धनबाद : उद्घाटन के सात साल बाद भी बदहाल है वन स्टॉप सेंटर, महिला थाने में रखी जाती हैं पीड़िताएं

Published by : Kunal Kishore Updated At : 01 Jul 2024 9:27 PM

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सखी सेंटर के उद्घाटन के सात साल बाद भी संसाधन उपलब्ध कराने में अधिकारी उदासीन बने हुए हैं . रेडक्रॉस भवन में चल रहे सेंटर में आश्रय देने की जगह सिर्फ काउंसेलिंग कर मामला सलटाया जाता है.

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धनबाद, सत्या राज : घरेलू हिंसा, यौन शोषण, दहेज प्रताड़ना, प्रेम में धोखा, दुष्कर्म से संबंधित मामलों में पीड़िताओं को त्वरित राहत दिलान के लिए 26 मई 2017 में रेडक्राॅस भवन में वन स्टाॅप सेंटर सखी केंद्र का उद्घाटन हुआ. उद्घाटन के सात साल के बाद भी न तो सेंटर का अपना भवन है और न ही संसाधन. यहां स्वीकृत 11 पदों में मात्र चार पद पर बहाली हुई है. सात पद रिक्त हैं. यहां उपलब्ध कराया जाने वाला संसाधन फाइलों में दबकर रह गया है. इसी रेड क्राॅस भवन में चाइल्ड लाइन का कार्यालय भी है. जिस हॉल में पीड़िताओं के रहने के लिए बेड लगाये गये थे, वह चाइल्ड लाइन का कंप्यूटर रूम बन गया है. रसोई बंद पड़ी है. जिस रूम में बेड लगाया गया है, वहां तेजस्विनी परियोजना (परियोजना बंद हो जाने के बाद) का सामान रखा गया है.

न तो सफाई कर्मी हैं न ही नाइट गार्ड

वन स्टॉप सेंटर में न तो सफाईकर्मी हैं और न ही नाइट गार्ड. छह माह से बाथरूम की सफाई नहीं हुई है. कार्यालय भी गंदा रहता है. कभी-कभार यहां सेवा दे रहे कर्मी अपने स्तर से साफ-सफाई करवाते हैं. सेंटर में पेय जल की भी सुविधा नहीं है. इन वजहों से अगर किसी पीड़ितों को आश्रय की जरूरत होती है, तो उसे महिला थाना में रखा जाता है. इस सेंटर में सिर्फ काउंसेलिंग कर मामले सलटाये जाते हैं.सेंटर की को-ऑर्डिनेटर जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी साधना कुमार हैं. इनके साथ ही एएनएम लीला माजी, जुबैनाइल मेंबर पूनम कुमार, सोशल वर्कर नीता सिन्हा, एडवोकेट विद्योत्तमा बंसल यहां सेवा देते हैं.

क्या है प्रावधान

जो पीड़िता न्याय के लिये यहां आती हैं, जिनका कोई ठिकाना नहीं होता, परिवार का पता नहीं चलता हैं, उन्हें वन स्टॉप सेंटर में पांच दिन का आश्रय देने का प्रावधान है. जबतक पीड़िता केंद्र में रहेगी, जिला समाज कल्याण विभाग द्वारा उन्हें सुरक्षा के साथ खाना व अन्य जरूरतों को पूरा किया जाता है. पांच दिनों के अंदर पीड़िता के परिवार का पता लगाया जाता है. जब पीड़िता के परिवारवाले साथ नहीं ले जाना चाहते या समझौता नहीं हो पाता है, तो उसे हजारीबाग स्वाधार उज्जवला होम भेज दिया जाता है.

स्वीकृत पद

प्रशासक – 1, केस वर्कर – 2 , काउंसेलर – 1, ऑफिस सहायक – 1, मल्टी पर्पस हेल्पर – 3, सिक्यूरिटी गार्ड – 3. इनमें मात्र दो मल्टी पर्पस वर्कर व दो गार्ड की नियुक्ति हुई हैं. उन्हें भी छह माह से मानदेय नहीं दिया गया है.

क्या कहा अधिकारियों

वन स्टाॅप सेंटर के भवन का निर्माण जल्द होगा. अगले सप्ताह तक एलॉटमेंट आने वाला है. उसके बाद सेंटर में जरूरत के संसाधन उपलब्ध कराये जायेंगे. स्वीकृत पद पर जल्द बहाली होगी. इससे संबंधित फाइलों को जल्द निबटाया जायेगा.
अनिता कुजूर, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी

वन स्टाॅप सेंटर सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक सामान के लिए फंड की स्वीकृति उपायुक्त से मिल गयी है. सेंटर में एक सप्ताह के अंदर सामान उपलब्ध करा दिया जायेगा. हमारा उद्देश्य है पीड़िताओं को न्याय दिलाना.

साधना कुमार, को-ऑर्डिनेटर, वन स्टॉप सेंटर

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लेखक के बारे में

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कुणाल ने IIMC , नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा की डिग्री ली है. फिलहाल, वह प्रभात खबर में झारखंड डेस्क पर कार्यरत हैं, जहां वे बतौर कॉपी राइटर अपने पत्रकारीय कौशल को धार दे रहे हैं. उनकी रुचि विदेश मामलों, अंतरराष्ट्रीय संबंध, खेल और राष्ट्रीय राजनीति में है. कुणाल को घूमने-फिरने के साथ पढ़ना-लिखना काफी पसंद है.

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