दुमका के आसनबनी में 'विकास' का सूखा: 1 चापानल के भरोसे पूरा इलाका, खराब हुआ तो नदी का पानी ही सहारा

Author :Sameer Oraon
Published by :Sameer Oraon
Updated at :13 May 2026 7:38 PM
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Dumka Water Crisis

आसनबनी इलाके में मौजूद एकमात्र चापानल जिसके भरोसे टिका है पूरा गांव

Dumka Water Crisis: दुमका के काठीकुंड प्रखंड अंतर्गत आसनबनी नीचे टोला के ग्रामीण पेयजल और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं. 50 की आबादी मात्र एक चापानल के भरोसे है. ग्रामीणों ने प्रशासन से पक्की सड़क और जलमीनार की मांग की है. पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें.

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Dumka Water Crisis, काठीकुंड (अभिषेक की रिपोर्ट): विकास के तमाम दावों के बीच दुमका जिले के काठीकुंड प्रखंड से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो ग्रामीण विकास की जमीनी हकीकत को बयां करती है. प्रखंड की आसनपहाड़ी पंचायत अंतर्गत आसनबनी (नीचे टोला) के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं. आदिवासी बहुल इस टोला में मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण ग्रामीणों को हर दिन भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इस इलाके में लगभग 10 परिवार निवास करते हैं, जिनकी कुल आबादी 50 से अधिक है और इस पूरी आबादी के लिए गांव में मात्र एक चापानल उपलब्ध है.

इसी एकमात्र चापानल पर निर्भर है पूरी आबादी

पूरे टोला के लोग अपनी दैनिक जरूरतों और पीने के पानी के लिए इसी एकमात्र स्रोत पर निर्भर हैं. ग्रामीणों ने बताया कि वर्तमान में चापानल चालू स्थिति में तो है, लेकिन इसके खराब होते ही संकट खड़ा हो जाता है. ऐसी स्थिति में ग्रामीणों को विवश होकर नदी के दूषित पानी से अपनी प्यास बुझानी पड़ती है. गर्मी के मौसम में जलस्तर नीचे जाने और बरसात में पानी गंदा होने के कारण स्वच्छ पेयजल की समस्या गंभीर रूप ले लेती है.

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कच्ची सड़क और कीचड़ ने बढ़ाई मुसीबत

पानी के साथ-साथ आवागमन भी यहां की एक बड़ी समस्या है. जंगली क्षेत्र से सटे होने के कारण इस टोला का जीवन पहले ही कठिन है, ऊपर से गांव तक पहुंचने वाली सड़क अब भी कच्ची है. बरसात के दिनों में यह सड़क कीचड़ और फिसलन के कारण चलने लायक नहीं रह जाती. इससे बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती है क्योंकि उनका स्कूल जाना दूभर हो जाता है. वहीं, किसी के बीमार पड़ने पर उसे अस्पताल ले जाना या ग्रामीणों का बाजार तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती बन जाता है.

प्रशासन से गुहार: नल-जल योजना और पक्की सड़क की मांग

गांव की बदहाली से त्रस्त ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई है. ग्रामीणों की मांग है कि गांव में पेयजल की समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक और बोरिंग कराई जाए या राज्य सरकार की ‘नल-जल योजना’ के तहत जलमीनार की व्यवस्था की जाए. इसके साथ ही, आवागमन को सुगम बनाने के लिए कच्ची सड़क के पक्कीकरण की मांग भी जोर पकड़ रही है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही इन समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो उनका जीवन और भी कष्टकारी हो जाएगा.

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लेखक के बारे में

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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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