झोपड़ी में बच्चों का जन्म, अब लालन-पालन में कठिनाई
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 30 Jan 2018 5:08 AM
देवघर : एयरपोर्ट बनाने के लिए जमीन खाली कराने के बाद भूमिहीनों के सामने उनके बच्चों की भविष्य व लालन-पालन की चिंता बड़ी समस्या बन गयी है. बाबूपुर गांव में भू-दान की जमीन से उजाड़े गये भूमिहीनों की जिंदगी हर रोज एक पहाड़ संघर्ष की तरह कट रही है. दीवाली के पहले उन्हें बेघर किये […]
देवघर : एयरपोर्ट बनाने के लिए जमीन खाली कराने के बाद भूमिहीनों के सामने उनके बच्चों की भविष्य व लालन-पालन की चिंता बड़ी समस्या बन गयी है. बाबूपुर गांव में भू-दान की जमीन से उजाड़े गये भूमिहीनों की जिंदगी हर रोज एक पहाड़ संघर्ष की तरह कट रही है. दीवाली के पहले उन्हें बेघर किये जाने के बाद पास में ही एक खाली पड़ी सरकारी जमीन पर पूरे गांव की आबादी प्लास्टिक की छावनी में रह रही है. एक ऐसा आशियाना जिसका कोई भविष्य नहीं है,
उसके नीचे पूरा संसार समेटे लगभग 50 परिवार अपने ही गांव में आज बंजारे की तरह रहने को विवश है. सुबह से शाम तक चिंता पर ही जीवन कट रहा है. प्लास्टिक व फूस के इस आशियाने में न सर्दी, गर्मी और न बरसात सहने की क्षमता है, उस आशियाने के नीचे महिला, पुरुष, बूढ़े व दुधमुहें बच्चे का लालन-पालन हो रहा है. बाबूपुर के इसी आशियाने में दो बच्चों का जन्म भी हुआ है. लेकिन अब इन बच्चों का लालन-पालन में परिजनों को कठिनाई हो रही है. बच्चों के तन पर पर्याप्त कपड़े नहीं, धात्री माता को पौष्टिक भोजन नहीं. आखिर माघ के इस सर्द महीने में नौनिहाल का स्वस्थ जीवन कैसे संवर पायेगा, यह बड़ा सवाल बना हुआ है.
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