देवघर के बैद्यनाथ मंदिर में देर रात की गई चतुष्प्रहरी पूजा, बाबा को सिंदूर किया गया दान

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देवघर के मंदिर में बाबा को दूल्हा बनाकर सिंदूर दान किया गया (बाएं ऊपर)., सिंदूर दान से पहले चतुष्प्रहरी पूजा करते मुख्य पूजारी (दाहिने ऊपर), चतुष्प्रहरी पूजा के बाद बाबा मंदिर में निकली पारंपरिक बारात (बाएं नीचे) और बाबा की बारात में ढोल-नगाड़ों के साथ नृत्य करते श्रद्धालु (दाहिने नीचे). फोटो: प्रभात खबर

Mahashivratri Deoghar: महाशिवरात्रि पर देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर में रविवार की देर रात चतुष्प्रहर पूजा संपन्न हुई. शिव-पार्वती विवाह की परंपरा निभाते हुए बाबा को दूल्हा रूप में सजाया गया और सिंदूर दान किया गया. तांत्रिक विधि से चार प्रहर पूजा के बाद बाबा के आराम के लिए सोमवार सुबह छह बजे मंदिर का पट बंद कर दिया गया. नीचे पूरी खबर पढ़ें.

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देवघर से संजीव मिश्रा की रिपोर्ट

Mahashivratri Deoghar: महाशिवरात्रि के अवसर पर द्वादश ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ मंदिर में रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात करीब डेढ़ बजे शिव-पार्वती विवाह पूरे विधि विधान से कराया गया. खास परंपरा के तहत बाबा मंदिर के गर्भगृह में देर रात तक विशेष चतुष्प्रहर पूजा की गयी. इस पूजा में बाबा भोले दुल्हा बने तथा विग्रह पर सिंदूर अर्पित कर बाबा का विवाह संपन्न किया गया. सरदार पंडा श्रीश्री गुलाबनंद ओझा ने बेलपत्र से शिवलिंग के विग्रह पर सिंदूर अर्पित किये. इस दिन शाम में होनेवाली बाबा भोलेनाथ की श्रृंगार पूजा नहीं हुई.

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रात 10 बजे बंद हो गया बाबा का पट

रात करीब पौने दस बजे मंदिर की सफाई के बाद पट बंद कर दिया गया. इसके बाद परंपरा के अनुसार बाबा भोलेनाथ की विशेष पूजा से पहले रात करीब 10 बजे पारंपरिक बारात निकाली गयी. इसके साथ निकास द्वार से पुजारी, आचार्य तथा परंपरा से जुड़े लोग पूजा सामग्री के साथ बाबा मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश किये. उपचारक भक्तिनाथ फलाहारी की अगुवाई में आचार्य गुलाब पंडित ने पुजारी के तौर पर सरदार पंडा श्रीश्री गुलाबनंद ओझा को चतुष्प्रहर पूजा करायी.

सरदार पंडा ने की पूजा

रात के करीब सवा दस बजे से लेकर सुबह साढ़े तीन बजे तक बाबा बैद्यनाथ की तांत्रिक विधि से चतुष्ग्रहर पूजा की गयी. ये ये पूजा पूजा आचार्य गुलाब पंडित व पुजारी के तौर पर स्वयं मंदिर महंत सरदार पंडा श्रीश्री गुलाब नंद ओझा थे. सबसे पहले सरदार पंडा ने रात में होनेवाली चतुष्ग्रहर पूजा का संकल्प लिया. उसके बाद बाबा को सबसे पहले गंगाजल से स्नान कराया गया तथा पूजा प्रारंभ की गयी.

बाबा की ऐसे की गई चतुष्प्रहरी पूजा

इस दौरान बाबा को गुलाब जल, दूध, दही, घी, शक्कर, मधू आदि से स्नान कराने के बाद बाबा को मलमल के कपड़े से अच्छी तरह से पोछा गया. उसके बाद बाबा को सुगंधित इत्र आदि लगाने के बाद वस्त्र अर्पित कर उनके ऊपर चावल, धतूरा, बेल, श्रीफल आदि चढ़ाये गये.

पूजा के बाद बाबा को सिंदूर दान

इसके बाद दूल्हे के लिए बनायी गयी खास माला चढ़ाने के बाद विग्रह पर माता पार्वती के लिए वस्त्र और शृंगार सामग्री चढ़ायी गयी. साथ ही बेलपत्र से विग्रह पर सिंदूर अर्पित कर पहले प्रहर की पूजा समाप्त की गयी. इस तरह बाबा की चार बार पूजा की गयी. पूजा संपन्न होने के बाद आम भक्तों के लिए जलार्पण शुरू कराने की परंपरा शुरू हो जायेगी.

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सुबह छह बजे बाबा के आराम के लिए पट किया बंद

वहीं, सोमवार को दो सुबह छह बजे के करीब बाबा को विश्राम देने के उद्देश्य से कुछ देर के लिए पट बंद किया गया. इसके बाद पट खुलेगा तथा हर दिन की तरह कांचा जल पूजा और सरदारी पूजा के बाद जलार्पण प्रारंभ करा दिया जायेगा.

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