करोड़ों के खर्च के बावजूद पुराना समाहरणालय भवन अनुपयोगी

Updated at : 23 Feb 2025 9:22 PM (IST)
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करोड़ों के खर्च के बावजूद पुराना समाहरणालय भवन अनुपयोगी

करोड़ों के खर्च के बावजूद पुराना समाहरणालय भवन अनुपयोगी

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गढ़वा. करोड़ो रु खर्च करने के बाद सरकारी भवनों को वीरान व जर्जर होने के लिए कैसे छोड़ दिया जाता है, इसका बेहतर उदाहरण है गढ़वा का पुराना समाहरणालय भवन. सरकारी विभागों के नये समाहरणालय में शिफ्ट हुए करीब सालभर होने जा रहे हैं, लेकिन जिला प्रशासन पुराने समाहरणालय के वेल मेंटेन भवन के पूर्ण इस्तेमाल पर अभी तक निर्णय नहीं ले सका है. इस वजह से करोड़ो रु की लागत से बना यह भवन अब वीरान व अनुपयोगी हो गया है. इस बीच यहां तीन बार चोरी की घटना हो चुकी है. करीब सालभर पहले जब सभी सरकारी विभाग इस समाहरणालय भवन में संचालित थे, तो यह गुलजार रहा करता था. लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान ही यहां से करीब तीन-चार किमी दूर कल्याणपुर में बने नये भवन में नया समाहरणालय शिफ्ट कर दिया गया. पुराने भवन में सिर्फ शिक्षा विभाग संचालित है. जबकि नगर परिषद, मत्स्य विभाग एवं जेएसएलपीएस को बाद में दूसरे स्थानों से लाकर इस विशाल समाहरणालय भवन के कुछ कमरों में शिफ्ट किया गया है. लेकिन अभी भी मुख्य भवन के अलावे, विकास भवन ए व बी के ऊपर, मध्य एवं ग्राउंड में दर्जनों कमरे हैं, जो खाली हैं. साल भर से इनकी सफाई भी नहीं हो रही है और धीरे-धीरे कमरे खराब होने लगे हैं. विकास भवन-बी जिसमें कभी पुलिस अधीक्षक एवं उनसे संबंधित कार्यालय चला करते थे, उसके सभी करीब 12 कमरे बेकार हैं. इसके अलावे मध्य में स्थित जिला परिवहन विभाग, उत्पाद विभाग, सामान्य शाखा, एनआईसी, कल्याण विभाग, समाज कल्याण विभाग, आपूर्ति विभाग, निर्वाचन कार्यालय, एनआरइपी व आरइओ के कमरे खाली पड़े हैं. जबकि तीनो ब्लॉक (विकास भवन ए, बी व मुख्य भवन) के ऊपरी तल्ले के सभी कमरे भी खाली व बेकार हैं. पुराना जनसंपर्क कार्यालय भी हो रहा बर्बाद पुराने समाहरणालय के पीछे सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय का भी अपना भवन था. नये समाहरणालय में शिफ्ट होने के बाद इसके कमरे भी खराब हो रहे हैं. पुराने जनसंपर्क कार्यालय में ही वर्तमान में तीन-चार विभाग संचालित हो सकते हैं. सोलर सिस्टम भी है बेकार पुराने समाहरणालय में बड़ी राशि खर्च कर सोलर ऊर्जा यूनिट स्थापित किया गया था. समाहरणालय के उपरी भवन में सोलर प्लेट लगाया गया है. इस सोलर सिस्टम से करीब 60 एचपी (हॉर्स पावर) का पावर बन सकता था. लेकिन नये समाहरणालय में शिफ्ट होने के बाद इस सोलर यूनिट भी बेकार हो गया है. सोलर सिस्टम एवं इसके तार भी बेतरतीब हो गये हैं. यदि जल्द इस पर निर्णय नहीं लिया गया, तो यह भी अनुपयोगी हो जायेगा.

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