धर्मरक्षिणी सभा के चुनावी नतीजों का अर्थ

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 19 Nov 2018 7:20 AM

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संजय मिश्र, देवघर : पंडा धर्मरक्षिणी चुनाव का हर घंटे विश्लेषण करने वाले भी हैरान हैं लेकिन पुरोहित समाज ने अपना फैसला सुना दिया है. यह समाज अब कूप मंडूक बना कर रखने वालों के हाथों में नेतृत्व नहीं देने वाला है. पुरोहित समाज ने एक बार फिर पंडा धर्मरक्षिणी सभा का नेतृत्व अगले पांच […]

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संजय मिश्र, देवघर : पंडा धर्मरक्षिणी चुनाव का हर घंटे विश्लेषण करने वाले भी हैरान हैं लेकिन पुरोहित समाज ने अपना फैसला सुना दिया है. यह समाज अब कूप मंडूक बना कर रखने वालों के हाथों में नेतृत्व नहीं देने वाला है. पुरोहित समाज ने एक बार फिर पंडा धर्मरक्षिणी सभा का नेतृत्व अगले पांच साल तक करने के लिए पुरानी टीम के अध्यक्ष, महामंत्री और मंत्री को चुन लिया है.
कहने के लिए यह पंडा समाज का चुनाव है लेकिन यह समाज अपना नेतृत्व किन हाथों में सौपेंगा, इसको लेकर समाज के हर वर्ग में उत्सुकता बनी हुई थी. चुनाव नतीजों के आने के बाद यह तय हो गया कि पुरोहित समाज ने पुराने टीम को नया करने के लिए फिर से मौका दिया है. पुरोहित समाज ने इस चुनाव में यह साफ संदेश दे दिया है कि अध्यक्ष व महामंत्री को उनके अधूरे काम को पूरा करने का मौका मिलना ही चाहिए.
चुनाव नतीजों के साथ यह याद कीजिए कि महामंत्री कार्तिक नाथ ठाकुर ने पंडा धर्मरक्षिणी सभा में महिलाओं की भागीदारी तय करने का वादा किया है. यह वादा बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि पुरोहित समाज की दो महिलाएं रीता राज मेयर और नीतू देवी डिप्टी मेयर हैं. शैलजा देवी, माया देवी व शुभलक्ष्मी देवी वार्ड पार्षद हैं, लेकिन खुद अपने समाज का नेतृत्व करने में इनकी भागीदारी नहीं है. अगर अपने नये कार्यकाल में श्री ठाकुर अपने वादे पर खरे उतरते हैं, तो पुरोहित समाज को नेतृत्व करने का जिम्मा महिलाओं को भी मिलेगा, जो ऐतिहासिक होगा.
इस चुनाव में अध्यक्ष पद के उम्मीदवार दुर्लभ मिश्र की अपने प्रतिद्वंद्वी प्रो. सुरेश भारद्वाज से हुई हार भी गैर मामूली है. देवघर के हर समाज के लोग यह मान कर चल रहे थे कि दुर्लभ मिश्र को हराना मुश्किल ही नहीं नामुकिन है. प्रो. भारद्वाज ने नामुकिन को मुमकिन कर दिखाया है. उनको पंडा समाज ने खुलकर वोट दिया है.
पुरोहित समाज ने प्रो. भारद्वाज पर जो विश्वास दिखाया है, उसकी कल्पना किसी को नहीं थी. दुर्लभ मिश्र ने तो इसके पहले बिना प्रचार के चुनाव जीतने का करिश्मा दिखाया था. इस बार उनका जादू नहीं चला.
बहरहाल जीत दर्ज करने वाले तमाम उम्मीदवारों को बधाई और शुभकामनाएं. शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव की तैयारी करवाने और आम चुनाव जैसे इंतजाम करवाने के लिए पूरी चुनावी टीम को ढेर सारा धन्यवाद. और हां, हारने वालों के साथ, उनकी लड़ाई में तो प्रभात खबर उनके साथ है ही.
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