गोड्डा में सर्पदंश से तीन मासूमों की मौत, अंधविश्वास बना जानलेवा

Updated at : 06 Jul 2025 12:13 AM (IST)
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गोड्डा में सर्पदंश से तीन मासूमों की मौत, अंधविश्वास बना जानलेवा

सैदापुर में सर्पदंश से सगे भाई-बहन की एक घंटे के अंतराल पर गयी जान

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गोड्डा जिले में शुक्रवार की रात सर्पदंश की तीन अलग-अलग घटनाओं में तीन मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गयी, जबकि तीन अन्य का इलाज चल रहा है. इनमें दो सगे भाई-बहन की एक घंटे के अंतराल पर मौत ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया. घटनाओं में झाड़-फूंक पर विश्वास करने की प्रवृत्ति के कारण बच्चों को समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं मिल सकी, जिससे जान नहीं बच पायी. मिली जानकारी के अनुसार सदर प्रखंड अंतर्गत सैदापुर गांव में शुक्रवार की रात जहरीले सांप के काटने से सगे भाई-बहन की मौत हो गयी. मृत बच्चों की पहचान 11 वर्षीय आदित्य कुमार एवं 13 वर्षीय स्तुति कुमारी, पिता हीरालाल राउत के रूप में हुई है. घटना रात लगभग 10-11 बजे के बीच की है, जब दोनों बच्चे अपने घर में सोये हुए थे. इसी दौरान किसी विषैले सांप ने पहले आदित्य को डंसा. परिजन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने ले गये. इसी बीच जब वे घर लौटे, तो देखा कि बड़ी बेटी स्तुति के मुंह से झाग निकल रहा है. तुरंत उसे लेकर सदर अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी. करीब एक घंटे तक चले इलाज के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. डॉक्टरों के अनुसार यदि समय रहते अस्पताल लाया जाता तो बच्ची की जान बच सकती थी. एक साथ बेटे और बेटी की मौत ने माता-पिता को पूरी तरह तोड़ दिया है. अस्पताल परिसर में उनका रो-रोकर बुरा हाल था. गांव में भी मातम छा गया है. आसपास के ग्रामीण और सगे-संबंधी परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे. वहीं दूसरी दर्दनाक घटना पोड़ैयाहाट प्रखंड के निपनिया पंचायत स्थित सुंदरमोड़ गांव के राय टोला में हुई. यहां 12 वर्षीय रौशन कुमार राय, पिता जवाहर राय को सर्प ने डंस लिया. इस मामले में भी परिवार वालों ने पहले झाड़-फूंक का सहारा लिया. इलाज में देरी के कारण रौशन की भी मौत हो गयी. मृतक के पिता मजदूरी के सिलसिले में बाहर रहते हैं. बेटे की मौत की सूचना मिलते ही वे गांव के लिए रवाना हो गये हैं.

गोड्डा सांसद हुए भावुक, सर्पदंश से मृत बच्चों के परिजनों को दी 50 हजार की सहायता राशि

सैदापुर गांव में सर्पदंश से सगे भाई-बहन की दर्दनाक मौत की खबर मिलते ही गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने संवेदनशीलता का परिचय दिया. उन्होंने मृतक बच्चों के शोकाकुल माता-पिता को तत्काल 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की. सांसद की ओर से यह सहायता राशि भाजपा नेता राजेश झा एवं समाजसेवी संतोष कुमार सिंह के माध्यम से मृतक बच्चों के पिता हीरालाल राउत को सैदापुर गांव पहुंचकर सौंपी गयी. सहायता राशि प्रदान करते समय नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और उन्हें ढांढस बंधाया. डॉ. निशिकांत दुबे की इस त्वरित मानवीय पहल की क्षेत्र में सराहना की जा रही है. ग्रामीणों ने कहा कि सांसद ने पीड़ित परिवार के दुःख को अपना समझकर जो सहयोग किया, वह प्रशंसनीय है.

बंका के बाबू और अमलो की रेखा को भी सांप ने डंसा, चल रहा इलाज

शनिवार को जिले में सर्पदंश की घटनाएं लगातार हुईं. बंका गांव के राय टोला निवासी बाबू राय और अमलो गांव की रेखा देवी, पति गोपाल यादव भी विषैले सांप के डंस का शिकार हो गये. दोनों को त्वरित उपचार के लिए गोड्डा सदर अस्पताल लाया गया, जहां इलाज जारी है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, बाबू राय सुबह स्नान के बाद घर के पूजा घर की सफाई कर रहे थे, तभी अचानक एक विषैले सांप ने डंस लिया. परिजनों ने बिना समय गंवाये उन्हें सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने एंटी स्नेक वेनम का इंजेक्शन देकर प्राथमिक उपचार शुरू किया. इधर, अमलो गांव की रेखा देवी खेत में मूंग की फसल देखने गयी थीं. उसी दौरान करैत सांप ने डंस लिया. परिजनों द्वारा उन्हें भी तत्काल गोड्डा सदर अस्पताल लाया गया. दोनों मरीजों का इलाज चल रहा है और खबर लिखे जाने तक उनकी स्थिति स्थिर बतायी जा रही है. चिकित्सकों की मानें तो बरसात के मौसम में सांपों की सक्रियता बढ़ जाती है. इसलिए खेतों, बगीचों या घर की सफाई के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है.

झाड़-फूंक के चक्कर में जा रही जानें, समय पर इलाज से बच सकती है जिंदगी

जिले में सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं के बीच अब यह स्पष्ट होता जा रहा है कि अधिकांश मौतों का कारण विषैले सांप का काटना नहीं, बल्कि समय पर चिकित्सकीय उपचार न मिल पाना है. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग अंधविश्वास और झाड़-फूंक जैसी परंपराओं में उलझे हुए हैं, जिसका खामियाजा उन्हें अपने प्रियजनों की जान गंवाकर चुकाना पड़ रहा है. शनिवार को सर्पदंश से जिन लोगों की मौत हुई, उनमें सभी मामलों में या तो झाड़-फूंक में समय गंवाया गया या फिर इलाज में देरी हुई. इसके उलट, जिन मरीजों को समय रहते अस्पताल लाया गया, उन्हें बचा लिया गया है. इससे यह स्पष्ट है कि सही समय पर चिकित्सा मिलने से सर्पदंश के मामलों में जान बचायी जा सकती है. इस संबंध में गोड्डा सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. आकाश ने बताया कि अगर सर्पदंश के बाद एक घंटे के भीतर एंटी स्नेक वेनम की दवा दे दी जाये, तो मरीज की जान बचने की संभावना अत्यंत अधिक होती है. उन्होंने बताया कि जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहित सदर अस्पताल में सर्पदंश की दवा एंटी स्नेक वेनम पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है. डॉ. आकाश ने ग्रामीणों से अपील किया है कि वे झाड़-फूंक या किसी भी अंधविश्वास के चक्कर में न पड़ें. सर्पदंश की स्थिति में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें और उचित इलाज लें. उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं अधिक होती हैं, ऐसे में सावधानी और जागरूकता ही बचाव का सबसे बेहतर उपाय है.

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