दून एक्सप्रेस से 16 पीस कछुआ बरामद, वन विभाग को सौंपा गया

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 16 Feb 2026 1:40 PM

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बरामद कछुओं के साथ आरपीएफ और सीआईबी की टीम.

Dhanbad News: धनबाद रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ और सीआईबी ने दून एक्सप्रेस के जनरल कोच से 16 कछुए बरामद किए. लावारिस थैले में मिले कछुओं को तस्करी की आशंका के बीच वन विभाग को सौंप दिया गया. मामले की जांच जारी है और सुरक्षा बढ़ाई गई है. नीचे पूरी खबर पढ़ें.

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Dhanbad News: धनबाद रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ और सीआईबी की टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दून एक्सप्रेस से 16 पीस कछुआ बरामद किया. यह कार्रवाई शनिवार देर रात गश्त और निगरानी के दौरान की गई. टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि ट्रेन के जरिए कछुओं की तस्करी की जा रही है.

प्लेटफॉर्म संख्या दो पर हुई जांच

सूचना के आधार पर योग नगरी ऋषिकेश-हावड़ा दून एक्सप्रेस (संख्या 13010) के धनबाद पहुंचने पर प्लेटफॉर्म संख्या दो पर सघन जांच अभियान चलाया गया. ट्रेन के जनरल कोच की तलाशी के दौरान अधिकारियों को एक नीले रंग का कपड़े का थैला लावारिस हालत में मिला. संदेह होने पर जब थैले की जांच की गई तो उसके अंदर 16 कछुए पाए गए.

तस्करी की आशंका

प्राथमिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि कछुओं को अवैध रूप से तस्करी के लिए ले जाया जा रहा था. हालांकि मौके पर किसी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान नहीं हो सकी. बरामद थैला लावारिस अवस्था में मिलने के कारण तस्कर का पता नहीं चल पाया है.

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वन विभाग को सौंपे गए कछुए

आरपीएफ ने आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद सभी 16 कछुओं को वन विभाग को सौंप दिया. वन विभाग की टीम अब कछुओं की प्रजाति और उनकी स्थिति की जांच करेगी. साथ ही पूरे मामले की आगे की जांच की जाएगी. रेलवे परिसर में इस कार्रवाई के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है. अधिकारियों ने कहा कि वन्यजीव तस्करी के खिलाफ आगे भी अभियान जारी रहेगा और दोषियों की पहचान के लिए जांच तेज की जाएगी.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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