सुबह उठते ही हथेलियों के दर्शन क्यों किए जाते हैं? जानें धार्मिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व

Published by : Shaurya Punj Updated At : 10 Jun 2026 10:30 AM

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हथेली दर्शन के आध्यात्मिक महत्व

Morning Rituals: सुबह उठकर हथेलियों के दर्शन करने की परंपरा धन, ज्ञान और ईश्वर कृपा के स्मरण से जुड़ी मानी जाती है. जानें इसका धार्मिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक महत्व.

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Morning Rituals: हिंदू धर्म और सनातन परंपरा में दिन की शुरुआत शुभ विचारों और ईश्वर स्मरण से करने की परंपरा रही है. इसी क्रम में प्रातःकाल जागने के बाद सबसे पहले अपनी हथेलियों के दर्शन करने का विधान बताया गया है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, यह केवल एक परंपरा नहीं बल्कि सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और ईश्वर कृपा की भावना से जुड़ा अभ्यास है.

करदर्शन के समय बोले जाने वाला मंत्र

शास्त्रों में सुबह उठते ही निम्न श्लोक का स्मरण करने का उल्लेख मिलता है—

“कराग्रे वसते लक्ष्मीः, करमध्ये सरस्वती।
करमूले तु गोविंदः, प्रभाते करदर्शनम्॥”

इस श्लोक का अर्थ है कि हथेली के अग्रभाग में माता लक्ष्मी, मध्य भाग में माता सरस्वती और मूल भाग में भगवान गोविंद का निवास माना गया है. इसलिए प्रभातकाल में हथेलियों का दर्शन कर धन, विद्या और ईश्वर कृपा का स्मरण किया जाता है.

धार्मिक दृष्टि से क्या है इसका संदेश?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह श्लोक जीवन के तीन महत्वपूर्ण आधारों—समृद्धि, ज्ञान और आध्यात्मिक शक्ति—का प्रतीक है. माता लक्ष्मी धन और वैभव, माता सरस्वती ज्ञान और विवेक तथा भगवान विष्णु संरक्षण, सद्गुण और जीवन के संतुलन का प्रतिनिधित्व करते हैं.

करदर्शन का उद्देश्य व्यक्ति को यह स्मरण कराना है कि जीवन में सफलता के लिए परिश्रम, ज्ञान और ईश्वर में आस्था तीनों आवश्यक हैं.

क्या इसके पीछे कोई व्यावहारिक कारण भी है?

कुछ विद्वानों के अनुसार, सुबह जागने के तुरंत बाद आंखें पूरी तरह सक्रिय नहीं होतीं. ऐसे में दूर की रोशनी या वस्तुओं को देखने की बजाय अपनी हथेलियों पर दृष्टि केंद्रित करने से आंखों को धीरे-धीरे फोकस करने का अवसर मिलता है.

हालांकि इस विचार के वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन इसे एक व्यावहारिक और सहज परंपरा के रूप में देखा जाता है.

हथेलियों के दर्शन से मिलने वाली प्रेरणा

महर्षि वेदव्यास सहित अनेक आचार्यों ने हाथों को कर्म और पुरुषार्थ का प्रतीक माना है. हथेलियों का दर्शन व्यक्ति को यह संदेश देता है कि सफलता और उन्नति के लिए स्वयं के कर्म, प्रयास और ईश्वर कृपा पर विश्वास रखना चाहिए. यह परंपरा सकारात्मक सोच, आत्मनिर्भरता और सात्विक जीवनशैली की प्रेरणा भी देती है.

प्रातःकाल हथेलियों के दर्शन की परंपरा धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक चिंतन और सकारात्मक जीवन दृष्टि का सुंदर संगम है. यह व्यक्ति को दिन की शुरुआत कृतज्ञता, आत्मविश्वास और शुभ संकल्पों के साथ करने की प्रेरणा देती है.

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By Shaurya Punj

शौर्य पुंज विशेष रूप से दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों एवं लेखों पर फोकस कर रहे हैं. वो डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. पाठकों की रुचि और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वे सरल, सहज और तथ्यपूर्ण धार्मिक एवं ज्योतिषीय कंटेंट तैयार करते हैं. डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ शौर्य खबरों की नब्ज को समझने और जटिल विषयों को आसान भाषा में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांस लेखन से की थी. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में कार्य करने का अवसर मिला और अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम शुरू किया. यहां उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट और मनोरंजन जगत की प्रमुख खबरों पर लेखन किया. साल 2020 के दौरान उन्होंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एजुकेशन और अन्य नॉन-न्यूज कैटेगरी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. Health & Fitness, Beauty & Fashion, Relationship & Family, Food & Recipes, Travel, Astrology & Vastu, Career & Motivation, Festival & Culture जैसे विषयों पर उन्होंने सैकड़ों उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख तैयार किए. शिक्षा शौर्य पुंज का जन्म रांची, झारखंड में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की. पत्रकारिता की उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें समाचार लेखन के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के आधार पर तथ्यपूर्ण, संतुलित और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में सक्षम बनाती है. विशेषज्ञता के क्षेत्र दैनिक राशिफल साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल ज्योतिषीय उपाय पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान व्रत-त्योहार एवं शुभ मुहूर्त वास्तु शास्त्र धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं लाइफस्टाइल एवं वेलनेस हेल्थ एवं फिटनेस डिजिटल कंटेंट राइटिंग एवं SEO पाठकों तक विश्वसनीय, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना शौर्य पुंज की लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है.

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