झारखंड की कोयला परियोजनाओं से 5 सालों में 6,584 परिवार प्रभावित, बीसीसीएल ने एक को भी नहीं दी नौकरी

सांकेतिक तस्वीर (ai generated image)
पिछले पांच वर्षों में झारखंड की कोयला परियोजनाओं से 6,584 परिवार प्रभावित हुए हैं. इनमें से कई परिवारों को विस्थापन का सामना करना पड़ा है. बीसीसीएल जैसी कंपनियों ने रोजगार देने में शून्य प्रदर्शन किया है.
Jharkhand Coal Project Rehabilitation : झारखंड में पिछले पांच वर्षों में कोयला परियोजनाओं से कोल इंडिया की तीन प्रमुख कंपनियों- सीसीएल, बीसीसीएल और इसीएल के अलावा एनटीपीसी की परियोजनाओं से कुल 6,584 परिवार प्रभावित हुए हैं. इनमें सीसीएल के 1326, इसीएल के 293, बीसीसीएल के 165 तथा एनटीपीसी की तीन परिचालन खदानों- पकरी- बरवाडीह, चट्टी-बरियातू और केरेडारी से 4,800 परिवार विस्थापित हुए. यह जानकारी सोमवार को सदन में कोयला राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने राज्यसभा सदस्य परिमल नथवानी के एक सवाल के लिखित उत्तर में दी. उन्होंने बताया कि कोल इंडिया की सहायक कंपनियों में सबसे अधिक 1326 परिवारों का पुनर्वास सीसीएल में हुआ. इसीएल में 293 और बीसीसीएल में 165 परिवारों का पुनर्वास हुआ. पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (आरएंडआर) के तहत सीसीएल ने 968 प्रभावितों को रोजगार दिया. इसके अलावा 63.89 करोड़ आरएंडआर लाभ और 202.54 करोड़ भूमि एवं परिसंपत्ति मुआवजा दिया गया. इसीएल ने 174 लोगों को रोजगार, 18.84 करोड़ आरएंडआर लाभ तथा 262.052 करोड़ मुआवजा दिया. वहीं बीसीसीएल ने किसी भी प्रभावित परिवार को रोजगार नहीं दिया, हालांकि 7.462 करोड़ आरएंडआर लाभ और 32.695 करोड़ भूमि एवं परिसंपत्ति मुआवजा प्रदान किया.
कोयला उत्पादक कंपनियों ने कितनों को दिया रोजगार
सीसीएल : 1,326 प्रभावित परिवारों में से 968 को (करीब 73%)
इसीएल : 293 प्रभावित परिवारों में से 174 को (करीब 59%)
बीसीसीएल : 165 प्रभावित परिवारों में एक को भी नहीं
एनटीपीएस ने 4,800 परिवारों के पुनर्वास का किया दावा
एनटीपीसी ने अपनी तीनों परिचालन कोयला परियोजनाओं से प्रभावित सभी 4,800 परिवारों का पुनर्वास पूरा करने का दावा किया है. इन परिवारों को 520.80 करोड़ रुपये का मुआवजा भी वितरित किया गया है. कोयला राज्य मंत्री ने बताया कि पुनर्वास से जुड़े मामलों की नियमित समीक्षा की जाती है. परियोजना प्रभावित परिवारों के साथ समय-समय पर बैठकें कर लंबित मामलों के समाधान और पुनर्वास उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रयास किया जाता है.
विस्थापन और पुनर्वास आज भी सबसे जटिल मुद्दा
झारखंड में कोयला खनन के विस्तार के साथ विस्थापन और पुनर्वास आज भी सबसे जटिल मुद्दों में शामिल है. खासकर बीसीसीएल और सीसीएल की कई परियोजनाएं वर्षों से भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, रोजगार और पुनर्वास से जुड़ेविवादों का सामना करती रही हैं. बीसीसीएल में यह चुनौती केवल नयी खदानों तक सीमित नहीं है. झरिया मास्टर प्लान के तहत भूमिगत आग और धंसान प्रभावित क्षेत्रों से हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने की प्रक्रिया वर्षों से जारी है.
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लेखक के बारे में
By प्रिया गुप्ता
प्रिया गुप्ता प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. फिलहाल वह झारखंड से जुड़ी खबरों पर काम करती हैं, जिनमें सरकारी योजनाएं, प्रमुख घटनाएं, सामाजिक मुद्दे और अन्य महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं. इससे पहले वह लाइफस्टाइल डेस्क पर फैशन, हेल्थ, रिलेशनशिप, पैरेंटिंग और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं. प्रिया ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से स्नातक और अमिटी यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री हासिल की है.
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