लागू नहीं हुआ एसओपी, कैसे सुधरे रिजल्ट
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 19 Feb 2018 5:25 AM
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कार्यशैली . स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा आरडीडीइ व डीइओ को दिया गया निर्देश जिले के सरकारी हाइस्कूलों व प्लस टू स्कूलों में शुरू करना है एसओपी सिस्टम वर्ष 2016 में जारी किया गया था निर्देश, स्कूलों में अबतक नहीं हुआ अनुपालन देवघर : शिक्षा विभाग ने वर्ष 2016 में माध्यमिक व उच्च माध्यमिक […]
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कार्यशैली . स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा आरडीडीइ व डीइओ को दिया गया निर्देश
जिले के सरकारी हाइस्कूलों व प्लस टू स्कूलों में शुरू करना है एसओपी सिस्टम
वर्ष 2016 में जारी किया गया था निर्देश, स्कूलों में अबतक नहीं हुआ अनुपालन
देवघर : शिक्षा विभाग ने वर्ष 2016 में माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्तर पर वार्षिक परीक्षाफल संतोषप्रद नहीं होने के कारण विद्यालय में एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीडीयोर) सिस्टम लागू करने का निर्णय लिया गया था. इसके लिए क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक संताल परगना व जिला शिक्षा पदाधिकारी देवघर को पत्र जारी कर आवश्यक निर्देश दिया गया था, लेकिन दो वर्ष बीतने के बाद भी एसओपी सिस्टम के निर्धारित पारा मीटर को अबतक धरातल पर नहीं उतारा जा सका है. इस सिस्टम के माध्यम से विद्यालयों का शैक्षणिक माहौल, छात्र-छात्राओं के पठन-पाठन का सतत् मूल्यांकन, उनके शारीरिक विकास आदि में सुधार किया जाना है.
नये सिस्टम के माध्यम से विद्यालय में कक्षाएं आरंभ करने के पहले छात्र-छात्राओं तथा शिक्षकों की बैठक कराना निर्धारित है. इसमें अंग्रेजी व हिंदी समाचार पत्रों के मुख्य समाचार को सभी छात्र-छात्राओं को पढ़ कर सुनाना है. छात्र-छात्राओं द्वारा सुविचार प्रस्तुत करने के साथ-साथ पठन-पाठन के प्रति जागरूक करने के लिए विद्यालय के प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों द्वारा भी सुविचार प्रस्तुत किया जाना है. प्रधानाध्यापक सहित विभिन्न विषय के शिक्षक वार्षिक पाठ्य योजना अप्रैल के प्रथम पखवारे में ही तैयार कर लेना है. वार्षिक पाठ्य योजना विषयवार प्रत्येक माह तैयार किया जाना है.
पाठ्य योजना को प्रथम छह माह और दूसरे छह माह में बांटा जाना निर्धारित है. सप्ताह के बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार व शनिवार को अंतिम घंटी में कक्षावार छात्र-छात्राओं को खेलकूद में शामिल किया जाना है. छात्रों के बीच वॉलीबॉल, फुटबॉल, बैडमिंटन, कबड्डी, खो-खो आदि इंडोर गेम का आयोजन किया जाना है. सभी छात्र-छात्राओं को सप्ताह में कम से कम एक दिन पुस्तकालय एवं प्रयोगशाला अनिवार्य रूप से ले जाना है.
प्रयोगशाला में प्रयोग कराने के साथ-साथ प्रायोगिक परीक्षा लेना है. पुस्तकालय की महत्ता से अवगत कराना है. छात्र-छात्राओं के पठन-पाठन के सतत् मूल्यांकन के लिए साप्ताहिक, मासिक, अर्द्धवार्षिक एवं वार्षिक परीक्षा का आयोजन किया जाना है. कक्षा नवम से कक्षा बारहवीं तक के छात्र-छात्राओं की अर्द्धवार्षिक एवं वार्षिक परीक्षा लेते समय उनकी प्रायोगिक भी अनिवार्य रूप से लेना है. प्रायोगिक परीक्षा के अंक को भी परीक्षा परिणाम में दर्शाया जाना निर्धारित है, लेकिन विभागीय पत्र के निर्देश को धरातल पर उतारना अब भी सपना बना हुआ है.
परीक्षा की कॉपी जांचने के साथ पुस्तकालय में रखनी है उत्तरपुस्तिका
स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीडीयोर के तहत साप्ताहिक, मासिक, अर्द्धवार्षिक एवं वार्षिक परीक्षा की जांच अनिवार्य रूप से किया जाना था. इसे छात्र-छात्राओं को अवलोकन के लिए दिया जाना था.
छात्र-छात्राओं को यह भी बताया जाना था कि उनकी उत्तर पुस्तिका में कौन-कौन सा उत्तर गलत होने के कारण उन्हें न्यूनतम अंक प्राप्त हुआ है. ताकि वो भविष्य में गलती की पुनरावृत्ति नहीं कर सकें. वैसे प्रश्न जिसमें अधिकतर छात्र-छात्राओं ने गलत उत्तर दिये हैं. उनको कक्षा में पुन: पढ़ाया जाना था. विभिन्न परीक्षाओं में प्रत्येक विषय के टॉप थ्री छात्र-छात्राओं की उत्तर पुस्तिका को अनिवार्य रूप से पुस्तकालय में रखा जाना था.
अभिभावकों को देना था बैठक जानकारी
प्रत्येक वर्ष जून, सितंबर, दिसंबर एवं मार्च महीने के तृतीय सप्ताह के गुरुवार को अभिभावकों की बैठक होना तय था. इसमें आवश्यकता अनुसार बच्चों के संदर्भ में अभिभावकों को जानकारी एवं सुझाव दिया जाना था. लेकिन, इसका अनुपालन सही-सही नहीं हो रहा है.
हिंदी-अंग्रेजी भाषा में छात्रों से लिखवाना है निबंध
सिस्टम के तहत हिंदी एवं अंग्रेजी भाषा में सुधार के लिए प्रत्येक छात्र-छात्राओं से प्रत्येक बुधवार को एक-एक घंटे क्रमवार निबंध लिखवाया जाना अनिवार्य है. विशेष कक्षाओं के माध्यम से प्रत्येक शनिवार एवं रविवार को विषयवार कमजोर छात्र-छात्राओं के लिए विशेष पठन-पाठन का इंतजाम किया जाना है.
वेबसाइट पर उपलब्ध होगा क्वेश्चन बैंक
साप्ताहिक, मासिक, अर्द्धवार्षिक एवं वार्षिक परीक्षा के आयोजन में सहायता के लिए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के वेबसाइट पर क्वेश्चन बैंक उपलब्ध कराया गया. जिनका उपयोग विद्यालय द्वारा परीक्षा के लिए किया जाना है. मैट्रिक-इंटरमीडिएट की परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र-छात्राओं के सवालों के जवाब देने के लिए काउंसेलिंग की व्यवस्था की जानी है. काउंसेलिंग प्रत्येक शनिवार को आयोजित किया जाना है.
डीइओ ने कहा
एसओपी सिस्टम के तहत गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई के लिए प्रयास जारी है. विभागीय स्तर पर शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया जारी है. जल्द स्थिति सामान्य होगी.
अशोक कुमार शर्मा, डीइओ, देवघर
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