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बेकार हुए लाखों के वाटर एटीएम, चल रहीं खाने-पीने की दुकानें

Updated at : 20 Jul 2024 12:23 PM (IST)
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बेकार हुए लाखों के वाटर एटीएम, चल रहीं खाने-पीने की दुकानें

नगर निगम की ओर से शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर लाखों की लागत से लगायी गयी वाटर एटीएम रखरखाव के अभाव में बेकार व खराब पड़े हैं. ऐसे में संचालक यहां खाने-पीने के सामान बेचने लगे हैं.

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धनबाद नगर निगम की ओर से शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर लाखों की लागत से लगायी गयी वाटर एटीएम रखरखाव के अभाव में बेकार व खराब पड़े हैं. ऐसे में संचालक यहां खाने-पीने के सामान बेचने लगे हैं. वाटर एटीएम के ऊपर ही रखकर पानी की बोतल बेची जा रही है. चाय, दूध, दही, कोल्डड्रिक, चिप्स, पनीर समेत अन्य समान तक बिक रहे हैं. कई बार नगर निगम ने वाटर एटीएम को बंद कर जांच करने का आदेश भी दिया मगर स्थिति जस की तस है. धनबाद शहर के रणधीर वर्मा चौक, श्रमिक चौक, हिरापुर, बरटांड़, स्टील गेट में वाटर एटीएम खोली गयी है. मगर रणधीर वर्मा चौक स्थित वाटर एटीएम को छोड़ अन्य जगहों पर एटीएम खराब हो गए हैं. पानी की जगह यहां अन्य खाद्य पदार्थों की दुकानें खुल गयी हैं. पूछने पर वाटर एटीएम संचालक बताते है की सिर्फ पानी बेचने से घर का खर्च तो दूर खुद का खर्चा भी नहीं निकाल पता है इसलिए मजबूरन दूसरी चीजें बेचनी पड़ती हैं.

हीरापुर में वाटर एटीएम में चल रही लस्सी की दुकान:

हीरापुर स्थित वाटर एटीएम को पिछली बार नगर निगम ने सील कर दिया था. मगर आज भी यहां अतिक्रमण कर वाटर एटीएम की जगह लस्सी की दुकान चल रही है. श्रमिक चौक स्थित वाटर एटीएम भी कई दिनों से खराब पड़ी है. वहां बिस्किट, केक, चिप्स आदि की दुकानें खुल गई हैं.

नगर निगम के बाहर ही वाटर एटीएम में चल रही नाश्ते की दुकान:

नगर निगम कार्यालय मुख्य द्वार के पास लगे वाटर एटीएम में पानी पीने के लिए लोग आ तो रहे हैं पर जैसे ही पैसे डालते हैं उससे पानी नहीं निकलता. ना पैसा ही वापस मिलता है. यहां आसपास स्कूल, कॉलेज और प्रमुख कार्यालय होने के कारण यहां हमेशा भीड़ लगी रहती है. यहां से पानी नहीं मिलने पर लोगों को महंगे दाम पर बोतल बंद पानी खरीदना पड़ता है. यहां वाटर एटीएम एक साल से खराब पड़ा है.

खर्च निकालने के लिए बेचते हैं दूसरे सामान:

वाटर एटीएम चला रहे दुकानदारों ने बताया कि सिर्फ पानी बेचकर खर्च नहीं निकल पता है. इसलिए मजबूरन खाने-पीने के सामान भी बेचना पड़ता है. यह गलत है मगर घर चलाने के लिए विवश होकर ऐसा करना पड़ता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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