सीसीएल : उतार-चढ़ाव के बीच कबरीबाद माइंस ने कोयला उत्पादन में बनाया रिकॉर्ड

Updated at : 04 Apr 2025 12:08 AM (IST)
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सीसीएल : उतार-चढ़ाव के बीच कबरीबाद माइंस ने कोयला उत्पादन में बनाया रिकॉर्ड

CCL: सीसीएल की गिरिडीह कोलियरी अंतर्गत कबरीबाद माइंस का इतिहास काफी पुराना है. इस माइन ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. माइंस में उच्च ग्रेड का कोयला मौजूद है. इसका उत्पादन और डिस्पैच कर गिरिडीह कोलियरी को विकास के पथ पर अग्रसर किया जा सकता है.

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कबरीबाद माइंस ने उतार-चढ़ाव के बीच वित्तीय वर्ष 2024-25 में कोयला उत्पादन में रिकॉर्ड बनाया है. लिहाजा आउटसोर्सिंग के माध्यम से संचालित इस माइंस से उम्मीदें काफी बढ़ गई है. वित्तीय वर्ष 1993-94 से लेकर अब तक की बात करें, तो वर्तमान में कबरीबाद माइंस ने सबसे अधिक 5.99 लाख टन कोयला का उत्पादन किया है. इससे पूर्व 2014-15 में 5.59 लाख टन कोयला का उत्पादन किया गया था. इस माइंस से न्यूनत्तम उत्पादन वित्तीय वर्ष 2018-19 में महज 19 हजार टन रहा.

90.84 हेक्टेयर भू-भाग में फैला हुआ है कबरीबाद माइंस

बता दें कि कबरीबाद माइंस 90.84 हेक्टेयर भू-भाग में फैला हुआ है. सीसीएल सूत्रों के मुताबिक इस माइंस में 57 लाख टन कोयला रिजर्व है. इसमें से 36 लाख टन कोयला खनन योग्य है, जिसका उत्पादन किया जा रहा है. खनन के लिए सीसीएल प्रबंधन ने प्लान तैयार कर लिया है. बताया जाता है कि कबरीबाद माइंस में वर्ष 1871 में मेसर्स बंगाल कोल कंपनी एवं ईस्ट इंडिया कंपनी ने उत्पादन शुरू किया था. बाद में इसे एनसीडीसी को हस्तांतरित कर दिया गया. वर्ष 1973 में माइंस कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी सेंट्रल कोलफील्डस लिमिटेड के नियंत्रण में आ गयी.

खुली खदान है कबरीबाद माइंस

यह खुली खदान है. हालांकि इस माइंस में इसी से अधिक उत्पादन करने के कारण यह वायलेंस में आ गयी थी. इस वजह से वित्तीय वर्ष 2019-20, 2020-21 एवं 2021-22 में कोयला उत्पादन शून्य रहा. इस माइंस को चालू कराने के लिए काफी मशक्कत की गई. इसे चालू कराने में तत्कालीन प्रबंधन के अलावे विधायक सह मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू एवं गिरिडीह सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी की भूमिका अहम रही.

आगे भी लक्ष्य हासिल करने की कही बात

इन तमाम प्रयासों की वजह से कबरीबाद माइंस ने उत्पादन में रिकॉर्ड बनाने का काम किया. परियोजना पदाधिकारी जीएस मीणा कहते हैं कि सबों के सहयोग और बेहतर मॉनिटरिंग से कबरीबाद ने बेहतर उत्पादन किया है. आने वाले दिनों में भी सबों के सहयोग से लक्ष्य हासिल किया जायेगा.

कबरीबाद के बाद ओसीपी भी चलेगा आउटसोर्सिंग मोड में

ईसी व सीटीओ मिलने के बाद वर्ष 2023 में कबरीबाद माइंस को आउटसोर्सिंग कंपनी के माध्यम से संचालित किया जाने लगा. अंबा लाल पटेल नामक आउटसोर्सिंग कंपनी को कोयला और ओबी निकालने की जिम्मेदारी मिली है. विधायक सुदिव्य कुमार सोनू ने आउटसोर्सिंग प्रोजेक्ट का उदघाटन किया था. उस वक्त प्रतिवर्ष छह लाख टन कोयला उत्पादन लक्ष्य निर्धारित कर आउटसोर्सिंग कंपनी में 75 फीसदी स्थानीय लोगों को रोजगार सुनिश्चित करने पर बल दिया गया था. सूत्र बताते हैं कि जिस वक्त सीसीएल द्वारा सीधे तौर पर उत्पादन किया जा रहा था तो कई परेशानी होती थी. अब सीसीएल प्रबंधन द्वारा आउटसोर्सिंग कंपनी की लगातार मॉनिटरिंग कर बेहतर उत्पादन किया जा रहा है. कबरीबाद के बाद सीसीएल प्रबंधन ने गिरिडीह ओपेनकास्ट परियोजना को भी आउटसोर्सिंग मोड पर चलाने का निर्णय लिया है. महाप्रबंधक गिरिश कुमार राठौर कहते हैं कि आउटसोर्सिंग कंपनी को लेकर टेंडर होना है. ओसीपी के लिए सीटीई और सीटीओ की प्रक्रिया चल रही है. सीटीओ मिलने के साथ आउटसोर्सिंग के माध्यम से ओसीपी संचालित किया जायेगा. बता दें कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में गिरिडीह कोलियरी को आठ लाख टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य मिला है.

कोलियरी के घाटे को खत्म करने की दिशा में हो मजबूत पहल : सुदिव्य कुमार

गिरिडीह. नगर विकास मंत्री सह गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 5.99 लाख टन कोयला का उत्पादन करने पर सीसीएल गिरिडीह कोलियरी की पूरी टीम को बधाई दी है. उन्होंने कहा कि सीसीएल प्रबंधन आने वाले समय में उत्पादन लक्ष्य को लेकर बेहतर कार्य करने का काम करें. गिरिडीह ओपेनकास्ट परियोजना को जल्द से जल्द चालू करने की दिशा में कार्य किया जाय. ताकि गिरिडीह ओपेनकास्ट परियोजना से भी कोयला उत्पादन जल्द शुरू हो सके. श्री सोनू ने कहा कि गिरिडीह कोलियरी घाटे पर चल रही है. इसलिए घाटे को खत्म करने के लिए प्रबंधन चालू वित्तीय वर्ष के उत्पादन लक्ष्य को हासिल करें. ताकि यहां के लोगों और अगल-बगल के निवासियों को कोलियरी का समुचित लाभ मिल सके.

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MAYANK TIWARI

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