Dhanbad News : बलियापुर की बबीता और दीदी केक एंड बेकरी ने लिखी कामयाबी की इबारत

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जज्बा. उम्मीद और हौसले के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं महिला स्वावलंबन की कहानियां

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कठिन संघर्ष कभी नाकाम नहीं जाता है, बशर्ते उसमें लक्ष्य की एकाग्रता और संकल्प की दृढ़ता हो. ऐसी जद्दोजहद के आड़े कोई कमी या तंगी आड़े नहीं आती. ऐसी ही सफल कहानी नये साल को उम्मीद और हौसले के साथ शुरू करने का प्रेरक पैकेज देती है. बलियापुर प्रखंड की सिंदूरपुर पंचायत की हैचरी यूनिट चलानेवाली बबीता कुमारी हों या महिला एसएचजी संचालित दीदी केक एंड बेकरी, घर की चौखट या पर्दा से बाहर निकली महिलाओं के संघर्ष ने कामयाबी की ऐसी ही इबारत लिखी है. महिला स्वावलंबन की सक्सेस स्टोरी के लिए पढ़ें प्रभात खबर के शोभित रंजन व ज्योति की रिपोर्ट.

दीदी केक एंड बेकरी से रोजाना एक हजार रुपये होती है कमाई :

बलियापुर प्रखंड की सिंदूरपुर पंचायत की अष्टमी देवी, अनिता कुमारी व रेणुका मल्लिक एक साल से दीदी केक एंड बेकरी का संचालन कर रहीं. रेणुका मल्लिक ने बताया कि बेकरी को चलाने के लिए सरकारी पंचायत भवन दिया गया है. इसमें बेकरी यूनिट की स्थापना की है. योजना के तहत सरकार की ओर से केक बनाने के लिए मशीन व फ्रिज दिया गया है. केक, पेस्ट्री आदि बनाने का प्रशिक्षण भी सरकार की ओर से मिला. दीदी समूह की अनिता कुमारी ने बताया कि केक आदि बेच कर रोजाना एक हजार रुपये की कमाई होती है. एक पेस्ट्री को रीटेल में पांच तथा केक को 220 रुपये में बेचती हैं. वहीं होलसेल में केक 120 से 150 रुपये में बिकता है. महीने में लगभग 25 से 30 हजार रुपये की कमाई हो जाती है.

हेचरी यूनिट का संचालित कर रहीं बबीता :

सिंदूरपुर पंचायत के मोहनपुर की बबीता कुमारी हेचरी यूनिट का संचालन कर अपना व अपने परिवार का पालन पोषण कर रही हैं. बबीता 200 से अधिक मुर्गियां पाल रहीं हैं. बबीता ने बताया कि रुरबन मिशन योजना के तहत मुर्गी पालन के लिए शेड बनाया गया. वर्ष 2020 से वह मुर्गीपालन कर रही हैं. इससे पहले सरकार द्वारा ट्रेंनिंग के बाद मशीन दी गयी है. उससे अंडा से चूजा निकाला जाता है. हेचरी यूनिट से हर माह 10 से 15 हजार की कमाई होती है. इसके अलावा बबीता खेती से भी जुड़ी हैं. घर के बगल में खेत हैं, जहां सीजन के हिसाब से सब्जी की खेती करती हैं.

जेएसएसपीएस से मिलती है मदद :

झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) से दीदी समूह को मदद मिलती है. महिलाओं को निबंधन करवाने के बाद नौ से 10 माह में लोन भी मिलता है. इसमें उन्हें कम ब्याज देना पड़ता है. जेएसएलपीएस से जुड़ी महिलाएं व्यक्तिगत लोन भी ले सकती हैं. इसमें ब्याज दर में छूट मिलती है.

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डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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