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समाजवादी विचारधारा से जिंदगी भर जुड़े जुमई खां : डॉ शैलेंद्र

Updated at : 11 Aug 2024 11:17 PM (IST)
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समाजवादी विचारधारा से जिंदगी भर जुड़े जुमई खां : डॉ शैलेंद्र

जन संस्कृति मंच गिरिडीह व परिवर्तन पत्रिका के संयुक्त ने गिरिडीह कॉलेज के न्यू बिल्डिंग में अवधी भाषा के प्रगतिशील कवि जुमई खां आजाद स्मृति संवाद के तहत उनकी कविताओं का पाठ किया गया.

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आयोजन. अवधी भाषा के प्रगतिशील कवि जुमई खां आजाद’ स्मृति संवाद का

गिरिडीह.

जन संस्कृति मंच गिरिडीह व परिवर्तन पत्रिका के संयुक्त ने गिरिडीह कॉलेज के न्यू बिल्डिंग में अवधी भाषा के प्रगतिशील कवि जुमई खां आजाद स्मृति संवाद के तहत उनकी कविताओं का पाठ किया गया. इस दौरान उनकी कविताओं पर मुख्य वक्ता अवधी और हिंदी के युवा कवि व आलोचक डॉ शैलेंद्र कुमार शुक्ल ने व्याख्यान दिया. कहा कि जुमई खां का जन्म 05 अगस्त 1930 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिला के गोबरी गांव में हुआ था. वह समाजवादी विचारधारा से ताजिंदगी जुड़े रहे और डॉ राममनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण के करीबी थे. समाजवादी आंदोलनों में उनको जेल भी जाना पड़ा था. कहा कि हिंदी और अवधी कविताओं की कुल 21 किताबें प्रकाशित हैं. उनका आखिरी अवधी कविता संग्रह का ‘कथरी’ है. शैलेंद्र ने कहा कि अवधी के कवि ‘पढ़ीस’ के बाद जुमई खां की कविताओं में सबसे अधिक वर्ग चेतना की सहज अभिव्यक्ति हुई है.

डॉ. बलभद्र ने कहा कि जुमई खां मध्यकाल के कवि तुलसीदास की भाषा को आधुनिक और प्रगतिशील धार देने वाले कवि थे. उन्होंने कहा कि भोजपुरी, मगही, खोरठा, संताली आदि अनेक भाषाओं के कवियों को भी पढ़ने समझने की जरूरत है. रामदेव विश्वबंधु ने कहा कि स्थानीय भाषाओं की कविताओं में जीवन, समाज, संस्कृति की विश्वसनीय अभिव्यक्तियां देखने को मिलती हैं. उन्होंने शैलेंद्र शुक्ल को जुमई की कविताओं से परिचित कराने के लिए धन्यवाद दिया.

आलम अंसारी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से हम भाषाई और सांस्कृतिक विविधताओं से परिचित होते हैं. बतौर मुख्य अतिथि कॉलेज के प्राचार्य डॉ.अनुज कुमार ने कहा कि जुमई खां ‘आजाद’ निर्भीक कवि थे. अवध क्षेत्र और अवधी भाषा को जैसे तुलसीदास की कविताओं से समझा गया, वह सामर्थ्य जुमई खां की कविताओं में भी है. कार्यक्रम की शुरुआत जुमई खां की कविताओं से हुई. ठवीं कक्षा का विद्यार्थी अनुपम ने प्रसिद्ध कविता ‘कथरी’ का पाठ किया. वहीं, डॉ महेश सिंह ने ‘बड़ी-बड़ी कोठियां सजाये पूंजीपतियां’ गाकर सुनाया. कार्यक्रम में डॉ सनोज कुमार केसरी, हीरालाल मंडल, राजेश सिन्हा, धर्मेंद्र कुमार वर्मा, शंभु तुरी, रवि कुमार यादव, नयन कुमार सोरेन, मुकेश कुमार यादव, अजय डोम, राधिका कुमारी, स्वीटी कुमारी, धर्मेंद्र यादव, विनय हांसदा आदि उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन जसम की राज्य कमेटी के सदस्य शंकर पांडेय मौजूद थे. धन्यवाद ज्ञापन डॉ महेश सिंह ने किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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