गुमला/रांची : देश के लिए जान देनेवाले शहीदों के परिजनों ने जतायी इच्छा, कहा - उनके गांव में भी शहीद की प्रतिमा स्थापित हो

Updated at : 04 Jan 2019 11:47 PM (IST)
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गुमला/रांची : देश के लिए जान देनेवाले शहीदों के परिजनों ने जतायी इच्छा, कहा - उनके गांव में भी शहीद की प्रतिमा स्थापित हो

गुमला/रांची : गुमला के चैनपुर प्रखंड स्थित बारवे हाइस्कूल मैदान में शुक्रवार को भारतीय सेना द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में शहीदों के परिजनों ने उनके गांव में भी शहीद की प्रतिमा स्थापित करने की इच्छा जतायी है. समारोह में आये शहीद नायमन कुजूर की पत्नी ने गुमला प्रशासन से चैनपुर प्रखंड के उरू बारडीह गांव […]

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गुमला/रांची : गुमला के चैनपुर प्रखंड स्थित बारवे हाइस्कूल मैदान में शुक्रवार को भारतीय सेना द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में शहीदों के परिजनों ने उनके गांव में भी शहीद की प्रतिमा स्थापित करने की इच्छा जतायी है. समारोह में आये शहीद नायमन कुजूर की पत्नी ने गुमला प्रशासन से चैनपुर प्रखंड के उरू बारडीह गांव में शौचालय, पीने का पानी, बिजली की व्यवस्था करने की मांग की है.
दीपाटोली बूटी मोड़ के नायाब सूबेदार ललन राय ने कहा कि वे हादसे में घायल हुए थे. सन 2000 में रिटायर हुए हैं. आज मुझे यहां आमंत्रित किया गया है.
हमारे लिए खुशी का पल है. लोहरदगा जिला के डुमरी गांव निवासी पूर्व आर्मी हवलदार कमल कुजूर ने कहा कि वे 2003 में रिटायर हुए हैं. यहां मुझे सेनाध्यक्ष के हाथों पुरस्कृत किया गया. यह खुशी का पल है. गोली से घायल हुए रांची जिला के जरगा गांव निवासी फगुवा उरांव 2018 में रिटायर हुए हैं. पाकिस्तान से युद्ध के दौरान वे घायल हुए थे.
उनकी जांघ में गोली लगी थी. उन्होंने कहा कि एक वह पल था जब पाकिस्तान को हराया और आज सेनाध्यक्ष से मिलने की खुशी है. शहीद नयमन कुजूर की पत्नी वीणा तिग्गा ने कहा कि सरकार व प्रशासन का ध्यान उनके गांव पर नहीं है. गांव में शहीद नयमन कुजूर की स्टैच्यू स्थापित करने की मांग की है.
शहीद बिंजुस खलखो की पत्नी मेरी खलखो ने कहा कि आज खुशी है कि उनके पति के कारण उन्हें सेनाध्यक्ष सम्मानित कर रहे हैं. शहीद रामप्रती ठाकुर की पत्नी सनकलिया देवी ने कहा कि उनका घर गढ़वा जिले के मझिआंव है. मेरे पति भी अलबर्ट एक्का की तरह 1971 के युद्ध में भाग लिये थे. जहां वे शहीद हो गये. उनका शव भी अंतिम बार नहीं देख सकी. लेकिन आज तक मेरे पति का स्टैच्यू गांव में नहीं लगा है.
पलामू के एक्स कैप्टन आरआर पांडेय भी 1971 के युद्ध में शामिल रहे हैं. आज भी वे स्वस्थ हैं. उनका बेटा संतोष कुमार पांडेय ने कहा कि मुझे खुशी है कि पिता के बाद मैं भी सेना में भरती होकर देश की सेवा कर रहा हूं. सिमडेगा जिला के पीड़ाटांगर के शहीद जॉन विटो किड़ो की पत्नी बेरनाथेत किड़ो ने कहा कि मेरे पति को शहादत के बाद वीर चक्र प्राप्त हुआ. लेकिन आज तक गांव में उनकी एक प्रतिमा नहीं लगी है.
शहीद नायक विश्वा केरकेट्टा जम्मू कश्मीर में ओपी रक्षक के दौरान शहीद हुए थे. उन्हें मरणोपरांत कृति चक्र मिला. उनकी पत्नी उर्मिला केरकेट्टा ने कहा कि मेरे जीते जी मेरे पति का गांव में स्मारक बन जाये. हवलदार तियोफिल तिड़ू को मरणोपरांत शौर्य चक्र मिला था. उनकी पत्नी जो नामकुम में रहती है. उन्होंने अपने पति का स्टैच्यू स्थापित करने की मांग की है.
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