Giridih News: पानी की किल्लत से शीतलटोला आरोग्य मंदिर में चार वर्षों से नहीं हो पा रहा प्रसव

Giridih News: केंद्र व राज्य सरकार लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर काफी गंभीर है. खासकर महिलाओं के प्रति सरकारें संवेदनशील होकर कार्य कर रही है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं काे समय पर समुचित व्यवस्था उपलब्ध हो सके.
बिरनी प्रखंड की खैरीडीह पंचायत अंतर्गत शीतलटोला में संचालित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में पानी की समुचित व्यवस्था नहीं रहने के कारण, स्थानीय महिलाओं को सरकारी लाभ से वंचित रहना पड़ रहा है.
गर्भवती महिलाओं का प्रसव यहां चार वर्षो से बंद है. इसका परिणाम है कि महिलाओं को प्रसव कराने 15 किमी दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिरनी या फिर 40 किलोमीटर दूर सदर अस्पताल ले जाना पड़ता है. इस दौरान गर्भवती महिलाओं को काफी कष्ट भी सहना पड़ता है.तीन पंचायत के 24 हजार लोग होते लाभान्वित
चार वर्ष पूर्व 12 लाख की लागत से बने आरोग्य मंदिर का उद्देश्य तीन पंचायत खैरीडीह, जरीडीह व अरारी के लगभग 24 हजार लोगों का स्वास्थ्य सुविधा से उपलब्ध कराना था. पूर्व में शीतलटोला में स्वास्थ्य उपकेंद्र संचालित था. लेकिन, चार वर्ष पूर्व इसका सौंदर्यीकरण कर आरोग्य मंदिर का नाम दिया गया.एक सीएचओ व दो एएनएम हैं कार्यरत
इस आरोग्य मंदिर में एक सीएचओ अमन तोमर के साथ दो एएनएम नाजला खातून व निशा कुमारी कार्य कर रही हैं.क्या कहते हैं सीएचओ
सीएचओ अमन तोमर ने बताया कि सितंबर 24 से आरोग्य मंदिर पदस्थापित हैं. छोटी-छोटी बीमारियों का इलाज वह खुद करते हैं. यहां दो एएनएम हैं, जोन टीकाकरण का काम करतीं हैं. अस्पताल में पानी नहीं रहने के कारण केंद्र में प्रसव कार्य बंद है. पानी नहीं रहने की जानकारी विभाग को दी गयी है.ड्राई जोन घोषित है क्षेत्र : मुखिया
खैरीडीह पंचायत के मुखिया ललन सिंह ने बताया कि अस्पताल परिसर क्षेत्र में पानी की समस्या को देखते हुए छह बार बोरिंग की जा चुकी है, लेकिन उक्त क्षेत्र ड्राई जोन घोषित हो गया है. जबसे अस्पताल बना है, पानी नहीं मिला है. अस्पताल परिसर से 400 मीटर दूर एक डांड़ी है, जिसकी गहराई 10-15 फीट है. उसमें भी पानी नहीं है. साथ ही अगल-बगल में ऐसा कुआं भी नहीं है, जहां से जलापूर्ति सुनिश्चित की जा सके.
पूर्व में महीने में होता था 10-15 प्रसव : बीपीएम
इस संबंध में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत बीपीएम जयशंकर प्रसाद ने बताया कि पूर्व में यहां स्वास्थ्य केंद्र थ. चार वर्ष पूर्व आरोग्य मंदिर को केंद्र से थोड़ा हटकर बनवाया गया. लेकिन, पानी की व्यवस्था नहीं हुई. पूर्व में 10-15 डिलीवरी हो जाती थी. ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत सहिया साथी महिलाओं को प्रसव के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिरनी या फिर सदर अस्पताल ले जाती हैं.
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