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East Singhbhum : गुड़ाबांदा पन्ना खदान : 12 साल में दो बार सर्वे, खनन शुरू नहीं करा सकी सरकार

Updated at : 14 Dec 2024 12:05 AM (IST)
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East Singhbhum : गुड़ाबांदा पन्ना खदान : 12 साल में दो बार सर्वे, खनन शुरू नहीं करा सकी सरकार

प्रशासन का दावा है कि पन्ना खदानें सील हैं, लेकिन चोरी-छिपे हो रहा खनन

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मो.परवेज/कुश महतो

पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला अनुमंडल मुख्यालय से 70 किमी दूर ओडिशा सीमा से सटे गुड़ाबांदा में बेशकीमती पन्ना, नीलम व माइका (अभ्रक) खदान का पता चले 12 साल बीत गये. इस दौरान दो बार 2020-21 और 2022-23 में भूतत्व विभाग ने सर्वे किया. इसकी रिपोर्ट राज्य व केंद्र सरकार को भेजी. दुर्भाग्य जनक है कि खदानों की नीलामी नहीं हो पायी. इसका कारण नहीं बताया गया. प्रशासन का दावा है कि पन्ना खदानें सील हैं, पर जमीनी हकीकत कुछ और है. आज भी चोरी-छिपे खनन जारी है.

उच्च गुणवत्ता का है पन्ना

भूतत्व विभाग के सर्वे में पता चला था कि 38 वर्ग किमी में 20 मीटर गहराई तक पन्ना व नीलम का भंडार है. कोलकाता जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की प्रयोगशाला में टेस्ट से पता चला था कि उच्च गुणवत्ता वाला पन्ना है.

दो विधायक व एक सांसद ने भी नहीं उठायी आवाज

गुड़ाबांदा प्रखंड की आठ पंचायत में चार पंचायत घाटशिला, तो चार बहरागोड़ा विधानसभा क्षेत्र के अधीन हैं. एक प्रखंड में दो-दो विधायक और एक सांसद होने के बावजूद महत्वपूर्ण विषय पर किसी ने सदन में मामले को नहीं रखा. इस संदर्भ में केंद्र और राज्य सरकार को पहल की जरूरत है. लोगों को नयी सरकार के उम्मीद है.

जमीन में खनिज का भंडार, ग्रामीणों की जिंदगी फटेहाल

गुड़ाबांदा प्रखंड के अधिकांश क्षेत्र पहाड़ों से घिरा है. पहाड़ों के नीचे कीमती खनिज संपदा हैं. इसके बावजूद करीब 50 हजार की आबादी फटेहाल जिंदगी जी रही है. बारुणमुठी, ठुरकुगोड़ा, बाउटिया, चिड़ियापहाड़ में खनिज संपदा है. इन गांवों तक जाने के लिए सड़कें नहीं हैं. लोग पगडंडी से आना जाना करते हैं. बिजली, पानी, स्वास्थ्य सेवा का गंभीर संकट है. पन्ना के अवैध खनन के दौरान मिट्टी धंसने से चार लोगों की जान जा चुकी है. 2012 में झपाल मुर्मू, रवि मुर्मू व बद्रीनाथ मुर्मू और 2023 में झाबू मुंडा की मौत हो गयी है. वे मजदूरी करते थे. पन्ना बाहरी लोग लूट ले गये.

खदान खुलती तो, मिलता रोजगार

ग्रामीण कहते हैं पश्चिम बंगाल,ओडिशा, जयपुर, रांची के माफिया की नजर पन्ना पर है. स्थानीय मजदूरों को प्रलोभन देकर खनन कराते हैं. ग्रामीणों का कहना है अगर नीलामी होती, तो यहां के लोगों को रोजगार मिलता. गुड़ाबांदा का विकास होता, लेकिन सरकार को चिंता नहीं है.

पन्ना खदान खुलेगी, तो गुड़ाबांदा की बदहाली दूर होगी. लोगों को रोजगार मिलेगा. क्षेत्र का विकास होगा.

– पुष्पा महतो, पंसस, गुड़ाबांदा

यहां के शिक्षित युवा मजदूरी के लिए पलायन कर रहे हैं. बाहर के लोग पन्ना का खनन कर मालामाल हो रहे हैं. सरकार को सोचना चाहिए.

– निखिल महतो, छात्र, गुड़ाबांदा

वर्तमान में चेन्नई में मजदूरी करते हैं. आगे की पढ़ाई करना चाहते थे. गरीबी के कारण नहीं पढ़ पाये. क्षेत्र में रोजगार मिलता, तो अच्छा होता.

– कृष्णा सबर, छात्र, गुड़ाबांदा

पन्ना खदान की नीलामी होती, तो गांव में रोजगार मिलता. अपने क्षेत्र में कीमती खनिज संपदा है, फिर भी सरकार ध्यान नहीं दे रही है.

– हरीश कुमार, छात्र, गुड़ाबांदा

इस क्षेत्र में पन्ना जैसे कीमती खनिज संपदा है, फिर भी विधायक और सांसद ने नीलामी को लेकर बात नहीं की. नीलामी होती, तो क्षेत्र के युवा को रोजगार मिलता.

– दुलाराम मुर्मू, छात्र, गुड़ाबांदा

पन्ना खदान की नीलामी होती, तो रोजगार मिलता. दूसरे राज्य में रोजगार के लिए जाना नहीं पड़ता. सरकार को इस विषय पर पहल करनी चाहिए.

किशोर कुमार महतो, छात्र, गुड़ाबांदा

पन्ना खदानों की नीलामी नहीं होने से माफिया तत्व मालामाल हो रहे हैं. इधर, इतनी कीमती खनिज संपदा होने बावजूद गांव के लोग साल पत्ता, केंदू पत्ता व लकड़ी के भरोसे जिंदगी जी रहे हैं.

– शुभजीत मुंडा, प्रमुख, गुड़ाबांदा

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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