आरएस मोर कॉलेज की जमीन पर बना पीएम आवास

Updated at : 23 Feb 2020 6:59 AM (IST)
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आरएस मोर कॉलेज की जमीन पर बना पीएम आवास

अशोक कुमार, धनबाद : आरएस मोर कॉलेज के जिस मैदान पर वहां के छात्र-छात्राएं खेला करते थे, आज वही मैदान इनसे दूर हो गया है. चहारदीवारी के अभाव में इस मैदान पर आज आसपास की बस्ती के दबंगों की नजर है. नये खतियान के अनुसार कॉलेज का परिसर 10.8 एकड़ में फैला है. उसमें करीब […]

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अशोक कुमार, धनबाद : आरएस मोर कॉलेज के जिस मैदान पर वहां के छात्र-छात्राएं खेला करते थे, आज वही मैदान इनसे दूर हो गया है. चहारदीवारी के अभाव में इस मैदान पर आज आसपास की बस्ती के दबंगों की नजर है. नये खतियान के अनुसार कॉलेज का परिसर 10.8 एकड़ में फैला है. उसमें करीब छह एकड़ क्षेत्रफल मैदान का है.

पर उसमें से चार एकड़ जमीन पर वहां रह रहे धीवर परिवार ने दावा करते हुए धनबाद न्यायालय में मुकदमा दर्ज किया है. इस कारण पूरी जमीन पर कॉलेज की कोई गतिविधि नहीं होने दी जा रही है. कॉलेज प्रशासन ने इसकी शिकायत गोविंदपुर अंचलाधिकारी से लेकर उपायुक्त तक से की है, पर अब तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है.
चहारदीवारी के अभाव में कॉलेज परिसर में असामाजिक तत्वों का बना अड्डा, प्रबंधन परेशान
कॉलेज के पास नहीं हैं पूरे कागजात
आरएस मोर कॉलेज की स्थापना 1959 में गोविंदपुर अंचल के रतनपुरा मौजा में हुई. नये खतियान के अनुसार कॉलेज की जमीन का खाता संख्या 261 है. इसमें इसके दो प्लॉट नंबर 565 और 569 बना है. जिला प्रशासन के साथ किये पत्राचार में कॉलेज ने दावा किया है कि धीवर परिवार के नाम केवल 12 डिसमिल जमीन है.
उसे इन लोगों ने कॉलेज की स्थापना से पहले मोर परिवार को बेच दिया था. उस जमीन को बाद में कॉलेज को दान कर दिया गया था. कॉलेज की स्थापना में स्थानीय लोगों के अलावा समाजसेवी महावीर महतो ने उल्लेखनीय योगदान दिया था. कॉलेज को मिली जमीन कई प्लॉटों में बंटी हुई है.
उनमें से कुछ प्लॉट के कागजात कॉलेज के पास नहीं हैं. कॉलेज प्रशासन के अनुसार बंगाल के पुरुलिया निबंधन कार्यालय में हैं, क्योंकि यह कागजात तत्कालीन मानभूम जिले से संबंधित है और मानभूम जिला का मुख्यालय तब पुरुलिया में हुआ करता था.
विवादित जमीन पर कैसे बना आवास
दूसरी ओर, कॉलेज की विवाद जमीन पर एक धीवर परिवार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास निर्माण किया है. वहीं दूसरे परिवार ने निर्माण शुरू कर दिया है. यहां सवाल उठ रहा है कि यदि जमीन विवादित है या फिर कोर्ट में मामला चल रहा है, तो प्रखंड कार्यालय कैसे उस भूमि पर पीएम आवास बनने की स्वीकृति दी.
सड़क चौड़ीकरण में टूट गयी है चहारदीवारी : तीन वर्ष पहले एनएच टू सिक्स लेन निर्माण के दौरान कॉलेज के सामने की 700 फुट लंबी दीवार तोड़ कर 7200 वर्ग फुट जमीन चौड़ीकरण के लिए ली गयी थी, लेकिन इसके बाद भी आज तक दोबारा चहारदीवारी का निर्माण नहीं करवाया गया. और न ही जमीन के बदले कॉलेज को प्रशासन की ओर से कोई मुआवजा मिला.
कॉलेज की जमीन की स्थिति के संबंध में गोविंदपुर के अंचलाधिकारी, एसडीओ और उपायुक्त धनबाद को पिछले नौ-10 वर्षों के दौरान कई बार जानकारी दी गयी. प्रशासन को ही कार्रवाई करनी है.
डॉ प्रवीण कुमार सिंह, प्राचार्य, आरएस मोर कॉलेज
किसी भी सूरत में विवादित जमीन पर पीएम आवास योजना के तहत निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती है. इस मामले की जांच करायी जायेगी. अगर निर्माण विवादित भूमि पर पाया जायेगा, तो दोषी को चिह्नित कर कार्रवाई की जायेगी.
वंदना भारती, अंचलाधिकारी, गोविंदपुर
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