तीन को आजीवन कारावास

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Apr 2016 8:11 AM

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जिला व सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) एके गुप्ता की अदालत ने दहेज हत्या व साक्ष्य छुपाने के मामले में ससुर समेत तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. इसी मामले में मृतका के पति और सास को भी दस-दस वर्ष की सजा दी गयी है. पांचों पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया […]

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जिला व सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) एके गुप्ता की अदालत ने दहेज हत्या व साक्ष्य छुपाने के मामले में ससुर समेत तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. इसी मामले में मृतका के पति और सास को भी दस-दस वर्ष की सजा दी गयी है. पांचों पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है.
गिरिडीह : मामला नवडीहा ओपी क्षेत्र के हाड़ोडीह गांव का है. शनिचर महतो ने 13 दिसंबर 2004 को नवडीहा ओपी में दहेज हत्या का मामला दर्ज कराया था. पुलिस को दिये आवेदन में कहा था कि दहेज के लिए ससुराल वालों ने उसकी बेटी अंजनी देवी की हत्या कर दी. सूचना के बाद जब वह बेटी को देखने उसके ससुराल पहुंचा तो समधी ने कहा कि बीमारी के कारण मौत हो गयी. इस दौरान समधी ने थाने में शिकायत दर्ज करने पर जान से मारने की धमकी दी और एक कमरे में उसे बंद कर दिया.
आनन-फानन में ससुराल वालों ने शव को जला दिया और रात करीब 12 बजे उसे छोड़ा. पिता का कहना था कि वर्ष 1999 में उसने अपनी बेटी की शादी संतोषी महतो के साथ की थी. शादी के बाद ससुराल वाले दहेज में बीस हजार रुपये मांगकर लाने के लिए उसे प्रताड़ित करते थे. सूचक के बयान पर जमुआ थाना में एक मामला दर्ज हुआ. सत्रवाद संख्या 312/08 में अदालत ने भादवि की धारा 498 ए व 304बी/34 में रामधन महतो, बद्री महतो व ससुर हुरो महतो को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी. तीनों को पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना किया.
जुर्माना की रकम नहीं देने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी. इसके अलावा अदालत ने सास चिंतवा देवी व पति संतोषी महतो को 302/34 एवं 201/34 में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया. चिंतवा देवी व संतोषी महतो को भादवि की धारा 304 बी में दस-दस वर्ष की सजा सुनायी. अदालत ने पांचों को धारा 201/34 में सात-सात वर्ष, धारा 489 में तीन-तीन वर्ष की अलग से सजा दी. इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी पीके श्रीवास्तव तथा बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद व प्रीतपाल सिंह ने बहस की. बचाव पक्ष के अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि वे इस मामले में हाइकोर्ट में अपील दायर करेंगे.
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