Dhanbad News: जमीन विवाद व एनओसी के पचड़े में फंसी ठोस कचरा प्रबंधन योजना

Published by : ASHOK KUMAR Updated At : 03 Jun 2026 1:17 AM

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नौ करोड़ की लागत से 30 कांपैक्टर स्टेशन बनाने की थी योजना, सात साल बाद भी 18 अधूरे. जो चल रहे हैं उसकी भी स्थिति खराब.

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शहर में वैज्ञानिक तरीके से ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर 30 कांपैक्टर स्टेशन बनाने की योजना पर आधा-अधूरा ही काम हो पाया है. करीब नौ करोड़ रुपये की इस परियोजना में अब तक केवल 12 कांपैक्टर स्टेशन ही चालू हो सके हैं, जबकि 18 स्टेशन जमीन विवाद, स्थानीय विरोध और एनओसी नहीं मिलने से फाइलों में ही सिमटकर रह गये हैं. पिछले सात साल में मात्र 12 कांपैक्टर स्टेशन ही चालू हो पाये हैं. इनकी भी स्थिति खराब है. हीरापुर हटिया व स्टील गेट के पास बने कांपैक्टर स्टेशन में शटर गिरा हुआ है. वहीं धनसार में कांपैक्टर स्टेशन खुला है लेकिन प्रोसेसिंग नहीं हो रही है.

कचरा निस्तारण व्यवस्था की रीढ़ हैं कांपैक्टर स्टेशन

नगर निगम के लिए कांपैक्टर स्टेशन कचरा निस्तारण व्यवस्था की रीढ़ है. घर-घर से संग्रहित कचरे को पहले इन स्टेशनों तक लाया जाता है, जहां उसे मशीनों के जरिए उसे कंप्रेस किया जाता है. अधिकारियों के अनुसार लगभग 10 टीपर कचरे को कंप्रेस कर एक ट्रक कचरे के बराबर बनाया जाता है. इसके बाद उसे डंपिंग यार्ड तक पहुंचाया जाता है.

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना के तहत शहर के विभिन्न इलाकों में हर पांच से सात

किलोमीटर की दूरी पर एक कांपैक्टर स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य था, लेकिन पिछले सात साल के दौरान अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी. कई जगह जमीन उपलब्ध नहीं हुई, जबकि कुछ जगहों पर स्थानीय स्तर पर विरोध व स्वामित्व विवाद के कारण निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हो पाया.

एनओसी के अभाव में अटकी है योजना

तेलीपाड़ा, भूली (वार्ड-16), कुस्तौर-1, लोयाबाद, नुनूडीह और मटकुरिया समेत कई प्रस्तावित स्थलों पर जमीन की एनओसी नहीं मिलने से काम शुरू नहीं हो सका. इनमें अधिकांश जमीन बीसीसीएल के अधीन हैं, जबकि कुछ राज्य सरकार की भूमि है.

यहां संचालित हो रहे कांपैक्टर स्टेशन

वर्तमान में हीरापुर हटिया, स्टील गेट, धनसार, बस स्टैंड, तेलीपाड़ा, टेलीफोन एक्सचेंज रोड, झरिया के तीन स्थानों, सिंदरी, कतरास तथा वार्ड संख्या-10 में कांपैक्टर स्टेशन संचालित हैं. इन्हीं के भरोसे पूरे शहर में कचरा प्रबंधन का काम चल रहा है. उप नगर आयुक्त प्रकाश कुमार ने कहा कि प्रत्येक पांच से सात किलोमीटर पर एक कांपेक्टर स्टेशन बनना है. जमीन की एनओसी और स्थानीय विवादों के कारण 18 स्थानों पर स्टेशन नहीं बन सके. शहर के कचरे को वैज्ञानिक तरीके से कंप्रेस कर डंपिंग यार्ड भेजने के लिए कांपेक्टर स्टेशन ही एकमात्र प्रभावी विकल्प है.

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