साल-दर-साल श्रावणी मेले की बढ़ती गयी भव्यतासंजीव मिश्रा

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देवघर : झारखंड की सांस्कृतिक राजधानी देवघर में स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ को मनोकामना लिंग भी कहा जाता है. मान्यता है कि बाबा के दर पर आने वाले भक्त खाली हाथ नहीं लौटते हैं. बाबा मंदिर में जैसे-जैसे भक्तों की संख्या बढ़ती गयी, व्यवस्था व सुविधा में भी बदलाव होता चला गया. 15 वर्ष […]

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देवघर : झारखंड की सांस्कृतिक राजधानी देवघर में स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ को मनोकामना लिंग भी कहा जाता है. मान्यता है कि बाबा के दर पर आने वाले भक्त खाली हाथ नहीं लौटते हैं. बाबा मंदिर में जैसे-जैसे भक्तों की संख्या बढ़ती गयी, व्यवस्था व सुविधा में भी बदलाव होता चला गया. 15 वर्ष पहले हजारों की संख्या में भक्त आते थे, आज इनकी संख्या लाखों में हो गयी है.

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दरअसल, आज हम 15 वर्षों के बदलाव का जिक्र इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि प्रभात खबर का देवघर संस्करण भी 15 वर्ष पूरा कर चुका है. इन 15 वर्षों में प्रभात खबर ने बाबा मंदिर से जुड़ी हरेक छोटी-बड़ी खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है तथा यहां के बदलाव को करीब से देखा है.
बाबा मंदिर में हुए प्रमुख बदलावों पर एक नजर…
70 सालों बाद छह जुलाई 2017 को अजीतानंद ओझा को 28वां सरदार पंडा नियुक्त किया गया. इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वर्तमान में गुलाबनंद ओझा सरदार पंडा की गद्दी पर आसीन हैं
15 वर्षों में श्रावणी मेला का विस्तार तेजी से हुआ. पहले कांवरियों की कतार बरमसिया चौक तक पहुंच रही थी, वहीं आज यह कतार 15 किमी दूर कुमैठा तक पहुंच रही है.
श्रावणी मेले में भीड़ नियंत्रण के लिए स्पर्श पूजा बंद कर अरघा से जलार्पण की व्यवस्था शुरू हुई. इसके लिए गर्भ गृह में मुख्य अरघा व बाहर में बाह्य अरघा से जलार्पण की व्यवस्था की गयी है.
कांवरियों की सुविधा के लिए रूट लाइन में सुविधा के लिए पंडाल का निर्माण कराया जाने लगा.
वर्ष 2002- 03 में पूर्व डीजीपी की अगुवाई में प्रबंधन बोर्ड का गठन किया गया. उसके बाद तत्कालीनी डीसी अरुण कुमार सिंह के कार्यकाल में कतार व्यवस्थित करने के लिए संस्कार मंडप का निर्माण कराया गया. उसके बाद उमा भवन का निर्माण हुआ.
कतारबद्ध पूजा कराने के लिए बाबा मंदिर से लेकर मान सरोवर तक फुट ओवरब्रिज का निर्माण हुआ. इसके बाद क्यू कॉम्प्लेक्स का काम प्रारंभ कराया गया.
बोर्ड के कार्यकाल में व्यवस्था को बेहतर बनाये रखने के लिए पंडा धर्मरक्षिणी के साथ बैठक कर शीघ्रदर्शनम कूपन की व्यवस्था लागू की गयी
मंदिर के सामने पाठक धर्मशाला को तोड़ कर सुविधा केंद्र का निर्माण कराया गया
शिवगंगा को साफ करने के लिए करीब नौ करोड़ की लागत से फिल्ट्रेशन प्लांट का निर्माण किया गया
बाबा मंदिर की गतिविधि पर नजर बनाये रखने के लिए सीसीटीवी कंट्रोल रूम व मंदिर की व्यवस्था को पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत किया गया
वर्ष 2015 में बाबा बैद्यनाथ बासुकीनाथ श्राइन बोर्ड का किया गया गठन
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