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गुमला : गांव में पाकिस्तान के प्रति गुस्सा और जवान संतोष गोप के शहीद होने पर गम व गर्व

Updated at : 14 Oct 2019 9:02 PM (IST)
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गुमला : गांव में पाकिस्तान के प्रति गुस्सा और जवान संतोष गोप के शहीद होने पर गम व गर्व

दुर्जय पासवान, गुमला देश के लिए कुर्बान होने वाले भारतीय सैनिक शहीद संतोष गोप के पैतृक गांव टेंगरा (बसिया प्रखंड) में सोमवार को दिनभर मातम छाया रहा. गांव के बेटे की शहादत से पूरा गांव गमगीन है. गांव में पाकिस्तान के प्रति गुस्सा और जवान संतोष गोप के शहीद होने पर गम व गर्व है. […]

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दुर्जय पासवान, गुमला

देश के लिए कुर्बान होने वाले भारतीय सैनिक शहीद संतोष गोप के पैतृक गांव टेंगरा (बसिया प्रखंड) में सोमवार को दिनभर मातम छाया रहा. गांव के बेटे की शहादत से पूरा गांव गमगीन है. गांव में पाकिस्तान के प्रति गुस्सा और जवान संतोष गोप के शहीद होने पर गम व गर्व है. इधर, गांव में लोगों के लगते जमघट के बीच गांव की समस्याओं पर चर्चा हुई. लोग शहीद के घर तक आने के लिए सड़क बनवाने की मांग कर रहे थे. वहीं, शहीद के घर के सामने प्रशासन ने लोगों के बैठने के लिए शमियाना लगाया था.

इधर, शाम 4.45 बजे जैसे ही रांची से खबर मिली कि शहीद का पार्थिव शरीर रांची पहुंच गया है. यहां सलामी के बाद गांव के लिए रवाना होंगे. यह सुनने के बाद गांव में लोगों के अलावा स्थानीय प्रशासन की भारी भीड़ जुट गयी. लेकिन फिर बताया गया कि अब 15 अक्तूबर को शहीद का पार्थिव शरीर सेना के लोग गांव लेकर पहुंचेंगे. तो लोग अपने अपने घर लौट गये.

इधर, शहीद के पिता से जब प्रभात खबर ने पूछा कि क्या इच्छा है तो उन्होंने कहा कि उसके शहीद बेटे की प्रतिमा थाना चौक के पास बने. शहीद के रिश्तेदार महावीर यादव ने कहा कि शहीद का पार्थिव शरीर रांची पहुंचने के बाद सेना के जवानों ने उसे अपने कैंप में रखा है. 15 अक्तूबर की सुबह नौ बजे तक सेना के लोग शहीद का पार्थिव शरीर लेकर गांव पहुंचेंगे.

शहीद के घर में शौचालय नहीं, खुले में जाते हैं शौच

शहीद के घर में शौचालय नहीं है. प्रभात खबर ने शहीद के घर पहुंचकर जब पूछा कि शौचालय कहां है, तो परिवार के लोगों ने कहा कि शौचालय नहीं बना है. उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह खुद का शौचालय बनवा सके. वहीं, स्वच्छता मिशन के तहत भी शौचालय नहीं बना है. परिवार के सदस्यों ने कहा कि बगल में रहने वाले लोगों का शौचालय बना है. परंतु उसके घर में शौचालय नहीं बनवाया गया. शहीद के वृद्ध माता पिता को पेंशन भी नहीं मिलता. माता-पिता अनपढ़ भी हैं. लेकिन अपने बेटे को पढ़ाकर सेना में भर्ती होने में मदद की थी.

नाव से पार कर रिश्तेदार शहीद के घर पहुंचे

शहीद का एक परिवार कलिगा गांव में रहता है. कलिगा से टेंगरा की दूरी अधिक है. किसी ने रिश्तेदार को सूचना दी कि शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचने वाला है. यह सुनते ही रिश्तेदार कोयल नदी से नाव से पार होकर टेंगरा गांव पहुंचे. चूंकि नदी में पानी भरा हुआ था. पार करना मुश्किल था. इसलिए परिवार के सदस्यों ने टेंगरा गांव आने के लिए नाव का सहारा लिया.

शहीद के परिवार को मिले मुआवजा : अध्यक्ष

शहीद संतोष गोप का घर जाकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष रोशन बारवा के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने शहीद के पीड़ित परिवार से मुलाकात कर सांत्वना दी. जिलाध्यक्ष रोशन बारवा ने कहा कि गुमला शहीदों का जिला है. हम सभी को गर्व है कि देश की सेवा करते हुए यहां के जवान देश सेवा में अपने प्राण त्याग दिये है.

कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि शहीद के परिवार को उचित मुआवजा दें. साथ ही शहीद के परिजन को नौकरी दे. वह परिवार का एकमात्र कमाऊ व्यक्ति था. उन्होंने बसिाय चौक में शहीद की प्रतिमा स्थापित करने की मांग की. उन्होंने कहा कि सरकार हर मोर्चा में विफल है. जिप सदस्य चैतु उरांव ने कहा कि यह दुखद घटना है. ऐसा आगे ना हो, सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए. मौके पर उपप्रमुख शिवराज साहू, जिप सदस्य चैतू उरांव, जसिंता बारला, अनीता देवी, मुखिया चुमानी उरांव, पतरस होरो, देवा साहू, गाडविन लकड़ा, अनिल एक्का, परिमल मंडल सहित कई कांग्रेसी मौजूद थे.

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