ePaper

गुरुजी के इर्द-गिर्द घूमता रहा झामुमो स्थापना दिवस, आधी आबादी बनी ताकत

Updated at : 05 Feb 2026 9:58 AM (IST)
विज्ञापन
Shibu Soren

झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक दिशोम गुरु पद्मश्री शिबू सोरेन.

JMM Foundation Day: धनबाद में झामुमो का स्थापना दिवस गुरुजी शिबू सोरेन की विरासत के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा. बड़ी संख्या में महिलाओं की मौजूदगी ने नया सियासी संदेश दिया. झामुमो अब ग्रामीण के साथ शहरी विस्तार और कोयला मजदूरों की राजनीति पर फोकस बढ़ा रही है. नीचे पूरी खबर पढ़ें.

विज्ञापन

धनबाद से नीरज अंबष्ट की रिपोर्ट

JMM Foundation Day: दिशोम गुरु शिबू सोरेन के बिना धनबाद में आयोजित झामुमो का पहला स्थापना दिवस समारोह पूरी तरह उनके विचार, संघर्ष और विरासत के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा. गोल्फ ग्राउंड में आयोजित इस कार्यक्रम में झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट संकेत दिया कि पार्टी का भविष्य, विस्तार और संघर्ष की दिशा गुरुजी की नीतियों से ही तय होगी.

गुरुजी की अनुपस्थिति में भी मौजूद रही उनकी छाया

यह पहला मौका था, जब झामुमो का स्थापना दिवस समारोह गुरुजी शिबू सोरेन की शारीरिक उपस्थिति के बिना मनाया गया. मंच पर गुरुजी के लिए अलग से कुर्सी लगाई गई थी, जिस पर उनकी तस्वीर रखी गई थी. पूरा पंडाल गुरुजी के नारों और उनकी विचारधारा से गूंजता रहा. हर वक्ता ने अपने संबोधन की शुरुआत और अंत गुरुजी के संघर्षों के जिक्र से किया.

भीड़ ने दिया नेतृत्व को नया आत्मविश्वास

बुधवार को गोल्फ मैदान में उमड़ी भारी भीड़ ने पार्टी नेतृत्व को नया संबल दिया. आयोजन स्थल सुबह से ही भरने लगा था. दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक पहुंचे. कार्यक्रम के अंत तक भीड़ का डटे रहना यह संकेत दे गया कि झामुमो की जनाधार राजनीति अब भी मजबूत है.

आधी आबादी बनी झामुमो की नई ताकत

इस स्थापना दिवस समारोह की सबसे बड़ी खासियत महिलाओं की बड़ी भागीदारी रही. महिलाएं और युवतियां कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही गोल्फ ग्राउंड पहुंचने लगी थीं. मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल से निकलने के बाद तक महिलाएं डटी रहीं. यह दृश्य पार्टी की रणनीति में हो रहे बदलाव की ओर इशारा करता है. झामुमो अब आधी आबादी के बीच अपनी पैठ मजबूत कर ग्रामीण के साथ-साथ शहरी मतदाता वर्ग को साधने की कोशिश में है.

शहरी विस्तार की बुनियाद धनबाद से

धनबाद जैसे शहरी और औद्योगिक जिले में इस तरह का शक्ति प्रदर्शन झामुमो के शहरी विस्तार की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. अब तक झामुमो की पहचान ग्रामीण और आदिवासी इलाकों तक सीमित मानी जाती रही है. लेकिन इस कार्यक्रम ने यह संकेत दे दिया कि पार्टी अब शहरों में भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करना चाहती है.

कोयला मजदूरों पर फोकस, नई राजनीति की आहट

झामुमो अब जल, जंगल और जमीन के पारंपरिक मुद्दों के साथ-साथ कोलियरी मजदूरों की समस्याओं पर भी फोकस करेगी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आउटसोर्सिंग कंपनियों में 75 प्रतिशत स्थानीय नियोजन का मुद्दा उठाकर साफ संकेत दिया कि पार्टी आने वाले समय में कोयला मजदूरों की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाना चाहती है.

असंगठित मजदूर बनेगा बड़ा वोट बैंक

कोयलांचल में असंगठित मजदूरों की संख्या काफी बड़ी है. अब तक इस वर्ग को साधने में भाजपा और कांग्रेस की भूमिका प्रमुख रही है. लेकिन अब झामुमो भी इस वर्ग में गहरी पैठ बनाने की तैयारी में है. सीएम द्वारा असंगठित मजदूरों को न्याय दिलाने की बात ने स्थानीय झामुमो नेतृत्व में उत्साह भर दिया है.

गुरुजी के मार्ग पर ही आगे की राजनीति

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि पार्टी का हर आंदोलन, हर संघर्ष और हर विस्तार गुरुजी के बताए मार्ग पर ही होगा. झामुमो झारखंड की राजनीति के साथ-साथ राज्य के बाहर भी अपनी वैचारिक पहचान मजबूत करेगी. गुरुजी की विचारधारा ही पार्टी की सबसे बड़ी पूंजी है.

इसे भी पढ़ें: धनबाद में आउटसोर्सिंग कंपनियों पर बरसे हेमंत सोरेन, 75% लोकल की नौकरी जरूरी

स्थापना दिवस से मिला सियासी संदेश

धनबाद का यह स्थापना दिवस समारोह केवल आयोजन नहीं, बल्कि झामुमो की आने वाली राजनीतिक रणनीति का संकेत था. महिलाओं, मजदूरों और शहरी मतदाताओं पर बढ़ता फोकस बताता है कि पार्टी खुद को नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के साथ ढालने की कोशिश में है. गुरुजी की विरासत को आधार बनाकर झामुमो अब नए विस्तार की राह पर आगे बढ़ने को तैयार दिख रही है.

इसे भी पढ़ें: गुरुजी का विजन और बढ़ता जनाधार झामुमो की असली ताकत, 1973 में मनाया गया था पहला स्थापना दिवस

विज्ञापन
KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola