जननी आश्रय केंद्र 10 माह से बंद, महिलाओं को नहीं मिल पा रही सुविधा

Updated at : 20 Jul 2025 11:22 PM (IST)
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जननी आश्रय केंद्र 10 माह से बंद, महिलाओं को नहीं मिल पा रही सुविधा

24 करोड़ की लागत से बना केंद्र अब तक उद्घाटन का कर रहा इंतजार

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सरकार की योजनाओं का उद्देश्य आम जनता को सुविधा देना होता है, लेकिन जब योजनाएं जमीन पर उतरने के बावजूद लोगों को लाभ न दे पायें, तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है. कुछ ऐसा ही हाल जिले के जननी आश्रय केंद्र का है, जो लगभग दस माह पूर्व बनकर तैयार हो गया, लेकिन अब तक चालू नहीं हो सका. महागामा प्रखंड में 24 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 50 बेड वाले अस्पताल परिसर में बने इस जननी आश्रय केंद्र का निर्माण डीएमएफटी की राशि से किया गया था. भवन का कार्य पिछले वर्ष अक्टूबर-नवंबर में ही पूर्ण कर लिया गया, लेकिन अब तक इसका औपचारिक उद्घाटन नहीं हो पाया, जिससे इसका लाभ महिलाओं तक नहीं पहुंच पा रहा है. स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जिस सोच के साथ जननी केंद्र का निर्माण कराया गया था, वह केवल कागजों तक सीमित होकर रह गया है. लोगों में चर्चा है कि यह परियोजना ठेकेदारी लाभ के लिए ही बनी, जबकि इसकी वास्तविक उपयोगिता अब तक शून्य बनी हुई है.

क्या है जननी आश्रय केंद्र का उद्देश्य

पिछले उपायुक्त जिशान कमर के कार्यकाल के दौरान आयोजित एक बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि डीएमएफटी की राशि से एक ऐसा केंद्र बनाया जाये, जहां दूरदराज क्षेत्रों से आने वाली गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक ठहराव मिले. इसका मुख्य उद्देश्य था कि प्रसव की स्थिति में अस्पताल आने वाली महिलाओं को यदि तत्काल भर्ती नहीं किया जा सके या कुछ दिन का विलंब हो, तो उन्हें आश्रय और स्वास्थ्य सुविधा दी जा सके. इसके अतिरिक्त एसएनसीयू में भर्ती नवजात शिशुओं की माताओं को भी ठहरने की सुविधा मिले, ताकि वे जरूरत पड़ने पर बच्चे को स्तनपान करा सकें और अस्पताल के नजदीक रहकर देखभाल कर सकें. अभी तक इस केंद्र का उद्घाटन न होना स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता को दर्शाता है. जिन महिलाओं को इस केंद्र से लाभ मिलना चाहिए था, वे आज भी अस्पताल परिसर के बाहर फर्श पर या किराये के घरों में रात गुजारने को मजबूर हैं. महागामा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि जल्द से जल्द जननी आश्रय केंद्र का उद्घाटन कर इसे चालू किया जाये, ताकि यह करोड़ों की लागत से बनी योजना केवल ईंट और सीमेंट की इमारत बनकर न रह जाये, बल्कि असल में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए वरदान साबित हो.

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