परम एकादशी पर करें इस पावन व्रत कथा का पाठ, भगवान विष्णु करेंगे हर मनोकामना पूरी
Published by : Neha Kumari Updated At : 10 Jun 2026 9:55 AM
व्रत कथा का पाठ करते और सुनते हुए श्रद्धालुओं की सांकेतिक तस्वीर (एआई)
Parama Ekadashi 2026: परम एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करते समय इस पावन व्रत से जुड़ी कथा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि कथा का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है और भगवान विष्णु प्रसन्न होकर भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं.
Parama Ekadashi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी व्रत रखा जाता है. लेकिन जब बात परम एकादशी की आती है, तो इसका महत्व अन्य सभी एकादशियों की तुलना में कई गुना अधिक माना जाता है, क्योंकि यह पुरुषोत्तम मास में पड़ती है. पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय माना गया है और वे स्वयं इसके अधिष्ठाता देव हैं. यह विशेष मास लगभग हर तीन वर्ष में एक बार आता है. धार्मिक मान्यता है कि परम एकादशी का व्रत करने से दरिद्रता दूर होती है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है.
परमा एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में काम्पिल्य नामक एक नगरी थी. वहां सुमेधा नाम के एक ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ रहते थे. दोनों का स्वभाव अत्यंत शांत, धार्मिक और परोपकारी था. किंतु पूर्व जन्म के कर्मों के प्रभाव के कारण उन्हें इस जन्म में अत्यधिक गरीबी का सामना करना पड़ रहा था. उनकी स्थिति इतनी दयनीय थी कि कई बार भिक्षा न मिलने के कारण दोनों पति-पत्नी को कई-कई दिनों तक भूखे पेट ही सोना पड़ता था.
ब्राह्मण ने बनाया परदेस जाने का मन
एक दिन गरीबी से परेशान होकर सुमेधा ने अपनी पत्नी से कहा, “प्रिय! बिना धन के जीवन-यापन करना दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है. समाज में भी निर्धनों की सहायता करने वाला कोई नहीं है. यदि तुम अनुमति दो, तो मैं धन कमाने के लिए परदेस चला जाऊं.”
पति की बात सुनकर उनकी विदुषी पत्नी ने कहा, “हे स्वामी! इस संसार में भाग्य में जो लिखा होता है, वह कहीं भी जाने पर प्राप्त हो ही जाता है. विधाता ने जिसके लिए जितना अन्न निर्धारित किया है, उसे वह अवश्य मिलता है. मैं आपके बिना नहीं रह सकती. वैसे भी पति के बिना स्त्री का समाज में सम्मान कम हो जाता है. इसलिए मेरा निवेदन है कि आप यहीं रहें. जो प्रभु की इच्छा होगी, वही होगा.” पत्नी की बात मानकर सुमेधा ने परदेस जाने का विचार त्याग दिया.
कौण्डिन्य ऋषि का आगमन
कुछ समय बाद उनके घर परम ज्ञानी कौण्डिन्य ऋषि पधारे. ब्राह्मण दंपती ने अपनी तंगहाली के बावजूद ऋषि का पूरे आदर-सत्कार के साथ स्वागत किया और जो भी रूखा-सूखा भोजन उपलब्ध था, उसे श्रद्धापूर्वक उन्हें अर्पित किया.
ऋषि की सेवा के बाद ब्राह्मण की पत्नी ने हाथ जोड़कर विनम्रता से कहा, “हे ऋषिवर! कृपया हमारी स्थिति पर दया कीजिए. मैंने अपने पति को परदेस जाने से तो रोक लिया, लेकिन हमारी गरीबी दूर होने का नाम नहीं ले रही है. कृपा करके हमें ऐसा कोई उपाय बताइए, जिससे हमारा यह दुख दूर हो सके.”
ऋषि कौण्डिन्य का सुझाव
ऋषि कौण्डिन्य ने उनकी बात सुनकर कहा, “अधिक मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली परमा एकादशी का व्रत समस्त दुखों का नाश करने वाला है. यह व्रत मनुष्य के पूर्व जन्म के पापों को नष्ट कर उसे धन-धान्य से संपन्न बनाता है. धन के देवता कुबेर ने भी इस व्रत का पालन करके भगवान शिव को प्रसन्न किया था और धनाध्यक्ष का पद प्राप्त किया था. इसी प्रकार सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने भी इस व्रत के प्रभाव से अपना खोया हुआ राज्य और परिवार पुनः प्राप्त किया था.”
ऋषि ने बताई पंचरात्रि व्रत की महिमा
ऋषि ने आगे कहा, “परमा एकादशी से आरंभ करके पांच दिनों तक पंचरात्रि व्रत करना चाहिए. इन पांच दिनों में अपनी सामर्थ्य के अनुसार निर्जल रहकर अथवा एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करके भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए. इस अवधि में ब्रह्मचर्य का पालन करें तथा ब्राह्मणों को भोजन कराकर तिल, घी और अन्य वस्तुओं का दान करें. यदि तुम दोनों श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन करोगे, तो तुम्हारी दरिद्रता अवश्य दूर हो जाएगी.”
व्रत का फल
ऋषि के आदेशानुसार ब्राह्मण दंपती ने पूर्ण श्रद्धा और नियमपूर्वक पांच दिनों तक पंचरात्रि व्रत किया. व्रत के समापन के बाद उनके घर एक राजकुमार आया. ब्रह्माजी की प्रेरणा से उसने उस निर्धन दंपती को एक सुंदर, सुख-सुविधाओं से युक्त घर तथा रहने के लिए पूरा एक गांव दान में दे दिया. इस प्रकार परमा एकादशी व्रत के पुण्य प्रभाव से ब्राह्मण दंपती की गरीबी सदा के लिए समाप्त हो गई. उन्होंने पृथ्वी पर सुखपूर्वक जीवन व्यतीत किया और अंत में भगवान विष्णु के परम धाम वैकुण्ठ लोक को प्राप्त हुए.
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नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें लेखन के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. पिछले छह महीनों से वे राशिफल और धर्म से जुड़ी खबरों पर काम कर रही हैं. उनका मुख्य कार्य व्रत-त्योहारों, पौराणिक कथाओं और भारतीय रीति-रिवाजों से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. नेहा का हमेशा यह प्रयास रहता है कि वे कठिन से कठिन विषय को भी इतना आसान और रोचक बना दें कि हर कोई उसे सहजता से पढ़ और समझ सके. उनका मानना है कि यदि धर्म और संस्कृति से जुड़ी जानकारी सरल शब्दों में मिले, तो लोग अपनी परंपराओं से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं. डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने प्रभात खबर में ही ‘नेशनल’ और ‘वर्ल्ड’ डेस्क पर छह महीने की इंटर्नशिप के साथ की थी. इस दौरान उन्होंने रियल-टाइम खबरों पर काम करना, तेजी और सटीकता के साथ कंटेंट लिखना, ट्रेंडिंग विषयों की पहचान करना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उनकी न्यूज़ सेंस, लेखन क्षमता और खबरों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की समझ को और अधिक मजबूत बनाया.
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