आरोप : बिना घूस मुखिया काम नहीं करते एक घर में चाहिए 20 हजार घूस

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Jun 2019 1:15 AM

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बोंडाटोली गांव के खड़िया समुदाय ने घूस नहीं दिया, तो किसी का घर स्वीकृत नहीं हुआ. गुमला : मुखिया बिना घूस लिये काम नहीं करते. गरीबों के मिले आशियाना में भी 20 हजार रुपये घूस चाहिए. जिसने घूस दिया, उसे पक्का घर की स्वीकृति मिली और जिसने पैसा नहीं दिया, आज वे टूटे फूटे घरों […]

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बोंडाटोली गांव के खड़िया समुदाय ने घूस नहीं दिया, तो किसी का घर स्वीकृत नहीं हुआ.

गुमला : मुखिया बिना घूस लिये काम नहीं करते. गरीबों के मिले आशियाना में भी 20 हजार रुपये घूस चाहिए. जिसने घूस दिया, उसे पक्का घर की स्वीकृति मिली और जिसने पैसा नहीं दिया, आज वे टूटे फूटे घरों में रहने को विवश हैं. कमोबेश गुमला जिले के अधिकतर पंचायतों का यही हाल है. लेकिन अभी ताजा मामला गुमला प्रखंड के कुलाबिरा पंचायत की है. कुलाबिरा पंचायत के बोंडाटोली व झोराटोली गांव में प्रभात खबर ने ग्राउंड जीरो से पड़ताल की. कई लोगों से पूछताछ की गयी.
गरीबों के घर जाकर उनके आवास की स्थिति को देखा. इस पंचायत की जो स्थिति है, बिना घूस के कोई काम नहीं होता है. मुखिया असमती देवी हैं, लेकिन इनके हाथ में कोई कमान नहीं है. सब काम मुखिया के पति अशोक महली देखते हैं. झोराटोली गांव निवासी विधवा पुनी देवी का मामला है. पुनी देवी का बाबा साहब आंबेडकर आवास योजना के तहत घर स्वीकृत हुआ है.
पहले फेज में जनवरी 2019 में ही प्रशासन ने पुनी के खाते में 25 हजार रुपये ट्रांसफर किया था. लेकिन मुखिया के पति ने यह कह कर 20 हजार रुपये ले लिया कि मुखिया के कहने पर घर स्वीकृत हुआ है, इसलिए 20 हजार रुपये मुखिया का नजराना बनता है. 25 हजार में 20 हजार रुपया मुखिया के पति द्वारा ले लेने से पुनी का घर नहीं बना. अभी मिट्टी के घर में रह रही है. बरसात में घर गिरने का डर बना रहता है. पुनी अभी भी पक्का घर बनने की आस में है. इधर, बोंडाटोली गांव की कहानी कुछ इसी प्रकार की है. बोंडाटोली गांव के 25 परिवार में से एक परिवार का पक्का मकान बना है. 24 घर मिट्टी का है.
कई घर ध्वस्त होने की कगार पर है. इस गांव के लोगों से बात की गयी. बयान लेकर वीडियो बनाया गया. खड़िया समुदाय के लोगों ने कहा कि मुखिया घूस मांगती है. हम गरीब कहां से 15 से 20 हजार रुपये घूस के लिए लायें. घूस नहीं देने पर घर की स्वीकृति नहीं हुई है, फिर भी एक उम्मीद है कि कोई ईमानदार प्रशासन का अधिकारी उनका पक्का घर बनवा दे. पंचायत व प्रखंड स्तर के नेता व पदाधिकारियों से जनता का विश्वास उठता जा रहा है.
यहां तो चलना भी दूभर है
बोंडाटोली गांव में 25 परिवार खड़िया व अहीर समाज का है. इस गांव के लोगों को अभी भी विकास के रहनुमा व ईमानदार अधिकारी का इंतजार है. इस गांव तक जाने के लिए अच्छी सड़क नहीं है. सड़क पर नुकीले पत्थर निकले हुए हैं. गांव की सड़कें कच्ची है, जहां बरसात में चलना दूभर है. इस गांव में पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं है. लोग गांव से कुछ दूरी पर स्थित डाड़ी का पानी पीते हैं. कई बार इस गांव में बीमारी फैल चुकी है. इसके बाद भी न तो प्रशासन और न ही इस क्षेत्र के प्रतिनिधियों पर असर पड़ा कि इस गांव की समस्या को दूर करे. यह गांव गुमला से करीब 20 किमी दूर है.
मुखिया की सुनिये
मुखिया असमति देवी व उसके पति अशोक महली पर लगे आरोप के बाद दोनों मामला को दबाने के लिए इधर-उधर घूमते नजर आये. फिर चार बजे प्रभात खबर कार्यालय पहुंचे, जहां मुखिया ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मैंने किसी से घूस नहीं लिया है और न ही मांगा है. पुनी देवी का जो मामला है, उससे 20 हजार रुपये लिया गया है. भवन निर्माण सामग्री गिराने के नाम पर पैसा लिया गया है. आवास स्वीकृत कराने के नाम पर किसी से पैसा नहीं लिया हूं.
मुखिया पर होगी कार्रवाई
मुखिया असमति देवी पर लगे आरोप के बाद बीडीओ संध्या मुंडू के निर्देश पर दो सदस्यीय टीम ने गांव जाकर जांच की. जांच में घूस लेने का मामला सही पाया गया. टीम द्वारा बीडीओ को जांच रिपोर्ट सौंपने के बाद बीडीओ ने डीडीसी को उक्त रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है. साथ ही बीडीओ ने मुखिया के खिलाफ कार्रवाई के लिए अनुशंसा भी की है. बीडीओ ने अपने पत्र में कहा है कि मुखिया के खिलाफ अग्रेतर कार्रवाई की जा सकती है.
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