बंगाल चुनाव 2026: मतुआ प्रथम परिवार में वर्चस्व की जंग, बागदा-गायघाट में देवरानी-जेठानी और भाई आमने-सामने

Published by :Mithilesh Jha
Published at :26 Apr 2026 11:30 AM (IST)
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West Bengal Election 2026 Matua Community

West Bengal Election 2026 Matua Community: बंगाल चुनाव 2026 के दूसरे चरण में बागदा और गायघाट सीटों पर मतुआ समुदाय के प्रथम परिवार के बीच जंग छिड़ी है. मतदाता सूची से लाखों नाम गायब होने के बाद भाजपा के गढ़ में सेंधमारी की कोशिश में जुटी टीएमसी.

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West Bengal Election 2026 Matua Community: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के रण में उत्तर 24 परगना जिले की बागदा और गायघाट सीटें हॉट सीट बन गयीं हैं. यहां मुकाबला सिर्फ भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच नहीं, बल्कि मतुआ समुदाय के प्रथम परिवार (ठाकुरबाड़ी) के बीच है.

2 खेमों में बंट गयी ठाकुरबाड़ी की विरासत

इस बार ठाकुरबाड़ी की विरासत 2 खेमों में बंट गयी है, जहां रिश्तेदार ही एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं. मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में लाखों नाम कटने से शरणार्थी हिंदुओं में भारी नाराजगी और नागरिकता को लेकर अनिश्चितता का माहौल है.

बागदा में देवरानी बनाम जेठानी

बागदा निर्वाचन क्षेत्र में इस बार चुनावी जंग ठाकुरबाड़ी के बैठक कक्ष तक जा पहुंची है. यहां का मुकाबला बेहद दिलचस्प है. तृणमूल ने राज्यसभा सांसद ममताबाला ठाकुर की बेटी और निवर्तमान विधायक मधुपर्णा ठाकुर को मैदान में उतारा है. भाजपा ने केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर की पत्नी सोमा ठाकुर को उम्मीदवार बनाकर मुकाबले को पारिवारिक द्वंद्व में बदल दिया है.

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दुलाल बर ने कर दी बगावत, लड़ रहे निर्दलीय

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमा ठाकुर को टिकट दिया, तो स्थानीय कार्यकर्ता नाराज हो गये. पूर्व भाजपा विधायक दुलल बर ने बगावत कर दी और अब निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. यह भाजपा उम्मीदवार सोमा की राह में मुश्किलें खड़ी कर सकता है.

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गायघाट में अपनों की बगावत झेल रहे सुब्रत ठाकुर

पड़ोसी सीट गायघाट पर शांतनु ठाकुर के बड़े भाई और भाजपा विधायक सुब्रत ठाकुर चुनाव लड़ रहे हैं. भाजपा में पारिवारिक उम्मीदवार थोपने को लेकर असंतोष दिखा. हालांकि, निर्दलीय नामांकन करने वाली तनिमा सेन ने नाम वापस ले लिया है, लेकिन भितरघात का खतरा बरकरार है. सुब्रत ठाकुर का सामना तृणमूल के नरोत्तम विश्वास से है, लेकिन असली चुनौती नाराज कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की है.

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मतदाता सूची से 12 लाख नामस गायब, भाजपा को झटका

मतुआ शरणार्थियों के बीच सबसे बड़ी चिंता SIR की वजह से है. उत्तर 24 परगना में मतुआ शरणार्थियों के 12.3 लाख से अधिक नाम मतदाता सूची से हटा दिये गये हैं. अकेले बागदा में 55,000 और गायघाट में 39,000 नाम गायब हैं. भाजपा ने 2019 से CAA के जरिये नागरिकता का वादा किया था, लेकिन अब मतदाता सूची से नाम कटने के बाद लोग खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं.

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West Bengal Election 2026 Matua Community: दलबदल की लहर

मतदाताओं में बेचैनी का फायदा तृणमूल कांग्रेस को मिल सकता है. अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद गायघाट में 61 भाजपा कार्यकर्ता तृणमूल में शामिल हो गये. बागदा में भी 50 मतुआ परिवारों ने पाला बदल लिया. शांतनु ठाकुर का कहना है कि प्रभावित लोग न्यायाधिकरण (Tribunal) जा सकते हैं, लेकिन चुनाव से ठीक पहले यह ‘वोट बैंक’ भाजपा के हाथ से फिसलता नजर आ रहा है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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