Dhanbad News : उपभोक्ता आयोग ने दो मामलों में बीमा कंपनियों को दिया 13 लाख रुपये भुगतान का आदेश
Published by : NARENDRA KUMAR SINGH Updated At : 05 Apr 2025 1:42 AM
निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करते हैं, तो उन्हें 10% वार्षिक ब्याज की दर से उपरोक्त मूल राशि का भुगतान करना होगा.
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग धनबाद के अध्यक्ष ललित प्रकाश चौबे व सदस्य शिप्रा की खंडपीठ ने संयुक्त रूप से आदेश पारित कर बीमा कंपनी को भुगतान का आदेश दिया है. कहा गया है कि बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी हेल्थ वर्टिकल रांची, ब्रांच मैनेजर रांची व बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी बजाज हाउस एयरपोर्ट रोड येरावाडा महाराष्ट्र दो माह के अंदर परिवादी लाल बाजार गोविंदपुरी निवासी गौतम कुमार चौरसिया को 8 लाख 61 हजार 33 रुपए का भुगतान कर दें. निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करते हैं, तो उन्हें 10% वार्षिक ब्याज की दर से उपरोक्त मूल राशि का भुगतान करना होगा. आयोग ने परिवादी को वाद खर्च के रूप में 25 हजार रुपये का भी भुगतान करने का आदेश दिया है.
क्या है मामला :
परिवादी ने आठ सितंबर 2021 को 10 लाख रुपये का फैमिली हेल्थ पॉलिसी खरीदा था. इसकी बीमा अवधि 25.8.2021से 24.8.2022 तक थी. परिवादी ने अपना प्रीमियम 25,815 रुपए जमा किया था. उसकी पत्नी की तबीयत खराब हो गयी. वह बीमा कंपनी के पास इलाज में खर्च की राशि का भुगतान के लिए दावा किया. इसे बीमा कंपनी ने खारिज कर दिया. तब परिवादी ने 20 सितंबर 2023 को उपभोक्ता आयोग में वाद दायर कर न्याय की गुहार लगायी थी.बीमा कंपनी ने क्लेम रिजेक्ट किया
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने आदेश पारित कर मैनेजर नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बीपी अग्रवाल बिल्डिंग धनसार (धनबाद) व ग्रीवेंस रिड्रेसल ऑफिसर विक्रम भवानी सिंह रीजनल ऑफिस जिला परिषद मार्केटिंग कॉम्प्लेक्स रांची को आदेश दिया कि वह परिवादी कुसुम विहार निवासी साकेत कुमार सिन्हा को आदेश पारित की तिथि से दो माह के अंदर चार लाख 70 हजार 932 रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया है. आयोग ने मानसिक पीड़ा व वाद खर्च के रूप में 30 हजार रुपये मुआवजा का भुगतान करने का आदेश दिया है. परिवादी ने पांच लाख रुपए का बीमा नेशनल परिवार मेडी क्लेम पॉलिसी नेशनल इंश्योरेंस कंपनी धनसार (धनबाद) से कराया था. इसकी वैधता 21.8.2022 से 20.8.2023 तक थी. परिवादी वर्ष 2018 से ही पॉलिसी होल्डर था. उसकी तबीयत बिगड़ी और उसे डॉक्टर एके झा की रिपोर्ट पर इलाज के लिए टाटा मेमोरियल सेंटर मुंबई में भर्ती कराया गया. इलाज के बाद उसने अपना बिल बीमा कंपनी को भुगतान करने के लिए दिया. लेकिन बीमा कंपनी ने उसके क्लेम को रिजेक्ट कर दिया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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