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मतुआ वोटरों के नाम ‘अनमैप्ड’ होने पर मंत्री ने जतायी चिंता

ड्राफ्ट लिस्ट में जिनके नाम ‘अनमैप्ड’ दिखाये गये हैं, वे मुख्य रूप से ऐसे लोग हैं जिनके या उनके माता-पिता के नाम 2002 की लिस्ट में नहीं मिल पाये.

उत्तर 24 परगना और नदिया के बॉर्डर इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित कोलकाता. पश्चिम बंगाल में एसआइआर के ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद मतुआ समुदाय के कई इलाकों में घबराहट फैल गयी है. खासकर बांग्लादेश की सीमा से लगे उत्तर 24 परगना और नदिया जिलों के विधानसभा क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मतदाताओं को ‘अनमैप्ड’ मार्क किया गया है, जिससे उनके मतदान अधिकार पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. ड्राफ्ट लिस्ट में जिनके नाम ‘अनमैप्ड’ दिखाये गये हैं, वे मुख्य रूप से ऐसे लोग हैं जिनके या उनके माता-पिता के नाम 2002 की लिस्ट में नहीं मिल पाये. नतीजतन, पारिवारिक कनेक्शन या ‘लिंकेज’ बनाना संभव नहीं हुआ. इन मतदाताओं को सुनवाई के दौरान नागरिकता साबित करने के लिए 1950 या 1971 से पहले के दस्तावेज या 2002 से पहले के निवास प्रमाण प्रस्तुत करना पड़ सकता है, जिससे काफी भ्रम की स्थिति बनी है. ड्राफ्ट लिस्ट के आंकड़ों के अनुसार मतुआ गढ़ माने जाने वाले विधानसभा क्षेत्रों में अनमैप्ड वोटरों का प्रतिशत काफी उच्च है. उदाहरण के तौर पर गाइघाटा में 14.5 प्रतिशत, हाबरा में 13.6 प्रतिशत , बागदा में 12.7 प्रतिशत, नदिया जिले के कल्याणी में11.9 प्रतिशत, राणाघाट उत्तर-पूर्व में 11.2 प्रतिशत, बनगांव उत्तर में 11.3 प्रतिशत वोटरों की मैपिंग नहीं हो पायी. इसके अलावा, कृष्णगंज, राणाघाट उत्तर-पश्चिम और दक्षिण, चकदह, शांतिपुर और हरिंघटा में 7-10 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के नाम अनिश्चित सूची में हैं. ऑल इंडिया मतुआ महासंघ के अनुसार राज्य में लगभग 18 मिलियन मतुआ वोटर हैं, जो लगभग 100 विधानसभा क्षेत्रों में फैले हैं. उधर, केंद्रीय मंत्री और बनगांव के सांसद शांतनु ठाकुर ने स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लानी चाहिए. उन्होंने चेताया कि अगर सीएए लागू नहीं हुआ, तो हालात और बिगड़ सकते हैं. दूसरी ओर, भाजपा नेता और केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी सवाल उठाये. उन्होंने कहा कि अगर सीएए फॉर्म न भरने वाले मतदाताओं के नाम एसआइआर के विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया में बाहर पाये जाते हैं, तो मुख्यमंत्री इसकी जिम्मेदारी लेंगी या नहीं. तृणमूल कांग्रेस ने पलटवार किया. तृणमूल सांसद ममता बाला ठाकुर ने कहा कि वे बिना शर्त नागरिकता की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं और मतुआ समुदाय को परेशान करने वाले किसी भी प्रोसेस को स्वीकार नहीं करेंगे. तृणमूल प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने आरोप लगाया कि भाजपा बॉर्डर इलाकों में अपने ही वोट बैंक को खतरे में डाल रही है और नागरिकता साबित करने की इस जटिल प्रक्रिया के माध्यम से वोटरों को निशाना बनाया जा रहा है.

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