गुमला जिले में सबसे ज्यादा अंधविश्वासी, जादू-टोना व डायन के चक्कर में मारे जा रहे वृद्ध

Updated at : 21 Jul 2019 9:00 PM (IST)
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गुमला जिले में सबसे ज्यादा अंधविश्वासी, जादू-टोना व डायन के चक्कर में मारे जा रहे वृद्ध

दुर्जय पासवान, गुमला गुमला जिले में सबसे ज्यादा अंधविश्वास है. यही कारण है कि जिले में जादू-टोना व डायन बिसाही के चक्कर में वृद्ध मारे जा रहे हैं. जिले में अंधविश्वास की कई घटनाएं घटी हैं. कुछ घटनाओं ने पूरे समाज को प्रभावित किया है. कई हैरत करने वाली घटना भी घटी है. गुमला की […]

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दुर्जय पासवान, गुमला

गुमला जिले में सबसे ज्यादा अंधविश्वास है. यही कारण है कि जिले में जादू-टोना व डायन बिसाही के चक्कर में वृद्ध मारे जा रहे हैं. जिले में अंधविश्वास की कई घटनाएं घटी हैं. कुछ घटनाओं ने पूरे समाज को प्रभावित किया है. कई हैरत करने वाली घटना भी घटी है. गुमला की घटना ने सरकार तक को अंधविश्वास के खिलाफ सोचने पर मजबूर कर दिया है.

अंधविश्वास में हो रही हत्या से एसपी के अलावा पूरा सिस्टम परेशान रहा है. लेकिन अंधविश्वास की जो मोटी परत गुमला में जमी है. वह कम होता दिखायी नहीं दे रहा है. कुछ घटनाओं पर गौर करें तो आंजन गांव में वृद्ध महिला को नंगा कर पिटाई के बाद मैला खिलाया गया था. पालकोट के बिलिंगबीरा में दंपती व मासूम की हत्या कर दी गयी थी.

गुमला शहर से सटे सोसो गांव में मासूम बच्चों के सामने दंपती की हत्या कर दी गयी थी. महुगांव में वृद्ध को सिर मुड़कर गांव से निकाल दिया गया था. ऐसी कई घटनाएं गुमला में अंधविश्वास के कारण घट चुकी हैं. सबसे दुखद बात यह रही कि समाज के सामने अंधविश्वास का नंगा नाच होता रहा. लेकिन पढ़े लिखे लोग मूक-दर्शक बने रहे.

गांवों में सबसे ज्यादा अंधविश्वास

जिस तेजी से गुमला जिला में बदलाव आया है. आबादी बढ़ी है. पढ़े लिखे लोगों की संख्या बढ़ी है. उसी तेजी से अंधविश्वास भी गुमला में बढ़ता दिख रहा है. यही वजह है कि गुमला में हर महीने दो महीने में डायन बिसाही में एक दो लोगों की हत्या होती है. फिलहाल में जो घटनाएं घटी हैं. इससे गुमला जिला अंधविश्वास में जकड़ा हुआ नजर आ रहा है. सबसे ज्यादा अंधविश्वास गांवों में है. वृद्ध महिला पुरुषों का जीना दूभर हो गया है.

क्योंकि गुमला में सबसे ज्यादा बेकसूर लोग ही अंधविश्वास की बलि चढ़ रहे हैं. अंधविश्वास को खत्म करने के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं को आगे आना होगा. गांव में काम में कर रही महिला समूहों को भी इसमें अहम भूमिका निभानी होगी. जनप्रतिनिधि भी इसमें रूचि दिखाते हुए लोगों को जागरूक करेंगे तभी गांवों से अंधविश्वास खत्म होगा.

सरकार गांव में चला रही अभियान

गुमला में अंधविश्वास के फैलते जड़ को खत्म करने के लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा अंधविश्वास के खिलाफ गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाया गया. पुलिस विभाग भी अभी लगातार मॉब लिचिंग व अंधविश्वास के खिलाफ अभियान चलाते हुए लोगों को जागरूक कर रही है. जरूरत के अनुसार प्रशासनिक अधिकारी भी गांव जाकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास करते रहते हैं. लेकिन इसका असर नहीं पड़ रहा. गुमला एसपी अंजनी कुमार झा ने कहा कि गांव के लोग जिस दिन समझ जायेंगे कि अंधविश्वास मन का भ्रम है. उस दिन से अंधविश्वास खत्म हो जायेगा.

केस एक : पालकोट थाना क्षेत्र के बिलिंगबीरा में डायन बिसाही में पति, पत्नी व मासूम बेटे की हत्या कर दी गयी थी. इतना ही नहीं शव को जमीन में गाड़ दिया गया था. पुलिस ने दो महीने बाद शव को बरामद की थी.

केस दो : गुमला के कतरी पंचायत में वृद्ध महिला की हत्या कर उसके शव को गाड़ दिया गया था. अभी तक शव नहीं मिला है. बेटे ने अज्ञात लोगों पर केस किया है. अभी तक उक्त महिला का शव नहीं मिला है.

केस तीन : गुमला शहर से सटे सोसो महलीटोली में डायन बिसाही में वृद्ध दंपती की उसके ही तीन बच्चों के सामने हत्या कर दी गयी थी. इस हत्याकांड का उद्भेदन हो चुका है. परंतु अभी भी इस गांव में अंधविश्वास है.

केस चार : घाघरा के बेलागड़ा गांव में लोग इस प्रकार अंधविश्वासी हो गये हैं, कि यहां वृद्ध को गांव से निकाल दिया गया था. महुगांव में भी वृद्ध महिला को निकाला गया था. यहां डायन बिसाही के सबसे ज्यादा मामला है.

केस पांच : गुमला के आंजन गांव में एक वृद्ध महिला को पहले पीटा गया था. उसके बाद उसे नंगा करके रातभर खेत में रखा गया था. इसके बाद जबरन उसे मैला खिलाया गया था. पुलिस ने तुरंत कार्रवाई कर महिला को बचाया था.

पांच वर्षो में अंधविश्वास में हुई हत्या

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