देवघर : जिले में 11 माह में सिर्फ आठ नसबंदी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 12 Feb 2018 5:39 AM
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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी नहीं लेते दिलचस्पी प्रचार-प्रसार की भी है कमी पुरुषों को जागरूक नहीं कर पा रहा विभाग देवघर : जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से कई कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं. इस पर लाखों खर्च किया जा रहा है, बावजूद नसबंदी में विभाग काफी पीछे है. विभाग के […]
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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी नहीं लेते दिलचस्पी
प्रचार-प्रसार की भी है कमी
पुरुषों को जागरूक नहीं कर पा रहा विभाग
देवघर : जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से कई कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं. इस पर लाखों खर्च किया जा रहा है, बावजूद नसबंदी में विभाग काफी पीछे है. विभाग के अनुसार वर्ष 2017-18 में जिले में नसबंदी (एनएसवी) का लक्ष्य तीन सौ निर्धारित किया गया है.
वर्ष खत्म होने में करीब डेढ़ माह शेष है, लेकिन अबतक जिले में सिर्फ आठ पुरुषों की ही नसबंदी की गयी है. यह लक्ष्य का मात्र दो प्रतिशत है. परिवार नियोजन के तहत अप्रैल 17 से मार्च 18 तक का जिले में 6500 महिलाओं के बंध्याकरण का लक्ष्य रखा गया था. इसमें अबतक 3838 बंध्याकरण किया गया है, जो कि 59 प्रतिशत है. ये आंकड़े बताते हैं कि विभागीय अधिकारी नसबंदी के लक्ष्य को पूरा करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं. प्रचार-प्रसार की भी कमी है. जबकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि महिला बंध्याकरण से काफी सरल व आसान पुरुष नसबंदी है. उन्होंने कहा कि पुरुष नसबंदी कराने के बाद वह एक दिन में पूर्ण रूप से स्वस्थ हो सकते हैं.
दो हजार रुपये दी जाती है प्रोत्साहन राशि
लाभार्थी को मिलने वाली राशि – 2000
प्रेरक या सहिया को मिलने वाली राशि – 250
डाॅक्टर को मिलने वाली राशि- 250
स्टाफ नर्स को मिलने वाली राशि- 15
नाश्ता का खर्च – 10
वैसे व्यक्ति जिसके दो संतान हैं और दोनों बच्चों के बीच तीन-तीन साल का अंतराल है, वैसे पुरुष को लाने वाले सहिया या प्ररेक को एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि मिलती है.
प्रखंड लक्ष्य कितना पूरा हुआ
देवीपुर 20 00
जिला अस्पताल 35 01
जसीडीह 35 02
करौं 35 00
मधुपुर 35 00
मोहनपुर 35 02
पालोजोरी 35 00
सारठ 35 00
सारवां 35 03
क्या कहते है अधिकारी
नशबंदी के लिए लोगों में जागरुकता की कमी है. इसके लिए स्वास्थ्यकर्मियों को पुरुषों में जागरुकता लाने के लिए कहा गया है. साथ ही इसके लिए लाभार्थी को प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है.
– डॉ एससी झा, सिविल सर्जन
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