Dhanbad News: फूड सेफ्टी लाइसेंस के नाम पर धनबाद में फर्जीवाड़ा का खुलासा
Published by : ANAND KUMAR UPADHYAY Updated At : 07 Jun 2026 1:23 AM
Dhanbad News: कोर्ट मोड़ में एफएसएसएआइ का फर्जी कार्यालय का भंडाफोड़, शिकायत का सत्यापन करने के बाद फूड सेफ्टी अधिकारी ने डीसी,एसएसपी को भेजा पत्र.
विक्की प्रसाद, धनबाद, शहर के रणधीर वर्मा चौक (कोर्ट मोड़) स्थित एक दुकान में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) के नाम पर फर्जी तरीके से समानांतर कार्यालय संचालित किए जाने का मामला सामने आया है. आरोप है कि इस कार्यालय के माध्यम से खाद्य दुकानदारों, होटल संचालकों और अन्य खाद्य व्यवसायियों से फूड सेफ्टी लाइसेंस उपलब्ध कराने के नाम पर 7,860 रुपये तक वसूले जा रहे हैं. जबकि विभागीय प्रक्रिया के तहत फूड लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन शुल्क मात्र 100 रुपये है. मामले की जानकारी मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी राजा कुमार ने उपायुक्त आदित्य रंजन और एसएसपी प्रभात कुमार को लिखित शिकायत करते हुए दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है.
मनोज नामक व्यक्ति द्वारा कार्यालय संचालन की बात आयी सामने
खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी राजा कुमार ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद प्रारंभिक जांच करायी गयी. जांच में यह तथ्य सामने आया कि कोर्ट मोड़ में एक दुकान में यह काम हो रहा है. जहां एफएसएसएआइ लाइसेंस बनवाने के नाम पर लोगों से निर्धारित शुल्क से कई गुना अधिक राशि ली जा रही है. जांच के दौरान यह भी जानकारी मिली कि उक्त कार्यालय का संचालन मनोज नामक व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है. विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह कार्यालय अधिकृत नहीं है और न ही इसे एफएसएसएआइ अथवा जिला प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की मान्यता प्राप्त है. ऐसे में लोगों को गुमराह कर अवैध रूप से धन वसूली किए जाने की आशंका है.
व्यापारियों से सतर्क रहने की अपील, कानूनी कार्रवाई की तैयारी
खाद्य सुरक्षा विभाग ने खाद्य व्यवसायियों, होटल संचालकों, रेस्टोरेंट मालिकों और दुकानदारों से अपील की है कि वे फूड लाइसेंस बनवाने के लिए केवल अधिकृत सरकारी पोर्टल अथवा जिला खाद्य सुरक्षा कार्यालय से ही संपर्क करें. किसी निजी कार्यालय या एजेंट के झांसे में आकर अनावश्यक राशि का भुगतान न करें. विभाग ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंस के लिए निर्धारित सरकारी शुल्क ही मान्य है और किसी भी अतिरिक्त वसूली की शिकायत तत्काल विभाग को दी जानी चाहिए.
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