इंसानी दखल से सिमटी पारसनाथ की हरियाली
Updated at : 16 Sep 2018 8:12 AM (IST)
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धनबाद : मानव हस्तक्षेप के कुप्रभावों से धरती का कोई भी कोना अप्रभावित नहीं रहा है. अपने देश में स्थिति तो और खराब है. यहां इंसानी दखल से केरल व बैक वाटर से लेकर हिमालय की ऊंचाइयों पर स्थित ग्लेशियर व जंगल नहीं बचे हैं. इसमें झारखंड की ऊंची पहाड़ी पारसनाथ व उसके इर्द-गिर्द स्थित […]
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धनबाद : मानव हस्तक्षेप के कुप्रभावों से धरती का कोई भी कोना अप्रभावित नहीं रहा है. अपने देश में स्थिति तो और खराब है. यहां इंसानी दखल से केरल व बैक वाटर से लेकर हिमालय की ऊंचाइयों पर स्थित ग्लेशियर व जंगल नहीं बचे हैं. इसमें झारखंड की ऊंची पहाड़ी पारसनाथ व उसके इर्द-गिर्द स्थित मधुबन जंगल भी शामिल हैं.
यहां बढ़ती मानवीय गतिविधि की वजह से पिछले 40 सालों में यहां के जंगल की मूल वनस्पतियां 50 फीसद तक कम हो गयी है. इनकी जगह एलियन वनस्पतियों ने ले लिया है. इसकी वजह से यहां का पर्यावरण संतुलन तेजी से बिगड़ रहा है. यह खुलासा विनोबा भावे विश्वविद्यालय के वनस्पति विभाग के प्रो पीके मिश्रा के नेतृत्व में रिसर्च टीम के अध्ययन में हुआ है. प्रो पीके मिश्रा पारसनाथ व वहां के जंगल पर पिछले 40 सालों से अध्ययन कर रहे हैं.
छा रहा एलियन : अपने अध्ययन के संबंध में डॉ पीके मिश्रा बताते है कि पारसनाथ के जंगल की स्थिति पर अध्ययन दो हिस्सों में बंटा हुआ है. पहले चरण में यहां मानवीय गतिविधि के कारण यहां कि हरियाली पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया था. करीब 10 साल पहले पाया गया कि यहां की मूल वनस्पतियों पर एलियन वनस्पति तेजी से हावी हो रहे हैं. इसके बाद इसके कारणों का अध्ययन किया जा रहा है.
वनस्पतियों का विकास अवरुद्ध : यहां एलियन पौधे (पूटूस व भटकुइयां) जैसे पौधों की जड़ों से निकलने वाला एलिलो केमिकल (एक तरह का रसायन) का यहां की मूल वनस्पतियों को काफी प्रभावित कर पड़ रहा है. इस रसायन की वजह से मूल वनस्पतियों का विकास थम गया है.
सिमटती ग्रीन कैनोपी से बढ़ती आशंकाएं
पारसनाथ पर शोध के लिए चार स्टेशनों में बांटा गया है. परिक्रमा पथ व शिखरजी को स्टेशन चार के अंतर्गत रखा गया है. यह क्षेत्र से सर्वाधिक प्रभावित है. स्टेशन में पिछले दो दशकों में एलियन पौधों का विस्तार तेजी हुआ है. यहां बाहर से आये पुटूस व भटकुइयां जैसे पौधे तेजी से फैल रहे हैं. इसकी वजह से यहां घास (दूब) जैसी मूल वनस्पति लगभग नष्ट हो गयी हैं. साथ ही इन जगहों पर अन्य वनस्पति भी प्रभावित हुए हैं. इनमें प्रकाश संश्लेषन काफी धीमा हो गया है.
स्टेशन दो व तीन : यह स्टेशन परिक्रमा पथ से दूर था. यहां जंगल उस रफ्तार से नहीं कम हुआ है, जिस रफ्तार से परिक्रमा पथ के इर्द-गिर्द कम हुए हैं. इन दोनों स्टेशनों पर पिछले चार दशकों में ग्रीन कैनोपी में 20 से से 30 फीसद कमी आ गयी है. अध्ययन के दौरान पारसनाथ के स्टेशन एक पर जंगल की स्थिति ठीक है. इस जगह पर यहां मानवीय गतिविधि बहुत ही कम है. इन जगहों पर जंगल सबसे अच्छी स्थिति में है.
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