शरीर की हर गांठ सामान्य नहीं होती, एक्सपर्ट से जानिए इस 'Silent Cancer' के चेतावनी संकेत

Updated:
विज्ञापन

Sarcoma Cancer Warning Signs (PC: AI Image)

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

Sarcoma Cancer: कैंसर के बारे में सोचते हैं, तो उनके मन में फेफड़े, ब्रैस्ट या कोलन कैंसर का नाम आता है, लेकिन सारकोमा (Sarcoma) ऐसा कैंसर है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. आइए जानते हैं एक्सपर्ट से सारकोमा के लक्षण, कारण, इलाज और बचाव के बारे में.

विज्ञापन

Sarcoma Cancer: शरीर में बनने वाली हर गांठ सामान्य नहीं होती. कई बार यह दुर्लभ लेकिन गंभीर कैंसर सारकोमा (Sarcoma) का संकेत भी हो सकती है. यह कैंसर हड्डियों, मांसपेशियों, फट नसों और अन्य कनेक्टिव टिशू में बनता है. हालांकि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य चोट, सूजन या सिस्ट जैसे लगते हैं, इसलिए इसका पता देर से चल पाता है. यही वजह है कि इसे कई बार 'साइलेंट कैंसर' भी कहा जाता है. आइए जानते हैं डॉ. निशीथ प्रवीणचंद्र गुप्ता (मस्कुलोस्केलेटल ऑन्कोलॉजी, नारायणा आरएन टैगोर हॉस्पिटल, मुकुंदपुर, कोलकाता) से सारकोमा के लक्षण (Sarcoma Cancer Warning Signs), कारण, इलाज और बचाव के बारे में.

विज्ञापन

सारकोमा क्या है? ( What is Sarcoma Cancer)

सारकोमा कोई एक बीमारी नहीं बल्कि 70 से अधिक प्रकार के कैंसरों का समूह है. इसे मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जाता है, सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा, जो लगभग 80% मामलों में पाया जाता है, और बोन सारकोमा, जो हड्डियों को प्रभावित करता है. भारत में इविंग सारकोमा, सिनोवियल सारकोमा और ऑस्टियोसारकोमा सबसे अधिक देखे जाने वाले प्रकार हैं.

भारत में कितना आम है सारकोमा?

डॉ. निशीथ प्रवीणचंद्र गुप्ता बताते हैं कि सारकोमा दुर्लभ कैंसर जरूर है, लेकिन भारत जैसे बड़े देश में इसके मरीजों की संख्या कम नहीं है. अनुमान के मुताबिक, प्रति 1 लाख लोगों में 1 से 2 मामले सामने आते हैं. वहीं, 0 से 14 वर्ष के बच्चों में होने वाले सभी कैंसरों में लगभग 3 से 4 प्रतिशत मामले सारकोमा के होते हैं.

यह भी पढ़ें: सिर्फ महिलाओं की नहीं है इंफर्टिलिटी की समस्या, पुरुषों से जुड़े कारण भी होते हैं जिम्मेदार

Sarcoma Cancer के शुरुआती चेतावनी संकेत


Sarcoma Cancer Causes (PC: AI Image)
Sarcoma Cancer Causes (PC: AI Image)

सारकोमा शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है, इसलिए इसके लक्षण भी अलग-अलग हो सकते हैं. इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

  • शरीर में बिना दर्द की गांठ दिखाई देना.
  • गांठ का धीरे-धीरे आकार बढ़ना.
  • लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन.
  • बिना किसी चोट के लगातार हड्डी में दर्द.
  • त्वचा के नीचे गहराई में महसूस होने वाली गांठ.
  • गोल्फ बॉल के आकार से बड़ी गांठ.

क्यों देर से पकड़ में आता है सारकोमा?

डॉक्टर बताते हैं कि सारकोमा के शुरुआती लक्षण अक्सर मांसपेशियों में खिंचाव, सिस्ट या सामान्य सूजन जैसे दिखाई देते हैं. इसी वजह से कई मरीज महीनों तक इलाज नहीं कराते या कई डॉक्टरों से सलाह लेने के बाद भी सही सॉल्यूशन नहीं हो पाता. इससे बीमारी आगे बढ़ सकती है.

बायोप्सी क्यों है सबसे जरूरी?

डॉ. निशीथ प्रवीणचंद्र गुप्ता के अनुसार, किसी भी संदिग्ध गांठ को हटाने से पहले बायोप्सी कराना बेहद जरूरी है. इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि गांठ कैंसर है या नहीं और अगर है, तो उसका प्रकार क्या है. सही बायोप्सी के आधार पर ही इलाज की दिशा तय की जाती है. बिना जांच के गांठ निकाल देने से बाद में इलाज अधिक गंभीर हो सकता है.

Sarcoma Cancer का इलाज कैसे होता है?

डॉ. निशीथ प्रवीणचंद्र गुप्ता बताते हैं कि आज सारकोमा के इलाज में काफी प्रगति हुई है. मॉडर्न इमेजिंग, सटीक बायोप्सी और मल्टीडिसिप्लिनरी इलाज की मदद से मरीजों के बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं. इलाज में सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी और कीमोथेरेपी शामिल हो सकती हैं. कई मामलों में अब लिम्ब-सेविंग सर्जरी के जरिए प्रभावित हाथ या पैर को बचाना भी संभव हो गया है.

यह भी पढ़ें: क्या 6 घंटे से कम की नींद बढ़ा रही है आपका वजन? एक्सपर्ट से जानिए कितना सही है यह दावा


विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola