इंटक महासचिव जामा ने कोल सचिव को लिखा पत्र सभी कमेटियों में इंटक को प्रतिनिधित्व की मांग की

Updated at : 02 Aug 2018 6:58 AM (IST)
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इंटक महासचिव जामा ने कोल सचिव को लिखा पत्र सभी कमेटियों में इंटक को प्रतिनिधित्व की मांग की

धनबाद/बेरमो : राष्ट्रीय खान मजदूर फेडरेशन (इंटक) के सेकेट्री जेनरल एसक्यू जामा ने बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई के बाद कोयला सचिव को पत्र लिखा है. उन्होंने अदालती फैसले का हवाला देते हुए कहा है कि न्यायालय ने इंटक विवाद मामले में स्थगन आदेश को खारिज करने की ददई दुबे की याचिका को […]

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धनबाद/बेरमो : राष्ट्रीय खान मजदूर फेडरेशन (इंटक) के सेकेट्री जेनरल एसक्यू जामा ने बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई के बाद कोयला सचिव को पत्र लिखा है. उन्होंने अदालती फैसले का हवाला देते हुए कहा है कि न्यायालय ने इंटक विवाद मामले में स्थगन आदेश को खारिज करने की ददई दुबे की याचिका को पूरी तरह से डिस्पोज-ऑफ कर दिया है. साथ ही जेबीसीसीआइ में इंटक के प्रतिनिधित्व के सवाल पर लगे स्टे ऑर्डर को भी समाप्त कर दिया है.
इस आधार पर उन्होंने मांग की है कि कोल इंडिया की अब सभी कमेटियों में पूर्व की भांति इंटक को प्रतिनिधित्व दिया जाये. पत्र में उन्होंने कहा है कि बुधवार को कोर्ट ने डब्लूपी (सिविल) नंबर 8152¹/2016 को डिसमिस कर दिया है, जिसमें 16 सितंबर 2016 से इंटक को जेबीसीसीआइ कमेटी से बाहर कर दिया गया था. अब चूंकि कोर्ट ने इसे डिस्पोज कर दिया है इसलिए इंटक को पूर्व की तरह सभी कमेटियों में शामिल किया जाये.
तारीख पर तारीख ने तबाह किया इंटक को
दिल्ली हाइकोर्ट में इंटक मामले को लेकर पूर्व में गत 12 दिसंबर 2017 एवं एक मार्च 2018 को सुनवाई टल गयी थी. एक मार्च को दुबारा कोर्ट ने एक अगस्त 2018 को सुनवाई की तिथि तय की थी. माननीय न्यायाधीश विभु बाखडू के न्यायालय में 12 दिसंबर एवं 1 मार्च को सुनवाई नहीं हो सकी थी तथा कोर्ट ने अंतरिम राहत को जारी रखते हुए अगली सुनवाई की तिथि 1 अगस्त 2018 को मुकर्रर की थी.
सुनवाई की हर तिथि उम्मीद तो जगाती है, पर तिथि के टल जाने से निराशा और घनी हो जाती है. सलटते दिखते विवाद नया रूप लेने लगते हैं. बताते चलें कि सितंबर 2016 से लेकर अबतक न्यायालय में सुनवाई की नौ तारीखें पड़ चुकी हैं.
मामले कर दिये गये थे टैग : सूत्रों की मानें तो अभी यह मामला और लंबा खिंचने की उम्मीद है. 12 दिसंबर 2017 के पहले इस मामले पर न्यायालय में 11 जुलाई 2017 को सुनवाई होनी थी. इसे बढ़ाकर 12 दिस‍ंबर 2017 कर दिया गया था, जबकि 11 जुलाई के पहले 27 अप्रैल 2017 को सुनवाई थी. इसमें सुनवाई की अगली तिथि 11 जुलाई 2017 को हुई थी. 27 अप्रैल 2017 के पहले 23 मार्च 2017, 25 जनवरी 2017, 20 जनवरी 2017 को सुनवाई की तिथि थी. बाद में कोर्ट ने सभी पांच मामलों को एक साथ टैग कर दिया था.
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