पहाड़ों पर बसे गांवों में पेयजल संकट

गालूडीह : मई माह की चिलचिलाती धूप और गरमी से जीना मुहाल हो गया है. घाटशिला प्रखंड के बंगाल सीमा से सटे बीहड़ और पहाड़ों पर बसे गांवों में भीषण जल संकट उत्पन्न हो गया है. सभी जल श्रोत सूख चुके हैं. पीने के पानी तो लोग कोसों दूर चल कर जुगाड़ कर ले रहे […]
गालूडीह : मई माह की चिलचिलाती धूप और गरमी से जीना मुहाल हो गया है. घाटशिला प्रखंड के बंगाल सीमा से सटे बीहड़ और पहाड़ों पर बसे गांवों में भीषण जल संकट उत्पन्न हो गया है.
सभी जल श्रोत सूख चुके हैं. पीने के पानी तो लोग कोसों दूर चल कर जुगाड़ कर ले रहे हैं, परंतु नहाने के लिए ग्रामीणों को चिंता करनी पड़ रही है. पानी के अभाव में कई-कई दिनों तक लोग नहा तक नहीं रहे. बाघुड़िया पंचायत के मिर्गीटांड़ गांव में पहाड़ी झरना से निकले पानी को पत्थर-मिट्टी देकर ग्रामीणों घेरा है.
हालांकि यहां वन विभाग के माध्यम से एक चेकडैम बनाया जा रहा है, जो अभी तक अधूरा है. इस गड्ढे में जमे गंदे पानी से पूरा गांव नहाता है. इससे बीमारी फैलने की संभावना है. ग्राम प्रधान रवि टुडू कहते हैं क्या करें, कोई दूसरा जलश्रोत नहीं है. इस गांव में एक भी तालाब नहीं है.
पहाड़ों पर वास करते हैं, झरना ही सहारा है. गरमी के कारण झरना का पानी भी सूख गया है. सीमावर्ती क्षेत्र में सुवर्णरेखा नहर में सूखी है. ग्रामीणों ने कहा कि बरसात में नहर में पानी था, परंतु गरमी में नहर सूखी है. नहाने, कपड़े धोने के लिए ग्रामीणों को सोचना पड़ रहा है. मवेशियों को भी पानी नहीं मिल पा रहा है.
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