ढाई करोड़ के विवाह भवनों में डेढ़ वर्ष से लटके हैं ताले, राजस्व का हो रहा नुकसान
Updated at : 02 Aug 2019 7:55 AM (IST)
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धनबाद : लगभग ढाई करोड़ की लागत से धनबाद शहरी क्षेत्र में बने चार विवाह भवनों में ताला लटका हुआ है. इससे जिला परिषद को हर माह लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है. आम लोगों को भी शादी-विवाह के लिए सस्ती दर पर जगह नहीं मिल पा रही है. कहां-कहां हैं भवन […]
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धनबाद : लगभग ढाई करोड़ की लागत से धनबाद शहरी क्षेत्र में बने चार विवाह भवनों में ताला लटका हुआ है. इससे जिला परिषद को हर माह लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है. आम लोगों को भी शादी-विवाह के लिए सस्ती दर पर जगह नहीं मिल पा रही है.
कहां-कहां हैं भवन : जिला परिषद की आंतरिक आय बढ़ाने के लिए शहर में पांच विवाह भवन बनाये गये. आज की तारीख में इनमें से चार में ताला लगा हुआ है, जबकि कला भवन के सामने एक भवन को हाइकोर्ट के निर्देश पर पिछले दिनों चालू किया गया.
यह भवन भी लगभग चार माह तक बंद रहा. इससे लगन के मौसम में बुक कराने वाले लोग परेशान रहे. जिला परिषद की तरफ से एक विवाह भवन का निर्माण गोल्फ ग्राउंड रोड में रेड क्रॉस भवन के पास कराया गया.
यह भवन जिला परिषद के सीइओ सह डीडीसी बंगला से भी सटा है. 65 लाख रुपये की लागत से बने इस भवन का उद्घाटन निर्माण पूर्ण होने के एक वर्ष बाद भी नहीं हो पाया है. इससे कुछ दूर पर खड़ेश्वरी मंदिर के बगल में कई वर्ष पूर्व लगभग 60 लाख रुपये में बने विवाह भवन में भी ताला लटका हुआ है. इसका पहले टेंडर हुआ था. टेंडर अवधि खत्म होने के बाद इसका दुबारा टेंडर नहीं हो सका.
बेकारबांध के भवन का भी उद्घाटन नहीं
गोल्फ ग्राउंड के समीप जिप उपाध्यक्ष के पुराने बंगला को भी पुनरुद्धार (रिनोवेट) कर विवाह भवन बनाया गया. इस पर 15 लाख रुपये खर्च किये गये. लेकिन, आज यह भवन दो वर्ष बाद फिर खंडहर में तब्दील होने लगा है.
पूरा परिसर जंगल-झाड़ से भर चुका है. इसे कोई देखने वाला नहीं है. राजेंद्र सरोवर (बेकारबांध) के एक छोर पर पार्क के पास भी 65 लाख रुपये से नया विवाह भवन बनाया गया. इसका निर्माण पूरा हुए लगभग एक वर्ष हो चुका है. लेकिन, इसका न तो उद्घाटन हुआ और न ही टेंडर.
क्या हो रहा नुकसान : अगर शहरी क्षेत्र के चारों विवाह भवन चालू रहते तो जिला परिषद को हर माह लाखों का राजस्व प्राप्त होता. एक विवाह भवन का एक दिन का किराया औसतन 30 से 40 हजार रुपये है. अगर इनका टेंडर भी हो जाए तो भी जिप को लाखों रुपये की आय होती.
साथ ही, गरीब व मध्यम वर्ग के लोगों को भी शादी-विवाह के लिए सस्ती दर पर जगह मिल पाती. निजी मैरेज हॉल या होटलों, क्लब में बैक्वेट हॉल का किराया औसतन डेढ़ लाख रुपये से ज्यादा ही है.
जिला परिषद के आंतरिक राजस्व बढ़ाने के प्रति अधिकारी गंभीर नहीं हैं. कई बार जिप के सीइओ को इन विवाह भवनों का टेंडर कराने को कहा गया है. बोर्ड की बैठक में भी इस पर चर्चा हुई थी. जल्द ही इन भवनों को चालू कराने के लिए मुख्यमंत्री से मिलेंगे. पूरे जिले में ऐसे लगभग दो दर्जन विवाह भवन हैं. अधिकारियों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी.
रोबिन चंद्र गोराईं, अध्यक्ष, जिला परिषद, धनबाद
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