15 दिनों से वैन में कैद है दो मोर
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :24 Feb 2015 8:15 AM
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राष्ट्रीय पक्षी के साथ वन विभाग कर्मी कर रहे अमानवीय व्यवहार आनंद जायसवाल दुमका : 15 दिनों से राष्ट्रीय पक्षी मोर के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है. हिजला पश्चिमी वन क्षेत्र के पदाधिकारी व कर्मियों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी है. कार्यालय परिसर में दो मोर को कैद करके रखा […]
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राष्ट्रीय पक्षी के साथ वन विभाग कर्मी कर रहे अमानवीय व्यवहार
आनंद जायसवाल
दुमका : 15 दिनों से राष्ट्रीय पक्षी मोर के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है. हिजला पश्चिमी वन क्षेत्र के पदाधिकारी व कर्मियों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी है. कार्यालय परिसर में दो मोर को कैद करके रखा गया है. दो सप्ताह से अधिक समय बीत गये हैं. ना ही दोनों को भोजन प्राप्त हुआ है न शुद्ध हवा-पानी. भूखे-प्यासे ये दोनों मोर एक मारुति वैन में कैद है.
15 दिनों से हैं कैद: दोनों मोर मारुति वैन में ताजी हवा के लिए तरस रहे हैं. उसी वैन में वे मल-मूत्र त्याग कर रहे हैं और उसी गंदे जगह वे रहने को विवश भी है. ऐसे में दोनों पर संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है. राष्ट्रीय पक्षी के साथ ऐसी क्रूरता बेहद शर्मनाक मामला है.
वन्य जीवों की होती है तस्करी
इलाके से वन्य जीवों की तस्करी होती आ रही है. इसका खुलासा समय-समय पर होता रहा है. विलुप्त हो चुके दो मोर को वन विभाग ने 15 दिन पूर्व शहरी क्षेत्र से बरामद किया था. इस कार्रवाई के बाद विभाग के पदाधिकारी इन दोनों मोर को उस वाहन के साथ जब्त कर शास्त्रीनगर-बंदरजोरी विभाग के परिसर में लेते आये थे, जिस मारुति वैन में दोनों मोर पाये गये थे. तब से इन दोनों मोर को न तो जंगल में छोड़ा गया और न ही अब तक उन्हें सही ढंग से रखे जाने की कोई व्यवस्था ही की गयी है.
हवादार वातावरण जरूरी
‘‘अगर किसी पक्षी को वाहन में कैद करके रखा जाय तो यह पशु के साथ क्रूरता है. मोर वन्य प्राणी है. वे जंगल में खुले वातावरण में रहते हैं. उन्हें जंगल में छोड़ देना चाहिए या फिर उचित वातावरण उपलब्ध कराते हुए सुरक्षा की दृष्टि से हवादार जगह पर रखने की व्यवस्था शीघ्र करनी चाहिए. 15 दिनों तक कोई भी पक्षी एक वाहन में रहे और उसी में मल आदि त्याग करे तो वह बीमार पड़ सकता है. मोर ऐसे भी छोटे-छोटे कीट खाते हैं. ऐसे में उन्हें उचित आहार भी नहीं मिल पाता होगा.
डॉ समीर सहाय, पशु चिकित्सक
रेफरल पशु अस्पताल, दुमका
‘‘एक-आध सप्ताह पहले दो मोर जब्त किये गये थे. सही तरीख तो पता नहीं है. इस संबंध में मामला भी दर्ज हुआ था. तब से मोर वैन में ही है. उसे दो-तीन दिन में सही जगह में पहुंचा दिया जायेगा.’’
सीताराम चौधरी, वन क्षेत्र पदाधिकारी, हिजला पश्चिमी.
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