उद्यान विभाग में कई लाभकारी योजनाएं, मुफ्त में ले प्रशिक्षण

Updated at : 06 Jul 2024 1:21 AM (IST)
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उद्यान विभाग में कई लाभकारी योजनाएं, मुफ्त में ले प्रशिक्षण

खेती, किसानी से जुड़े लोगों के लिए जिला उद्यान विभाग कई फायदेमंद योजनाएं चला रहा है. किसान इसका फायदा उठा सकते हैं. इसके तहत किसानों को मुफ्त में प्रशिक्षण के अलावा अनुदान पर बीज उपलब्ध करायें जायेंगे.

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शोभित रंजन, धनबाद. खेती, किसानी से जुड़े लोगों के लिए अच्छी खबर है. उनके लिए जिला उद्यान विभाग कई फायदेमंद योजनाएं चला रहा है. किसान इसका फायदा उठा सकते हैं. झारखंड सरकार की ओर से राज्य सरकारी मिशन गैर कार्यान्वित जिला योजना के अंतर्गत कई लाभकारी योजनाएं चलायी जा रही हैं. इसके तहत किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर बीज भी दिये जायेंगे.

सात जिलों में चल रही योजनाएं :

गैर कार्यान्वित जिला योजना अभी झारखंड से सात जिलों में चल रही हैं. इनमें धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, कोडरमा, साहेबगंज, गोड्डा आदि शामिल हैं. ये योजनाएं 2016-17 से चल रही हैं, जो हर वर्ष रिन्यू होती है. इसके तहत किसानों को फलदार पौधे दिए जाते हैं. जिन किसानों के पास एक एकड़ जमीन के साथ पानी की सुविधा होती है उन्हें आम,अमरूद, नींबू, लीची, सपोत, बैर, आंवला में बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर दिए जाते है. वहीं छोटी नर्सरी की स्थापना के लिए उन किसानों को 50 प्रतिशत का अनुदान मिलेगा, जिनके पास एक हेक्टेयर जमीन के साथ पानी की सुविधा होगी. नये बाग के विस्तार के लिए किसानों के पास एक एकड़ या कम से कम 50 डिसमिल से अधिक जमीन होनी चाहिए. ऐसे किसानों को स्ट्रॉबेरी, केला, अनानस, ड्रैगन फ्रूट, पपीता के बीज पर 40 प्रतिशत अनुदान दिये जायेंगे. स्ट्रॉबेरी की खेती में प्रति हेक्टेयर 2.80 लाख, केला तीन लाख प्रति हेक्टेयर, अनानस तीन लाख प्रति हेक्टर, ड्रैगन फ्रूट चार लाख प्रति हेक्टेयर व पपीता के लिए दो लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की लागत लगती है. किसानों को सब्जी, मसाला, सुगंधी पादप आदि की बीजें भी मुफ्त में दी जाएंगी. इसके अलावा एंटीबर्ड जाली, उद्यानिक संरचना, टूबलर हाउस आदि भी मुफ्त में दिये जायेंगे.

राज्य या राज्य से बाहर मिलेगा मुफ्त प्रशिक्षण :

जिला उद्यान पदाधिकारी ने बताया कि मानव संसाधन विकास के तहत जिन किसानों को राज्य या राज्य से बाहर उद्यानीक ट्रैनिंग की जरूरत होगी या वे ट्रेनिंग लेना चाहेंगे तो वे 20 जुलाई तक उद्यान विभाग में अप्लाई कर सकते हैं. इनमें माली का प्रशिक्षण, ओल की खेती, सब्जी, फल, मशरूम उत्पाद, पपीता की खेती, मधुमक्खी पालन आदि शामिल हैं. योजना के लिए किसानों के चयन में प्रगतिशील किसान, महिला स्वयं सहायता समूह व सिचाई सुविधा युक्त किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी. गत वर्ष 700 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया था.

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