टीबी से सबर महिला की मौत, वीरान हो रहे सबरों के आशियाने

Edited by ATUL PATHAK
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घाटशिला की सबर बस्ती में कभी रहते थे 22 परिवार, अब बचे एक दर्जन

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गालूडीह.

बड़ाकुर्शी पंचायत की दारीसाई सबर बस्ती निवासी 45 वर्षीय निशोदा सबर की सोमवार देर रात एमजीएम अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गयी. परिजनों के मुताबिक वह लंबे समय से टीबी बीमारी से पीड़ित थीं. सबर बस्ती में शोक और दहशत का माहौल है.

बस्ती की जमीनी हकीकत रूह कंपाने वाली है. कभी इस बस्ती में 20 से 22 सबर परिवार हंसते-खेलते रहते थे, लेकिन लगातार हो रही असमय मौतों के कारण अब यहां महज एक दर्जन परिवार ही जिंदा बचे हैं. कई सबर परिवार तो पूरी तरह से खत्म हो चुके हैं. उनके सरकारी बिरसा आवास आज वीरान पड़े हैं. घरों में चिराग जलाने वाला भी कोई नहीं बचा है. ग्रामीणों का कहना है कि भयंकर गरीबी, पौष्टिक आहार की कमी (कुपोषण) और महुआ शराब के अत्यधिक सेवन के कारण लोग लगातार टीबी जैसी घातक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं. सरकार द्वारा आदिम जनजातियों के विकास के बड़े-बड़े दावे किये जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ये बस्तियां आज भी सड़क, स्वास्थ्य, शुद्ध पेयजल और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से सबर बस्तियों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाने और कुपोषण-नशे के खिलाफ समन्वित योजना चलाने की मांग की है.

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