देवघर : मोती, राजेश व विष्णु 48 घंटे की रिमांड पर

Updated at : 30 Sep 2018 10:23 AM (IST)
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देवघर : मोती, राजेश व विष्णु 48 घंटे की रिमांड पर

फर्जी कंपनी के सहारे 107 करोड़ आइटीसी हेराफेरी का मामला देवघर: फर्जी कंपनी के सहारे 107 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) हेराफेरी मामले के आरोपितों पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के शिवपुर थाना क्षेत्र के धर्मतल्ला लेन शिवपुर निवासी राजेश साव, रिसरा थाना क्षेत्र स्थित अंजुसन रोड निवासी विष्णु कुमार साव, मंगरा थाना […]

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फर्जी कंपनी के सहारे 107 करोड़ आइटीसी हेराफेरी का मामला
देवघर: फर्जी कंपनी के सहारे 107 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) हेराफेरी मामले के आरोपितों पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के शिवपुर थाना क्षेत्र के धर्मतल्ला लेन शिवपुर निवासी राजेश साव, रिसरा थाना क्षेत्र स्थित अंजुसन रोड निवासी विष्णु कुमार साव, मंगरा थाना क्षेत्र स्थित कलबाजार बंसबेरिया निवासी मोती साव को कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने 48 घंटे की रिमांड पर लाया है.
कोर्ट से रिमांड आदेश मिलते ही नगर पुलिस सेंट्रल जेल पहुंची और तीनों को रिसीव कर नगर थाना लाया. इन तीनों से पुलिस आइटीसी हेराफेरी के बारे में पूछताछ करेगी. वहीं संदीप खोवाला से कैसे संपर्क हुआ, इसकी भी जांच की जायेगी. रिमांड अवधि पूरी होने के बाद कोर्ट ने तीनों के चिकित्सीय जांच कराकर पुन: कोर्ट में पेश कराने का आदेश दिया है.
चौंकाने वाली बात सामने आयी है कि कोलकाता के एक जूट मिल में काम करने वाले मजदूर मोती साव के नाम पर शातिरों ने साहा इंटरप्राइजेज नाम से एक कंपनी बना दी. इस कंपनी के नाम पर 107 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार भी कर लिया. कंपनी का पता देवघर का दिया गया था. देवघर की साहा इंटरप्राइजेज व ओम ट्रेडिंग नाम की दो कंपनियों के नाम पर 214 करोड़ रुपये के कारोबार का दावा किया गया. लेकिन कारोबार के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गयी.
बाद में दोनों कंपनियों के नाम पर करीब 24-24 करोड़ रुपये का आइटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) के आधार पर करीब 48 करोड़ रुपये के काले धन को सफेद किया गया. पूर्व में दोनों कंपनियों के खिलाफ देवघर नगर थाना में दो एफआइआर किया गया था. राज्य भर में 21 फर्जी कंपनियों के सहारे काला धन को सफेद करने की साजिश रची गयी थी. इस खेल के पीछे इन कंपनियों का तार राजस्थान, बंगाल, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों तक जुड़ा है.
करोड़ों की हेराफेरी की पीछे अंतरराज्यीय गिरोह काम कर रहा है. मामले में एक अधिवक्ता की संलिप्तता की गहनता से जांच की जा रही है. जब्त कंप्यूटर व हार्ड डिस्क की जांच चल रही है. जांच के उपरांत अधिवक्ता की भूमिका स्पष्ट होगा.
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