टीचर नहीं, सात माह से पढ़ाई ठप

Published at :08 Mar 2016 8:25 AM (IST)
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टीचर नहीं, सात माह से पढ़ाई ठप

गड़बड़ी. राशि की निकासी हो गयी, लेकिन नहीं बना विद्यालय भवन नवप्राथमिक विद्यालय बियार टोला के विद्यालय भवन व शौचालय बनाने के लिए वर्ष 2010 में 7.37लाख रुपये मिले थे, लेकिन छह साल बीत जाने के बाद भी इसका निर्माण पूरा नहीं हो पाया. इस बीच, सात महीने से शिक्षक के अभाव में विद्यालय भी […]

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गड़बड़ी. राशि की निकासी हो गयी, लेकिन नहीं बना विद्यालय भवन
नवप्राथमिक विद्यालय बियार टोला के विद्यालय भवन व शौचालय बनाने के लिए वर्ष 2010 में 7.37लाख रुपये मिले थे, लेकिन छह साल बीत जाने के बाद भी इसका निर्माण पूरा नहीं हो पाया. इस बीच, सात महीने से शिक्षक के अभाव में विद्यालय भी बंद हो चुका है. इसके कारण यहां नामांकित बच्चों का भविष्य अंधकारमय है.
विशुनपुरा(गढ़वा) : विशुनपुरा प्रखंड के पिपरी कला वियार टोला में नव प्राथमिक विद्यालय का भवन पिछले छह वर्ष से अधूरा पड़ा हुआ है. झारखंड सरकार शिक्षा विभाग ने बियार टोला में बच्चों की शिक्षा देने के उद्देश्य से नवप्राथमिक विद्यालय की स्वीकृति दी थी. साथ ही विद्यालय का भवन व शौचालय का निर्माण व चापानल लगवाने के लिए 7.37 लाख रुपये की राशि भी उपलब्ध करायी. विद्यालय में नान्हू राम को पदस्थापित करते हुए निर्माण कार्य शुरू कराया गया.
साथ ही इस वर्ष पूरी राशि को विद्यालय शिक्षा समिति के अध्यक्ष व सचिव सह प्रधानाध्यापक ने निकाल लिया. लेकिन न तो विद्यालय भवन का कार्य पूरा किया गया और न ही शौचालय बना. इस बीच वर्ष 2012 में नान्हू राम शिक्षक सह प्रधानाचार्य से सेवानिवृत्त भी हो गये.
श्री राम के सेवानिवृत्त होने के बाद दूसरे शिक्षक कृष्णा चौधरी को विभाग ने पदस्थापित करते हुए वहां पढ़ाई शुरू करायी. लेकिन बीते 22 सितंबर 2015 को कृष्णा चौधरी का यहां से स्थानांतरण हो गया. तब से विद्यालय में पढ़ाई भी बंद हो चुका है. सात महीने से लगातार विद्यालय बंद रहने व मार्च परीक्षा का समय आ जाने के बावजूद विद्यालय शुरू नहीं हुआ. इसके कारण यहां नामांकित बच्चे का भविष्य अंधकारमय हो चुका है.
2010 में शुरू हुआ निर्माण कार्य
नवप्राथमिक विद्यालय पिपरी कला बियार टोला में विद्यालय भवन व शौचालय का निर्माण वर्ष 2010 में शुरू हुआ था. सरकार द्वारा मिली 7.47 लाख की राशि से विद्यालय भवन का निर्माण कार्य शुरू किया गया. लेकिन इसे पूरा किये बगैर बीच में अधूरा छोड़ दिया गया, सो आज तक नहीं बना. विद्यालय की खिड़की, प्लास्टर व फर्श बनाना बाकी रह गया. साथ ही चापाकल भी नहीं गाड़ा गया. विद्यालय का भवन निर्माण का कार्य तो अधूरा है. बीते सितंबर महीने से पढ़ाई से बंद हो चुकी है. इस विद्यालय में 121 विद्यार्थी नामांकित हैं. विद्यालय बंद रहने से इन बच्चों को सरकारी सुविधा का भी लाभ नहीं मिल पा रहा है. बच्चों को मध्याह्न भोजन हो, छात्रवृत्ति की राशि अथवा पोशाक, कुछ नहीं मिला है.
पोशाक, छात्रवृत्ति नहीं मिली
बियार टोला निवासी अभिभावक गरीबा बियार, केश्वर बियार, भोला बियार, वार्ड सदस्य कुसुमरी देवी आदि ने बताया कि विद्यालय शुरू होने के चार साल के भीतर उनके बच्चों को मात्र एक बार ड्रेस मिला है. लेकिन इसके बाद फिर पोशाक अथवा छात्रवृत्ति नहीं मिली. उन्होंने कहा कि उनके द्वारा विभाग से इसकी शिकायत की गयी. लेकिन इसके बाद भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी.
राशि सचिव को दी थी : अध्यक्ष
विद्यालय शिक्षा समिति के अध्यक्ष नंदलाल बियार ने बताया कि उन्होंने विद्यालय बनाने के लिए अपनी भूमि सरकार को दी है. विद्यालय के भवन आदि बनाने के लिए जो राशि आयी थी, उसे उन्होंने सचिव के साथ निकालकर उन्हें दे दिया था. अब तो वे सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं.
सचिव को दंडित किया गया है : सीआरपी
इस संबंध में सीआरपी महेंद्र गुप्ता ने कहा कि तत्कालीन सचिव नान्हू राम को इसके लिए दंडित किया गया है. उनके वेतन से पैसा की निकासी कर अध्यक्ष के खाते में डाल दिया गया है. लेकिन नये सचिव कृष्णा चौधरी कम राशि कहकर विद्यालय भवन का निर्माण कार्य शुरू नहीं किये.
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