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गुमला : वृद्ध ने खुद के इलाज के लिए जमीन बंधक रखी, पशुओं को बेचा

Updated at : 13 Sep 2019 8:29 PM (IST)
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गुमला : वृद्ध ने खुद के इलाज के लिए जमीन बंधक रखी, पशुओं को बेचा

दुर्जय पासवान, गुमला बसिया प्रखंड के लोटवा गांव में 63 वर्षीय मोनो तत्वा रहते हैं. आज मोनो जीवन व मौत से जूझ रहे हैं. उसके दाहिना पैर में जख्म हुआ था. इसके बाद से वह अस्पताल में इलाजरत हैं. मोनो ने खुद के इलाज के लिए 10 डिसमिल जमीन पांच हजार रुपये में बंधक रख […]

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दुर्जय पासवान, गुमला

बसिया प्रखंड के लोटवा गांव में 63 वर्षीय मोनो तत्वा रहते हैं. आज मोनो जीवन व मौत से जूझ रहे हैं. उसके दाहिना पैर में जख्म हुआ था. इसके बाद से वह अस्पताल में इलाजरत हैं. मोनो ने खुद के इलाज के लिए 10 डिसमिल जमीन पांच हजार रुपये में बंधक रख दी. जब उससे भी इलाज नहीं हो सका तो अपनी तीन बकरियों को नौ हजार रुपये में बेच दिया. इसके बाद भी मोनो का पैर ठीक नहीं हुआ है.

कुछ दिन तक उन्‍हें बसिया रेफरल अस्पताल में भर्ती किया गया था. परंतु अस्पताल से भी दवा नहीं मिली. क्योंकि डॉक्टर ने कुछ महंगी दवा लिख दी. महंगी दवा खरीदने के लिए जमीन बंधक रखा. बकरी बेची. यहां तक कि घर की कई कीमती सामान भी बेच दिये. अब वह अपने घर पर पड़ा हुआ है. बसिया रेफरल अस्पताल सिर्फ वह अपने पैर का मलहम पटटी बदलवाने हर दो दिन में जा रहा है.

मोनो ने अपनी दुखभरी कहानी बताते हुए कहा कि सरकार कहती है कि गरीबों को सुविधा दे रहे हैं. सरकार सबका साथ सबका विकास का नारा लगा रही है. लेकिन मुझे गरीब वृद्ध के इलाज के लिए गोल्डेन कार्ड तक नहीं है. राशन कार्ड के लिए आवेदन किया था. परंतु राशन कार्ड नहीं बना. उम्र 63 वर्ष हो गयी. परंतु इस गरीब को वृद्धावस्था पेंशन भी नहीं मिलता, जबकि वृद्धावस्था पेंशन के लिए आवेदन दिया है. यहां तक कि पीएम आवास, शौचालय व गैस सिलेंडर का भी लाभ नहीं मिला है. मोनो ने कहा कि सरकार के मुलाजिम जो विकास करने के लिए बैठे हैं. वे भी हमारे दुख तकलीफ को नहीं सुनते हैं.

बड़ा बेटा रांची व छोटा बेटा गांव में मजदूरी करता है

मोनो का बड़ा बेटा सुधीर तत्वा रांची में फुचका दुकान चलाता है. उसी से वह अपने परिवार को किराये में रखकर जीविका चला रहा है. छोटा बेटा सुरेश तत्वा जो 15 साल का है. वह गांव में रहता है. गरीबी के कारण वह पढ़ाई नहीं कर सका. अपने पिता के इलाज के लिए वह मजदूरी कर रहा है. बेटी रेखा कुमारी है. उम्र 18 साल हो गयी. अब इसकी शादी की चिंता है. लेकिन मोनो के इलाज में सारा पैसा खत्म हो गया. इससे परिवार की चिंता बढ़ गयी है. रेखा ने कहा कि सभी को सरकारी सुविधा मिल रही है. लेकिन अभी तक मेरे परिवार को कोई सुविधा नहीं मिली है.

सीएम जनसंवाद में शिकायत

मोनो के घर की स्थिति पर दिल्ली के समाजसेवी पंकज कुमार ने मुख्यमंत्री जनसंवाद में शिकायत की है. जिसमें पंकज ने मोनो के घर की स्थिति का हवाला देते हुए सरकारी मदद देने की मांग की है. पंकज ने सीएम जनसंवाद में दर्ज शिकायत में कहा है कि मोनो पैर की गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं. बसिया के सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में पिछले एक महीने से इलाज चल रहा था. अब वह घर पर है. सरकारी अस्पताल में इलाज चल रहा है. फिर भी इनका प्रतिदिन एक से दो हजार रुपये खर्च हो रहा है.

उन्होंने अपने इलाज में बैल, गाय, बकरी और खेत तक बेच दी और अब घर भी बेचने की नौबत आ गयी है. इन्हें वृद्धा पेंशन नहीं मिलता है. इनका राशन कार्ड और आयुष्मान कार्ड भी नहीं बना है. जबकि कई अयोग्य लोगों का राशन कार्ड और आयुष्मान कार्ड बना हुआ है. अगर मोनो तत्वा जैसे वृद्ध-असहाय-गरीब लोगों का भी आयुष्मान कार्ड और राशन कार्ड नहीं बना है तो फिर इन योजनाओं पर सवाल उठना लाजिमी है. मोनो को अच्छे अस्पताल में शिफ्ट करके बेहतर इलाज किया जाये. साथ ही आयुष्मान गोल्डन कार्ड, राशन कार्ड और वृद्धा पेंशन देने की भी मांग की है.

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