गढ़वा में खराब नेटवर्क से अटका डिजिटल हेल्थ मिशन, पेपरलेस अस्पताल योजना पर सवाल 

Published by : Priya Gupta Updated At : 15 May 2026 7:44 AM

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सांकेतिक तस्वीर (AI Image)

Garhwa News: गढ़वा में अस्पतालों को डिजिटल और पेपरलेस बनाने की तैयारी नेटवर्क की खराब व्यवस्था में फंसती दिख रही है. श्री वंशीधर नगर और धुरकी में बीएसएनएल की लचर कनेक्टिविटी बड़ी चुनौती बनी हुई है.

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प्रभाष मिश्रा की रिपोर्ट 

Garhwa News: स्वास्थ्य विभाग गढ़वा के सरकारी और निजी अस्पतालों को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाने की तैयारी में तो जुटा है, लेकिन इस ‘हाई-टेक’ योजना के रास्ते में नेटवर्क की जर्जर दीवार खड़ी है. आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत जिले के 13.5 लाख लोगों को आभा आईडी से जोड़कर उनका उपचार रिकॉर्ड ऑनलाइन करने का लक्ष्य है. कागजों पर यह योजना जितनी प्रभावी दिखती है, धरातल पर नेटवर्क की समस्या इसे ‘फेल’ करने पर तुला है. जिले के सुदूरवर्ती प्रखंडों, खासकर श्री वंशीधर नगर और धुरकी जैसे इलाकों में बीएसएनएल का नेटवर्क अक्सर गायब रहता है. जब आम आदमी को फोन पर बात करने के लिए सिग्नल नहीं मिलता, तो ऐसे में अस्पताल में मरीजों का भारी डेटा अपलोड करना और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना टेढ़ी खीर साबित होगा.

खराब नेटवर्क बना डिजिटल मिशन की सबसे बड़ी चुनौती

डिजिटल मिशन की सफलता पूरी तरह इंटरनेट पर टिकी है. अस्पताल में मरीज के पहुंचते ही उसका रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन होना है, लेकिन नेटवर्क डाउन होने पर घंटों इंतजार करना पड़ेगा. ऐसे में मरीज को इलाज मिलेगा या वह नेटवर्क आने का इंतजार करेगा? स्थानीय लोगों का कहना है कि धुरकी और वंशीधर नगर जैसे इलाकों में बीएसएनएल की सेवा भगवान भरोसे है. यदि यही स्थिति रही, तो पेपरलेस अस्पताल का सपना महज एक फाइल तक सीमित रह जाएगा. तकनीकी विशेषज्ञों की मानें तो डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड के लिए हाई-स्पीड इंटरनेट जरूरी है. जांच रिपोर्ट और पुराने मेडिकल इतिहास को पोर्टल पर देखने के लिए निरंतर कनेक्टिविटी चाहिए. नेटवर्क की आंख-मिचौली से डेटा ‘करप्ट’ होने या सर्वर टाइम-आउट होने का खतरा बना रहेगा, जिसका सीधा असर गरीब मरीजों के इलाज पर पड़ेगा.

समीक्षा में भी उठा कनेक्टिविटी का मुद्दा

हाल ही में मिशन की ज्वाइंट डायरेक्टर मोनिका राणा की उपस्थिति में हुई समीक्षा बैठक में भी नेटवर्क की समस्या पर चर्चा हुई. अधिकारियों ने माना कि जब तक कनेक्टिविटी का ढांचा मजबूत नहीं होगा, तब तक शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करना कठिन है. एक तरफ जहां 5.5 लाख लोगों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है, वहीं शेष 8 लाख लोगों को जोड़ने के लिए गांवों में कैंप लगाने होंगे, जहां इंटरनेट की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती है. 

क्या कहते हैं सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ जॉन एफ. केनेडी ने कहा कि बिना मजबूत संचार व्यवस्था के पेपरलेस स्वास्थ्य प्रणाली को सफल बनाना संभव नहीं है. उन्होंने बताया कि बीएसएनएल को जिले के सुदूर क्षेत्रों, विशेषकर श्री वंशीधर नगर और धुरकी में नेटवर्क व्यवस्था जल्द दुरुस्त करने को कहा गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के प्रभावी संचालन में नेटवर्क किसी भी तरह की बाधा न बने, इसे सुनिश्चित करने के लिए संचार निगम को निर्देश दिया गया है. 

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प्रिया गुप्ता डिजिटल मीडिया में कंटेंट राइटर हैं और वर्तमान में प्रभात खबर में कार्यरत हैं. वह पिछले एक साल से कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. इससे पहले वह नेशनल प्रिंटर और लोकल चैनलों में काम कर चुकी हैं. अभी वह झारखंड की खबरों पर काम करती हैं और SEO के अनुसार कंटेंट लिखती हैं. प्रिया आसान और साफ भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुंचाने में विश्वास रखती हैं. वह ट्रेंडिंग खबरों, झारखंड से जुड़े मुद्दों और लोगों से जुड़ी खबरों पर फोकस करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों को सही और भरोसेमंद जानकारी सरल शब्दों में मिले.

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