भगवान भरोसे चल रहा है सदर अस्पताल, मरीज परेशान

सदर अस्पताल इन दिनों भगवान के भरोसे चल रहा है .
गढ़वा.
सदर अस्पताल इन दिनों भगवान के भरोसे चल रहा है .यहां डॉक्टरों की लापरवाही रुकने का नाम नहीं ले रहा है. आए दिन डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण मरीज बिना इलाज कराय ही लौटने को मजबूर हैं. सोमवार को भी गायनी ओपीडी, शिशु ओपीडी और इएनटी ओपीडी में डॉक्टर नदारद रहे, इससे मरीजों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ा. इस दौरान गायनी ओपीडी में कई मरीज दर्द से तड़पते नजर आए, लेकिन देखने वाला कोई नहीं था. बताया गया कि महिला चिकित्सक पुष्पा कुमारी दोपहर 12 बजे ओपीडी में पहुंची इसके पहले मरीजों की लंबी कतार लगी थी. इसके बाद एक बजे वे वापस चली गयी. अपने परिजन को ईलाज कराने लेकर आये गढ़वा के विकास कुमार ने बताया कि जब इसकी शिकायत उन्होंने सिविल सर्जन से की तो उन्होंने कहा कहा चिकित्सक आसपास ही होेंगी देख लिजिये. वहीं इमरजेंसी में आयी रागनी कुमारी प्रसव पीड़ा से कराह रही थी, जिसे किसी तरह लेबर वार्ड पहुंचाया गया. जबकि नगर थाना क्षेत्र की बिशुनपुर निवासी जुलैखा बीबी, रॉकी मोहल्ला की प्रियंका कुमारी, मेढना खुर्द की पूजा देवी, करकोमा की सुचिता कुमारी, चौबे मझिगवां की माया देवी और पलामू जिले के उंटारी की मधु कुमारी जैसे कई मरीज घंटों डॉक्टरों का इंतजार करते रहे.सीएस और डीएस की टकराव से मरीज बेहालपरेशान मरीज सदर अस्पताल की अव्यवस्था से आये दिन परेशान हो रहे हैं. अस्पताल की जिम्मेदारी आखिर किसके हाथ में है, यह लोगों के समझ से परे है. अस्पताल में आए दिन लापरवाही के मामले सामने आते हैं, लेकिन प्रबंधन और सिविल सर्जन एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालते रहते हैं. इस खींचतान का खामियाजा जिले के मरीजों को भुगतना पड़ रहा है.
उपाधीक्षक ने मरीजों से कहा सीएस से बात कर लिजियेजब मरीजों के परिजनों ने उपाधीक्षक से डॉक्टरों की गैरमौजूदगी पर सवाल किया, तो उन्होंने सिविल सर्जन से बात करने को कहा. वहीं सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने जवाब देते हुए कहा कि अस्पताल की सभी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी उपाधीक्षक की है, इसलिए इस बारे में वही जवाब देंगे. दोनों अधिकारियों के इस टालमटोल रवैये के कारण मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है.हंगामे के बाद डॉक्टर पहुंचे अस्पतालजब मरीजों के परिजन आक्रोशित हुए और अस्पताल में हंगामा किया, तब जाकर ओपीडी से नदारद डॉक्टर सदर अस्पताल पहुंचे. जानकारी के अनुसार, गायनी ओपीडी इएनटी ओपीडी में शिशु ओपीडी में डॉ. शिशिर चंद्राकर की ड्यूटी थी, लेकिन वे अपनी जगह पर मौजूद नहीं थे. मरीजों के परिजनों का कहना है कि अगर डॉक्टर समय पर उपलब्ध नहीं रह सकते, तो अस्पताल को बंद कर देना चाहिए. सवाल यह उठता है कि आखिर इस लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेगा और कब तक मरीजों को इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar News Desk
यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




