर बिरसा मुंडा जयंती के शुभ अवसर पर संत पात्रिक […]

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लीड… संस्कृति व परंपरा आदिवासियों की पहचान : बिशपस्थापना दिवस और वीर बिरसा मुंडा जयंती पर आदिवासी नृत्य प्रतियोगिता15 गुम 18 में मंच पर बिशप पॉल, पूर्व विधायक भूषण व अन्य15 गुम 19 में नृत्य प्रस्तुत करतीं लड़कियांप्रतिनिधि, गुमलाझारखंड राज्य के 16वें स्थापना दिवस व वीर बिरसा मुंडा जयंती के शुभ अवसर पर संत पात्रिक क्लब सिसई रोड गुमला के तत्वावधान में रविवार को संत पात्रिक खेल मैदान में आदिवासी नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. मुख्य अतिथि बिशप स्वामी पॉल लकड़ा व विशिष्ट अतिथि पूर्व विधायक भूषण तिर्की ने बिरसा मुंडा की तसवीर के समक्ष दीप जला कर व माल्यार्पण के साथ प्रतियोगिता का शुभारंभ किया. प्रतियोगिता में संत मारिया गोरेती छात्रावास, अपोस्तोलिक स्कूल, शांति नगर, संत इग्नासियुस छात्रावास, दाउद नगर, दीपनगर, प्रभात नगर, प्रतापपुर, करमटोली, संत अंजेला कॉलेज हॉस्टल सहित विभिन्न स्थानों से नृत्य मंडलियों ने भाग लिया. जिसमें ग्रामीण क्षेत्र से प्रथम स्थान प्राप्त करनेवाली मंडली प्रभात नगर करमडीपा, द्वितीय दाउद नगर व तृतीय पुरस्कार करंजटोली को दिया गया. वहीं छात्रावास में प्रथम अपोस्तोलिक छात्रावास, द्वितीय मारिया गोरेती छात्रावास व तृतीय पुरस्कार संत इग्नासियुस ए ब्लॉक छात्रावास को दिया गया. जबकि अन्य सभी मंडलियों को सांत्वना पुरस्कार दिया गया. मौके पर बिशप स्वामी पॉल लकड़ा ने कहा कि आदिवासी संस्कृति व परंपरा ही आदिवासियों की पहचान है. इस पहचान को अक्षुण्ण बनाये रखना है. इस उद्देश्य की पूर्त्ति के लिए संत पात्रिक क्लब द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम काफी सराहनीय है. हमारा नृत्य व गान आनंद से भरा हुआ है. इसे समय-समय पर प्रदर्शित करने की जरूरत है. आदिवासियों का चलना नृत्य व बोलना ही गीत है. पूर्वजों ने संस्कृति व परंपरा के रूप में जो धरोहर छोड़ा है. उसे हम सबों को सहेज कर रखना है. कार्यक्रम का मूल उद्देश्य बच्चों व युवा वर्ग को हमारी संस्कृति और परंपरा से जोड़े रखना है. भूषण तिर्की ने कहा कि आदिवासियों की संस्कृति व परंपरा काफी प्राचीन है. इस अवसर पर फादर ख्रिस्टोफर लकड़ा, सिस्टर मारिया, सिस्टर मटिल्डा, फादर सामुवेल, अजीता लकड़ा, सिस्टर निर्मला, फादर रौशन, कृपा तिर्की, सेत कुमार एक्का, तेलेस्फोर एक्का, प्रेम एक्का, जुलियुस कुल्लू, अंब्रोस केरकेट्टा, प्लासियुस एक्का, नीलम प्रकाश लकड़ा, एरेनियुस मिंज, गाब्रियल खाखा, संदीप एक्का आदि उपस्थित थे.

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