गोड्डा के मजदूर की सिलवासा में मौत
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :09 Feb 2015 8:37 AM (IST)
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गोड्डा : बलबड्डा थाना क्षेत्र के लौहचिंता गांव के मजदूर रंजीत राय (20 वर्ष) की मौत दादर व नागर हवेली के सिलवासा शहर में पांच फरवरी को हो गयी थी.मृतक लौहचिंता गांव के सुरेश राय का पुत्र है. दो वर्षो से वह सिलवासा में धागा बनाने वाली कंपनी में कार्यरत था. रंजीत की मौत काम […]
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गोड्डा : बलबड्डा थाना क्षेत्र के लौहचिंता गांव के मजदूर रंजीत राय (20 वर्ष) की मौत दादर व नागर हवेली के सिलवासा शहर में पांच फरवरी को हो गयी थी.मृतक लौहचिंता गांव के सुरेश राय का पुत्र है. दो वर्षो से वह सिलवासा में धागा बनाने वाली कंपनी में कार्यरत था.
रंजीत की मौत काम करने के दौरान भवन से गिरने के दौरान हुई थी. मृतक मजदूर के पिता सुरेश राय ने बताया कि छह फरवरी को उन्हें इसकी जानकारी मिली. रंजीत का शव एंबुलेंस से गोड्डा लाया गया. कंपनी में साथ में काम करने वाले मजदूरों ने शव को गोड्डा तक पहुंचाया.
कंपनी ने 15 हजार का मुआवजा देकर झाड़ा पल्ला : मृत मजदूर के परिजनों को कंपनी की ओर से महज 15 हजार रुपये देकर पल्ला झाड़ लिया गया. वहीं परिजनों का कहना था कि कंपनी द्वारा गत एक वर्ष से मजदूर का बकाया वेतन था, जिसका भुगतान नहीं किया गया. मजदूर के परिजनों व पंचायत प्रतिनिधियों ने मुआवजे की मांग को लेकर डीसी आवास भी गये.
उपायुक्त ने मुआवजा देने से इनकार कर दिया. उन्होंने ठेकेदार पर मुकदमा करने की सलाह दी. उपायुक्त ने कहा कि यह मामला दूसरे राज्य से संबंधित है. मुआवजा देने का कोई प्रावधान नहीं है. उपायुक्त से मिलने के बाद शोक संतप्त परिजन बैरंग वापस लौट गये.
दूसरे बेटे की हुई अकाल मौत : इसके पहले सुरेश राय के एक और पुत्र की मौत तालाब में डूबने से हो गयी थी. इसके बाद ही रंजीत परदेस कमाने गया था. दूसरे बेटे की मौत के बाद रंजीत का परिवार परेशान व संतप्त है.
पलायन को लेकर जिला प्रशासन नहीं है गंभीर : परदेस में मजदूरों की मरने की यह कोई पहली घटना नहीं है. काम के अभाव में जिले के अलग-अलग प्रखंडों के मजदूर ठेकेदार के बहकावे में दूसरे प्रदेश जाते हैं. लौटे तो ठीक, नहीं तो परिजनों को शव ही नसीब हो पाता है. जिले के सुंदरपहाड़ी, बोआरीजोर, गोड्डा, महगामा आदि प्रखंडों से गये मजदूर की मौत दूसरे राज्य जम्मू कश्मीर, गोवा, गुजरात, दिल्ली आदि राज्यों में पहले भी हुई है. गरीबी के कारण मजदूरों का शव लाने में भी परिजनों को मुश्किल होती है.
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