बारिश के भरोसे हो रही खेती, डीप बोरिंग कराने की जरूरत

Updated at : 29 Jun 2025 11:14 PM (IST)
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बारिश के भरोसे हो रही खेती, डीप बोरिंग कराने की जरूरत

चंदा पंचायत के महुआ गांव में प्रभात खबर संवाद में किसानों ने सुनायी सिंचाई की परेशानी

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ठाकुरगंगटी. प्रभात खबर की ओर से प्रखंड की चांदा पंचायत के अंतर्गत महुआरा गांव में प्रभात खबर संवाद का आयोजन किया गया.अध्यक्षता मनमीत पोद्दार ने की. इस दौरान क्षेत्र के समाजसेवी, बुद्धिजीवियों व किसानों ने सिंचाई की समस्या को पुरजोर तरीके से उठाया. कहा कि बारिश के भरोसे खेती होती है. जिला प्रशासन डीप बोरिंग कर सिंचाई संकट का समाधान कराये. ताकि किसान सालों भर खेती कर सकें. लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए खेती पर आधारित बातों को रखते हुए कहा कि फिलहाल मौसम साथ दे रहा है. अगर क्षेत्र में बारिश नहीं हुई तो खेती चौपट हो जाती है. किसान लागत मूल्य भी नहीं निकाल पाते हैं. मगर दुर्भाग्य की बात है कि किसानों की सबसे बडी समस्या सिंचाई की है. इसे देखने वाला कोई नहीं हे. किसान लगातार इस तरह की मांग कर रहे हैं. मगर उनकी मांगों को कोई सुनने वाला नहीं है. ग्रामीणों की माने तो क्षेत्र के लोग कई ऐसे सिंचाई व्यवस्था पर आधारित थे, उनके खेतों की हरियाली बरकरार रहती थी. मगर आज वो ध्वस्त है. क्षेत्र के लोगों ने लगातार अपनी मांगों को रखा. कार्यक्रम का संचालन पवन कुमार सिंह ने किया. क्या कहते हैं किसान व बुद्धिजीवी ठाकुरगंगटी प्राकृतिक रूप से बेहतर है. यहां नदियां में सिंचाई की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए. डीप बोरिंग करा कर समस्या का समाधान प्रशासन कराये. किसानों को परेशानी होती है. सालोंभर खेती नहीं कर पाते हैं. मनमीत पोद्दार किसानों की कमर उस वक्त टूट जाती है जब उनके फसल सिंचाई के अभाव में मरने लगती है. व्यवस्था को पूरी तरह से चुनौती में पड़ जाती है. इस वजह से जरूरी है कि किसानों के खेत तक पानी की व्यवस्था की जाये. पंकज यादव किसानों को सिंचाई व बेहतर बीज व समय पर खाद की जरूरत होती है. मगर क्षेत्र में पुरानी व्यवस्था को ठीक कराने की अब तक किसी ने जरूरत नहीं समझा है. इस वजह से किसान आज भी बदहाली में जी रहे हैं. जयकांत मंडल किसानों की चिंता उस वक्त ज्यादा हो जाती है, जब खेतों में लगी फसल खास कर धान सूखने लगती है. पानी के अभाव में करोडों रुपये की फसल देखते ही बर्बाद होती है. जरूरत है क्षेत्र के नहर, बीयर की मरम्मत कराने की. राहुल कुमार झा पिछले समय क्षेत्र के नदियों में जो चेकडैम या फिर बीयर का निर्माण किया गया था. पिछले कुछ साल पहले तक पानी में ढह गया. इससे पानी का संचय नहीं हो पा रहा है. सिंचाई की व्यवस्था को सुदृढ़ करने की जरूरत है. संजय कुमार गांव के लोगों को पुरानी व्यवस्था आज भी याद है. पहले कम पैसे में भी कई बेहतर सिंचाई सुविधा को लेकर नाला व बीयर का निर्माण होता था. आज वो सभी निर्माण के कुछ दिन बाद ही बेकार साबित हो रहा है. सीताराम मंडल, लाखों की राशि खर्च की जा रही है. दर्जनों चेकडैम का निर्माण किया जा रहा है. मगर दो साल में ही डैम बेकार साबित हो रहा है. पानी ठहरता नहीं है. तथा किसानों को सुविधा नहीं मिल पा रही है. डीप बोरिंग कराया जाये. विशाल कुमार क्षेत्र में अब सिंचाई व्यवस्था कायम करने के लिए किये जा रहे कार्य में जमकर ठेकेदारी होती है. किसान ऐसे में सिंचाई नहीं मिलने पर ठगा-सा महसूस करते हैं. किसी से प्रश्न तक नहीं किया जाता है. सुधार की जरूरत है. बैद्यनाथ मंडल

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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